Bhanu Saptami 2026: 7 या 8 जून, कब है भानु सप्तमी? जानें इस दिन कब और कैसे करें सूर्यदेव की पूजा

Bhanu Saptami 2026: पंचांग के अनुसार जब रविवार के दिन पड़ने वाली सप्तमी तिथि को भानु सप्तमी के नाम से जाना जाता है. भानु सप्तमी का महत्व तब और भी ज्यादा बढ़ जाता है जब यह अधिक मास में पड़ती है. अधिक मास की भानु सप्तमी का पर्व कब मनाया जाएगा? इस दिन कब और कैसे करें सूर्यदेव की पूजा, जानने के लिए पढ़ें ये लेख.

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Bhanu Saptami 2026: अधिकमास की भानु सप्तमी कब है?
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Bhanu Saptami 2026 Kab Hai: सनातन परंपरा में सूर्य एक ऐसे देवता हैं, जिनके दर्शन हमें प्रति प्रतिदिन प्रत्यक्ष रूप से होते हैं. हिंदू धर्म में सूर्य को सौभाग्य और आरोग्य का देवता माना जाता है, जिनकी पूजा के लिए रविवार का दिन बेहद शुभ माना गया है. इसी रविवार के दिन जब सप्तमी तिथि पड़ती है तो वह भानु सप्तमी कहलाती है. भानु सप्तमी का दिन तब और भी अधिक पुण्यदायी और फलदायी हो जाता है, जब यह अधिक मास या फिर कहें पुरुषोत्तम मास में पड़ता है. आइए जानते हैं कि अधिक भानु सप्तमी का पावन पर्व कब मनाया जाएगा? इस दिन किस विधि से पूजा करने पर सूर्य नारायण की कृपा बरसती है. 

अधिक भानु सप्तमी कब है?

पंचांग के अनुसार अधिक ज्येष्ठ मास के कृष्णपक्ष की सप्तमी तिथि 07 जून 2026 को पूर्वाह्न 02:40 बजे प्रारंभ होकर अगले दिन 8 जून 2026 को पूर्वाह्न 00:21 बजे तक रहेगी. ऐसे में अधिक भानु सप्तमी का पावन पर्व उदया तिथि के आधार पर 7 जून 2026, रविवार के दिन ही मनाया जाएगा. देश की राजधानी दिल्ली के समयानुसार इस दिन सूर्योदय प्रात:काल 05:23 बजे होगा. भानु सप्तमी के दिन प्रात:काल 05:23 से 07:55 बजे तक द्विपुष्कर योग और रवि योग रहेगा. मान्यता है कि इस शुभ योग में सूर्य पूजा का पुण्यफल और भी अधिक बढ़ जाता है. 

अधिक भानु सप्तमी की कब और कैसे करें पूजा?

हिंदू मान्यता के अनुसार अधिक भानु सप्तमी वाले दिन व्यक्ति को प्रात:काल सूर्योदय से पहले ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान-ध्यान कर लेना चाहिए. तन और मन से पवित्र होने के बाद यदि संभव हो तो इस दिन पीले वस्त्र धारण करें और उसके बाद सूर्योदय के समय तांबे के लोटे में गंगाजल अथवा शुद्ध जल में रोली, चंदन, अक्षत और लाल पुष्प डालकर पूर्व दिशा की ओर मुख करके उगते हुए सूर्य देवता को 'ॐ घृणि सूर्याय नमः' मंत्र का जप करते हुए अर्घ्य देना चाहिए.

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इसके बाद सूर्य देवता के लिए दीप जलाकर आदित्य हृदय स्तोत्र, सूर्याष्टकं अथवा सूर्य चालीसा का पाठ करें. भानु सप्तमी का पुण्यफल पाने के लिए साधक को अपने सामर्थ्य के अनुसार गेहूं, गुड़, तांबे के बर्तन, लाल रंग के वस्त्र आ​दि का दान करना चाहिए. 

अधिक भानु सप्तमी का धार्मिक महत्व 

हिंदू मान्यता के अनुसार भगवान सूर्य को नारायण यानि भगवान विष्णु का ही स्वरूप माना गया है. यही कारण है कि उनके भक्त उन्हें सूर्य नारायण कहते हुए पूजते हैं. सूर्य भगवान के लिए की जाने वाली भानु सप्तमी का महत्व इसलिए ज्यादा है क्योंकि यह अधिक मास भी भगवान विष्णु के लिए ही समर्पित है. ऐसे में सुख-सौभाग्य और आरोग्य की कामना करने वाले व्यक्ति को इस पावन अवसर पर अवश्य ही विधि-विधान से सूर्य पूजा करनी चाहिए. हिंदू मान्यता है कि भानु सप्तमी के दिन की गई सूर्य पूजा का पुण्यफल सूर्य ग्रहण के दिन किए जाने वाले दान के समान होता है. 

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(Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. एनडीटीवी इसकी पुष्टि नहीं करता है.)

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