Kalpwas: 3 बार गंगा स्नान और त्रिकाल संध्या समेत 10 बड़े नियम, जिसे फॉलो किये बगैर अधूरा होता है कल्पवास 

Kalpavas Rules: हिंदू धर्म में प्रयाग की पावन धरती पर माघ महीने किए जाने वाले कल्पवास का बहुत ज्यादा महत्व माना गया है. पूरे एक मास तक संगम की रेती पर किए जाने वाले जप, तप और व्रत से जुड़े कल्पवास को लेकर धर्मशास्त्र में कुछेक नियम बताए गये हैं, जिसे फॉलो किए बगैर उसका पुण्यफल प्राप्त नहीं होता है. 

विज्ञापन
Read Time: 3 mins
Kalpwas rituals: कल्पवास के 10 जरूरी नियम
NDTV

Kalpavas Ke Niyam Kya Hai: प्रयागराज के पावन त्रिवेणी संगम पर भले ही कुंभ हर 12 साल में और अर्धकुंभ 6 साल में लगता हो लेकिन यहां पर माघ का मेला (Magh Mela 2026) हर साल लगता है. आस्था से जुड़े इस मेले में देश के कोने-कोने से लोग स्नान-दान, जप-तप, साधना-आराधना और यज्ञ आदि करते हुए हर साल माघ मास में कल्पवास करते हैं. हिंदू मान्यता के अनुसार माघ मास के दौरान सिर्फ आम आदमी ही नहीं बल्कि 33 कोटि देवता भी प्रयाग की इस पावन भूमि पर आकर निवास करते हैं. 

प्रयाग में किए जाने वाले कल्पवास के बारे में महाभारत में बड़ी महिमा बताई गई है. महाभारत के अनुसार 100 साल बगैर कुछ अन्न, जल आदि को ग्रहण किए तपस्या करने का जो फल प्राप्त होता है, वह महज एक महीने संगम नगरी प्रयागराज में विधि-विधान से कल्पवास करने मात्र से ही प्राप्त हो जाता है. पुराणों के अनुसार इस पावन तीर्थ पर किए जाने वाले कल्पवास से सभी पापों का नाश और पुण्य की प्राप्ति होती है. आइए प्रयागराज में किए जाने वाले कल्पवास से जुड़े उन नियमों के बारे में विस्तार से जानते हैं, जिसको फालो किए बगैर यह कल्पवास सफल नहीं होता है. 

कल्पवास के 10 बड़े नियम 

सनातन परंपरा में जिस कल्पवास को कष्टों से मुक्ति और तमाम कामनाओं की पूर्ति समेत मोक्ष का सबसे बड़ा साधन बताया गया है, उसका पुण्यफल पाने के लिए 10 बड़े नियमों का विशेष रूप से पालन करता होता है. 

1. कल्पवास करने वाले साधक को पूरे एक माह तक दिन में तीन बार यानि प्रात:काल सूर्योदय से पहले, दोपहर में और शाम के समय संगम या फिर गंगा स्नान करना होता है. 
2. प्रयागराज में कल्पवास करने वाले व्यक्ति को प्रतिदिन त्रिकाल संध्या करनी होती है. 

Magh Mela 2026: माघ मेला को क्यों कहते हैं मिनी कुंभ? जानें इसमें क्यों और कैसे किया जाता है कल्पवास?

3. कल्पवास करने वाले व्यक्ति को प्रयाग की पावन भूमि पर तुलसी और जौ के बीज बोकर उसे प्रतिदिन जल देना चाहिए. 
4. कल्पवास करने वाले व्यक्ति को प्रतिदिन स्वयं पकाकर भोजन खाना होता है. कल्पवास के दौरान दिन में सिर्फ एक बार भोजन का विधान है. 
5. कल्पवास करने वाले व्यक्ति को खाली समय में धार्मिक ग्रंथों का अध्ययन या फिर सत्संग आदि में शामिल होकर धर्म की चर्चा का श्रवण करना चाहिए. 

6. कल्पवास करने वाले व्यक्ति को अपनी सभी इंद्रियों पर संयम रखते हुए पूरी तरह से ब्रह्मचर्य का पालन करना चाहिए. 
7. कल्पवास करने वाले व्यक्ति को अपने पितरों का आशीर्वाद पाने के लिए उनका पिंडदान करना चाहिए. 
8. कल्पवास करने वाले व्यक्ति को भूलकर भी दूसरों की आलोचना, निंदा, हिंसा, क्रोध और असत्य भाषण नहीं करना चाहिए. 
9. कल्पवास के दौरान साधक को अपने सामर्थ्य के अनुसार साधु-संतों और जरूरतमंद लोगों को अन्न, वस्त्र और धन आदि का दान करना चाहिए. 
10. कल्पवास करने वाले व्यक्ति को जमीन पर सोना चाहिए और भूलकर भी मेला क्षेत्र को छोड़कर नहीं जाना चाहिए. 

Advertisement

(Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. एनडीटीवी इसकी पुष्टि नहीं करता है.)

Featured Video Of The Day
Sucherita Kukreti | Turkman Gate Masjid Bulldozer Action: Delhi में 'हिंसा' योग, सोचा-समझा प्रयोग?
Topics mentioned in this article