Hanuman Ji Ke Prasidh Mandir: हिंदू धर्म में अतुलित बल के धाम माने जाने वाले हनुमान जी एक ऐसे देवता हैं जिनकी साधना सभी दुखों को दूर करके सुख-सौभाग्य दिलाने वाली मानी गई है. यही कारण है कि देश के कोने-में आपको हनुमान जी के मंदिर मिल जाएंगे. पवनपुत्र हनुमान से मनचाहा आशीर्वाद पाने के लिए कोई साधक उन्हें अपने घर में मूर्ति या चित्र के माध्यम से पूजता है तो कोई उनके पावन धाम पर जाकर विधि-विधान से साधना-आराधना करके मनाने की कोशिश करता है. देश में हनुमान जी कहीं पर उलटे तो कहीं पर लेटे हुए पूजे जाते हैं. आइए हनुमान जी के सिद्ध और चमत्कारी धाम के बारे में विस्तार से जानते हैं.
1. सांवेर में क्यों उलटे पूजे जाते हैं हनुमान?
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इंदौर के पास सांवेर में हनुमान जी एक प्रसिद्ध मंदिर है जहां पर उनकी उलटी प्रतिमा का पूजन होता है. बजरंगी के इस पावन धाम को रामायणकाल का माना जाता है. मान्यता है कि राम-रावण के युद्ध के दौरान अहिरावण अपना भेष बदलकर भगवान राम की सेना में शामिल हो गया था और रात्रि में भगवान राम और लक्ष्मण को मूर्छित करके अपने साथ पाताल लोक ले गया. जिसके बाद हनुमान जी ने पाताल लोक जाकर अहिरावण का वध किया और प्रभु श्री राम और लक्ष्मण को अपने संग लेकर आए. मान्यता है कि हनुमान जी की पाताल लोक की यात्रा सांवेर स्थित इसी (Ulte Hanuman Mandir) हनुमान मंदिर से प्रारंभ हुई थी. यही कारण यहां पर हनुमान जी की पाताल की ओर गमन करती हुई उलटी प्रतिमा की पूजा करते हैं.
2. यहां नारी के रूप में पूजे जाते हैं हनुमान
छत्तीसगढ़ के बिलासपुर के पास रतनपुर में विश्व का एकमात्र ऐसा हनुमत धाम है जहां पर हनुमान जी को स्त्री के वेश रूप में पूजा जाता है. हनुमान जी के इस सिद्ध धाम को गिरिजाबंध हनुमान मंदिर के नाम से जाना जाता है. यहां पर हनुमान जी काफी प्राचीन दक्षिणमुखी प्रतिमा है. मान्यता है कि हनुमान जी के इस मंदिर में सच्चे मन से पूजा करने वाले की हर मनोकामना पूरी होती है.
3. लेटे हुए हनुमान, जिन्हें मां गंगा कराती हैं स्नान
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प्रयागराज में गंगा, यमुना और सरस्वती के पावन संगम पर लेटे हुए हनुमान जी का भव्य मंदिर है. जिनके दर्शन और पूजन के बगैर त्रिवेणी संगम का स्नान और प्रयागराज की यात्रा अधूरी मानी जाती है. इस मंदिर में हनुमान की लेटी हुई मुद्रा में भव्य प्रतिमा है, जिसके दर्शन करने के लिए जमीन में एक तल नीचे जाना पड़ता है. हनुमान जी का यह काफी सिद्ध मंदिर माना जाता है. जहां प्रतिदिन हजारों की संख्या में लोग बजरंगी को निशान चढ़ाने और पूजा करने के लिए आते हैं.
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4. हनुमान जी पर यहां हर समय गिरती है जल धारा
उत्तर प्रदेश के चित्रकूट में हनुमान जी का यह प्रसिद्ध मंदिर है. यहां हनुमान जी की मूर्ति के ठीक ऊपर दो कुंड हैं, जिनसे हमेशा यहां पर शीतल जलधारा बहती रहती है. यही कारण है कि हनुमान जी के इस पावन धाम को हनुमान धारा के नाम से जाना जाता है. मान्यता यह भी है कि हनुमान जी ने अपनी लंका को भस्म करने के बाद अपनी पूंछ की जलन को इसी स्थान पर शांत किया था. हनुमान जी के इस मंदिर में दर्शन और पूजन करने वाले हर भक्त की कामनाएं शीघ्र ही पूरी होती हैं.
5. हनुमानगढ़ी के दर्शन बगैर अधूरी है अयोध्या यात्रा
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रामलला की नगरी अयोध्या में श्री राम मंदिर के पास ही हनुमान जी का प्राचीन मंदिर है, जिसे लोग हनुमानगढ़ी के नाम से जानते हैं. इस मंदिर में विराजमान बाल हनुमान को अयोध्या का कोतवाल माना जाता है. जिनके दर्शन लोग रामलला से पहले करते हैं. एक उंचे टीले पर स्थित हनुमत धाम पर पहुंचने के लिए भक्तों को सीढ़ियां चढ़कर जाना पड़ता है. हनुमानगढ़ी के दर्शन के बगैर अयोध्या की यात्रा अधूरी मानी जाती है.
(Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. एनडीटीवी इसकी पुष्टि नहीं करता है.)














