Kamada Ekadashi 2026: हिन्दू धर्म में हर एकादशी तिथि बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है. चैत्र महीने के शुक्ल पक्ष की एकादशी को कामदा एकादशी कहा जाता है. इस दिन भगवान विष्णु की पूजा करने का विधान है. हिंदू पंचांग के अनुसार, चैत्र शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को मनाई जाती है, जिसे नए हिंदू वर्ष की पहली एकादशी भी कहा जाता है. यह दिन भगवान विष्णु की आराधना के लिए अत्यंत पवित्र माना जाता है. इस दिन व्रत भी रखा जाता है. कामदा एकादशी व्रत कथा (Kamada Ekadashi Vrat Katha) का महत्व हिंदू धर्म में बहुत अधिक है. मान्यता है कि यह व्रत सभी पापों को धोकर भक्तों की मनोकामनाएं पूरी करता है. चलिए आपको बताते हैं कामदा एकादशी व्रत संपूर्ण कथा और पूजा का शुभ मुहूर्त...
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कामदा एकादशी व्रत कथा (Kamada Ekadashi Vrat Katha)
पौराणिक कथा के अनुसार, प्राचीन काल में भोगीपुर नामक नगर में पुंडरीक नामक राजा राज करता था. उसी नगर में ललित और ललिता नामक एक गंधर्व पति-पत्नी रहते थे. दोनों एक-दूसरे से बहुत प्यार करते थे. एक बार, राजा पुंडरीक की सभा में गंधर्व गा रहे थे, तभी ललित के मन में अपनी पत्नी की याद आ गई और उसका ध्यान भटक गया. राजा पुंडरीक को इस पर बहुत गुस्सा आया और उसने ललित को राक्षस बनने का श्राप दे दिया. अपनी पत्नी ललिता के बहुत विनती करने पर भी राजा ने श्राप वापस नहीं लिया. राक्षस बने ललित को देखकर ललिता बहुत दुखी हुई, लेकिन उसने हार नहीं मानी.
वह श्रृंगी ऋषि के आश्रम में गई और अपनी समस्या बताई. ऋषि ने उसे चैत्र शुक्ल पक्ष की कामदा एकादशी का व्रत करने की सलाह दी. ललिता ने पूरे नियम और श्रद्धा के साथ यह व्रत किया. व्रत के अंत में, भगवान विष्णु की कृपा से ललित राक्षस योनि से मुक्त हो गया और अपने असली गंधर्व रूप में आ गया. कामदा एकादशी के प्रभाव से, ललिता को उसका पति वापस मिल गया और वे सुखपूर्वक रहने लगे.
- यह व्रत राक्षस, भूत, पिशाच या किसी भी तरह के श्राप से मुक्ति दिलाता है
- यह ब्रह्महत्या जैसे पापों का नाश करता है
- इस दिन भगवान विष्णु की पूजा करने और व्रत कथा सुनने से सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं
- इस दिन "हरे कृष्ण हरे कृष्ण, कृष्ण कृष्ण हरे हरे, हरे राम हरे राम, राम राम हरे हरे" इस महामंत्र का जाप करने का भी विधान है
पंचांग के अनुसार, कामदा एकादशी व्रत 29 मार्च को रहेगा. चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी 28 मार्च सुबह 8 बजकर 45 मिनट से शुरू होगी और 29 मार्च सुबह 7 बजकर 46 मिनट पर समाप्त होगी. पूजा के लिए ब्रह्म मुहूर्त सुबह 5 बजकर 1 मिनट से 5 बजकर 48 मिनट तक शुभ रहेगा. वहीं अभिजित मुहूर्त दोपहर 12 बजकर 19 मिनट से 1 बजकर 8 मिनट तक रहेगा.
(Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. एनडीटीवी इसकी पुष्टि नहीं करता है.)














