Ram Navami 2026: गिरिडीह में रामनवमी को लेकर उत्साह चरम पर है और इसी के साथ महावीरी पताका की मांग भी तेजी से बढ़ गई है. इसी बीच गिरिडीह में साम्प्रदायिक सद्भाव और भाईचारे की एक खूबसूरत मिसाल भी देखने को मिलती है. यहां एक मुस्लिम परिवार पिछले कई दशकों से महावीरी पताका बनाने का काम कर रहा है. यह परिवार मो. इम्तियाज का है. इम्तियाज गिरिडीह शहर के भंडारीडीह इलाके के रहने वाले हैं और उनकी दुकान बड़ा चौक में हनुमान मंदिर के ठीक पीछे स्थित है. इम्तियाज बताते हैं कि उनके परिवार की तीन पीढ़ियां हर साल रामनवमी के मौके पर महावीरी पताका बनाने का काम करती आ रही हैं, जो आपसी भाईचारे और सद्भाव का सशक्त उदाहरण है.
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14 साल की उम्र से ही बनाने लगे झंडा
इम्तियाज बताते हैं कि उनके पिता भी महावीरी झंडा बनाने का काम करते थे. जब वह सिर्फ 14 साल के थे, तभी से उन्होंने यह काम शुरू कर दिया था. तब से लेकर आज तक, यानी पिछले करीब 40 वर्षों से, वह पूरे ध्यान और निष्ठा के साथ इसी काम में लगे हुए हैं. इम्तियाज का कहना है कि महावीरी झंडा (पताका) बनाते समय पूरी शुद्धता का विशेष ध्यान रखा जाता है. झंडा बनाने से पहले स्वच्छ कपड़े पहने जाते हैं और पूरे सम्मान के साथ काम किया जाता है. उन्होंने यह भी बताया कि रामनवमी से काफी पहले ही लोगों के ऑर्डर आने लगते हैं और लोग अपनी पसंद और परंपरा के अनुसार तरह‑तरह की महावीरी पताकाएं बनवाते हैं.
धरोहर है झंडा
इम्तियाज बताते हैं कि महावीरी पताका हिन्दुओं के लिए आस्था का केंद्र है तो यह सभ्यता और संस्कृति का धरोहर है. इसे संभालने का प्रयास वे करते हैं. उन्होंने यह भी बताया कि उनके यहां झंडा महज 10 रुपये में ही मिलना शुरू हो जाता है जो 1000 तक जाता है. इसके अलावा विशेष ऑर्डर पर 20000/- तक का भी झंडा मिलता है.














