- जंग में नागरिकों, अस्पतालों को जानबूझकर निशाना बनाना अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत वॉर क्राइम माना जाता.
- Geneva Conventions ने सेकेंड वर्ल्ड वॉर के बाद मानवीय नियमों और नागरिक सुरक्षा के प्रावधान तय किए थे.
- ईरान-इजरायल संघर्ष में दोनों पक्षों ने नागरिक इलाकों पर हमले किए हैं, जिससे वॉर क्राइम के सवाल उठे.
मिडिल ईस्ट में ईरान, इजरायल और US के बीच बढ़ते सैन्य टकराव के बीच एक बड़ा सवाल सामने आ रहा है कि क्या जंग में भी कुछ नियम होते हैं? जब मिसाइलें शहरों में गिरती हैं और आम लोग मारे जाते हैं तो अंतरराष्ट्रीय कानून इसे कैसे देखता है. इसी संदर्भ में 'वॉर क्राइम' की चर्चा तेज हो जाती है.
सबसे पहले समझिए- वॉर क्राइम क्या होता है
बहुत आसान भाषा में कहें तो युद्ध के दौरान किए गए ऐसे गंभीर अपराध, जो अंतरराष्ट्रीय कानून के नियमों को तोड़ते हैं, उन्हें War Crimes कहा जाता है. युद्ध में सैनिक एक-दूसरे से लड़ सकते हैं, लेकिन आम नागरिकों, अस्पतालों, स्कूलों या राहत शिविरों को जानबूझकर निशाना बनाना कानून के खिलाफ माना जाता है.
युद्ध के नियम कहां से आए?
दुनिया ने दो विश्व युद्धों के बाद यह तय किया कि युद्ध में भी कुछ मानवीय नियम होने चाहिए. इन्हीं नियमों को तय करने के लिए Geneva Conventions बनाए गए. इन समझौतों में साफ लिखा है कि नागरिकों को निशाना नहीं बनाया जाएगा. अस्पतालों और राहत केंद्रों पर हमला नहीं होगा. युद्धबंदियों के साथ अत्याचार नहीं किया जाएगा. अगर कोई देश या सेना इन नियमों को तोड़ती है तो उसे वॉर क्राइम माना जा सकता है.
ईरान-इजरायल संघर्ष में क्यों उठ रहा यह सवाल
मौजूदा संघर्ष में Iran और Israel दोनों एक-दूसरे पर शहरों और सैन्य ठिकानों पर हमले कर रहे हैं. इसी बीच United States भी इस टकराव में पूरी तरह सक्रिय है. रिपोर्टों के मुताबिक अमेरिकी हमलों में ईरानी नौसेना के युद्धपोत IRIS Dena को भी निशाना बनाया गया. लेकिन जंग का सबसे बड़ा असर शहरों में रहने वाले आम लोगों पर पड़ रहा है- जहां मिसाइल हमलों में नागरिक हताहत हो रहे हैं.
यह भी पढ़ें- वही वंशवाद, जिसे खत्म करने उठी थी 1979 की क्रांति… क्या उसी के फेर में फंस गया ईरान?
यही वजह है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर यह सवाल उठने लगा है कि क्या इन हमलों में नागरिकों की सुरक्षा के नियमों का पालन हो रहा है.
वॉर क्राइम की सजा कौन देता है?
दुनिया में ऐसे मामलों की सुनवाई के लिए International Criminal Court जैसी अंतरराष्ट्रीय अदालतें बनाई गई हैं. यह अदालत उन मामलों की जांच कर सकती है जिनमें नरसंहार, मानवता के खिलाफ अपराध या वॉर क्राइम के आरोप हों. हालांकि कई बार बड़े देशों और राजनीतिक ताकतों के कारण इन मामलों में कार्रवाई आसान नहीं होती.
सरल शब्दों में कहें तो युद्ध में लड़ाई सैनिकों के बीच हो सकती है, लेकिन अगर जानबूझकर आम लोगों को निशाना बनाया जाए तो अंतरराष्ट्रीय कानून इसे अपराध मानता है. इसलिए हर बड़े संघर्ष में चाहे वह ईरान-इजरायल का हो या दुनिया के किसी और हिस्से का 'वॉर क्राइम' का सवाल हमेशा उठता रहता है.
War Crime के लिए क्या कभी किसी देश के राष्ट्राध्यक्ष को सजा मिली है?
हां, कई देशों के राष्ट्राध्यक्षों को War Crime के लिए सजा मिल चुकी है.
1. चार्ल्स टेलर (लाइबेरिया के पूर्व राष्ट्रपति)
लाइबेरिया के पूर्व राष्ट्रपति चार्ल्स टेलर को सिएरा लियोन की गृहयुद्ध में किए गए युद्ध अपराधों और मानवता के विरुद्ध अपराधों के लिए 50 साल की सजा हुई. वे आधुनिक इतिहास में अंतरराष्ट्रीय अदालत द्वारा दोषी ठहराए जाने वाले पहले पूर्व राष्ट्राध्यक्ष बने.
2. सद्दाम हुसैन (इराक)- दोषी और फांसी
सद्दाम हुसैन को इराक की विशेष अदालत ने वॉर क्राइम और मानवाधिकार उल्लंघनों के लिए दोषी पाया और फांसी की सजा दी.
3. ईफ्राइन रियोस मॉन्ट (ग्वाटेमाला)
ग्वाटेमाला के पूर्व तानाशाह रियोस मॉन्ट को आदिवासी समूहों के नरसंहार और युद्ध अपराधों के लिए दोषी ठहराया गया था, हालांकि बाद में निर्णय तकनीकी आधारों पर पलट दिया गया.
यह भी पढ़ें- खामेनेई की मौत के बाद ईरान ने एक्टिव कर दिए ‘स्लीपर सेल'? US खुफिया एजेंसियों ने पकड़ा एन्क्रिप्टेड रेडियो मैसेज
4. नूर्मबर्ग ट्रायल: नाजी नेतृत्व
द्वितीय विश्व युद्ध के बाद नाजी शासन के शीर्ष नेताओं को International Military Tribunal में युद्ध अपराधों के लिए सजा दी गई. इनमें कई ऐसे नेता भी थे जो राज्यप्रमुख स्तर की शक्ति रखते थे. 12 दोषियों को मृत्युदंड दिया गया.
कुछ राष्ट्राध्यक्षों पर गिरफ्तारी वारंट जारी हुए हैं, लेकिन सजा नहीं हुई, जैसे ओमर अल-बशीर (सूडान). ICC ने इनके खिलाफ वारंट तो जारी हुआ लेकिन अभी तक कोई सजा नहीं हुई. हां, इतिहास में अनेक राष्ट्राध्यक्षों को War Crimes के लिए दोषी ठहराया गया है.
क्या ईरान-इजरायल और अमेरिका की जंग में किसी को मिलेगी सजा?
क्या ईरान-इजरायल-अमेरिका की मौजूदा जंग में किसी को सजा मिलेगी? यानी क्या किसी नेता या देश पर युद्ध अपराध का मुकदमा चल सकता है? इस सवाल का जवाब सैद्धांतिक रूप से 'हां' और व्यावहारिक तौर पर 'बहुत मुश्किल' है. मौजूदा अंतरराष्ट्रीय हालात और घटनाओं को देखकर यह समझा जा सकता है:
इजरायल ने ईरान में हमला कर स्कूल को बनाया निशाना
कानूनी तौर पर युद्ध अपराध की कार्रवाई संभव
अंतरराष्ट्रीय कानून में युद्ध अपराध (War Crimes) के लिए किसी भी देश के नेता पर मुकदमा चलाया जा सकता है. UN चार्टर और अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून (IHL) के तहत नागरिकों की हत्या, स्कूल‑अस्पताल‑इन्फ्रास्ट्रक्चर पर हमले युद्ध अपराध माने जाते हैं.
रिपोर्टों में दावा है कि ईरान और इजरायल दोनों की तरफ से ऐसे हमले हुए, जिनमें बड़ी संख्या में नागरिक मारे गए. UN विशेषज्ञों ने इन्हें स्पष्ट रूप से अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन कहा है. ईरान ने भी UN सुरक्षा परिषद में अमेरिका और इजरायल पर युद्ध अपराध करने का आरोप लगाया है, जैसे लड़कियों के स्कूल पर हमला जिसमें 85 से ज्यादा बच्चियों की मौत हुई. इन आरोपों की प्रकृति ऐसी है कि सिद्ध होने पर अंतरराष्ट्रीय अदालत (ICC) या विशेष ट्रिब्यूनल कार्रवाई कर सकते हैं.
लेकिन वास्तविकता- बड़ी शक्तियों पर कार्रवाई लगभग असंभव
इतिहास बताता है कि युद्ध अपराध की सजा तब ही संभव होती है जब संबंधित नेता सत्ता से बाहर हो, उसका अपना देश सहयोग करे और बड़ी शक्तियां उसके खिलाफ खड़ी हों. अमेरिका, इजरायल और ईरान- तीनों ही ऐसे देश हैं जो या तो ICC के सदस्य नहीं, या अंतरराष्ट्रीय जांचों में सीमित सहयोग देते हैं.
यह भी पढ़ें- ईरानी युद्धपोत IRIS Dena पर हमला कर क्या अमेरिका ने तोड़ा अंतरराष्ट्रीय क़ानून?
UN विशेषज्ञों ने इस युद्ध में अमेरिका और इजरायल की कार्रवाई को अवैध (unlawful) बताया है, लेकिन यह किसी मुकदमे की गारंटी नहीं है. इसी तरह ईरान की मिसाइल‑ड्रोन हमलों में नागरिकों की मौत अंतरराष्ट्रीय जांच का आधार बन सकती है, परंतु ईरान भी अंतरराष्ट्रीय जांच को स्वीकार करने की संभावना कम रखता है.
इस जंग में किसे सजा मिल सकती है?
यथार्थवादी स्थिति यह कहती है कि कमजोर या पराजित पक्ष के नेताओं पर कार्रवाई की संभावना ज्यादा है. जैसे अगर युद्ध के बाद ईरान की सरकार बदलती है या वह अंतरराष्ट्रीय दबाव में आ जाता है, तो उसके नेताओं पर केस हो सकते हैं.
अमेरिका या इजरायल के नेताओं पर सजा की संभावना सबसे कम है. क्योंकि अमेरिका ICC को मान्यता नहीं देता और उसके सैनिकों व नेताओं पर मुकदमे रोकने के लिए उसके पास कानूनी‑राजनयिक सुरक्षा है. इजरायल की स्थिति भी लगभग ऐसी ही है.
अभी तक क्या संकेत हैं?
अब तक न UN सुरक्षा परिषद में और न ICC में किसी औपचारिक युद्ध अपराध जांच की घोषणा हुई है. हालांकि UN और मानवाधिकार विशेषज्ञ स्पष्ट रूप से जिम्मेदारों की जवाबदेही (accountability) की मांग कर रहे हैं.
आसान भाषा में कहें तो कानून के अनुसार सजा तो संभव है, लेकिन अमेरिका, इजरायल और ईरान- तीनों के मामले में व्यावहारिक रूप से किसी शीर्ष नेता को अंतरराष्ट्रीय अदालत से सजा मिलना बेहद मुश्किल है. यह तभी संभव होगा जब युद्ध का परिणाम सत्ता बदल दे, या वैश्विक राजनीति ऐसा दबाव बनाए कि मुकदमा चलाना अनिवार्य हो जाए. अभी के हालात देखें तो निकट भविष्य में किसी नेता के सजा पाने की संभावना बहुत कम है.













