Mulayam Singh Yadav's Padma Vibhushan : उत्तर प्रदेश में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनावों से पहले समाजवादी पार्टी एक बार फिर ‘नेताजी' यानी मुलायम सिंह यादव की विरासत को केंद्र में लाने में जुटी दिखाई दे रही है. अखिलेश यादव लगातार अपने भाषणों और सोशल मीडिया कैंपेन में मुलायम सिंह यादव के पुराने किस्सों, विचारों और उनसे जुड़े चेहरों का जिक्र कर रहे हैं. इसी बीच एक पुरानी तस्वीर और उससे जुड़ी कहानी फिर चर्चा में आ गई है. यह वही तस्वीर है जिसमें अखिलेश यादव अपने पिता को मरणोपरांत मिले पद्मविभूषण सम्मान को एक बुजुर्ग शख्स के हाथों में सौंपते नजर आए थे. उस समय लोगों के मन में सवाल उठा था कि आखिर यह शख्स कौन है, जिसे अखिलेश यादव ने इतना सम्मान दिया? आइए जानते हैं कि कौन हैं ये बुजुर्ग शख्स और उत्तर प्रदेश की राजनीति और समाजवादी पार्टी में उनकी कितनी अहमियत है.
अखिलेश ने क्यों सौंपा था इन्हें पद्मविभूषण?मुलायम सिंह यादव को मिला पद्मविभूषण सम्मान अखिलेश यादव ने जिस शख्स को सौंपा, वह मशहूर कवि और साहित्यकार उदय प्रताप सिंह हैं. इन्हें मुलायम सिंह यादव का ‘गुरु' माना जाता था. उदय प्रताप सिंह की पहचान सिर्फ एक कवि या साहित्यकार तक सीमित नहीं रही. उन्हें समाजवादी विचारधारा का मजबूत चेहरा माना जाता है. मैनपुरी और आसपास के इलाकों में लोग उन्हें “गुरुजी” कहकर बुलाते हैं. मुलायम सिंह यादव उनका बेहद सम्मान करते थे और राजनीति के शुरुआती दौर में उनसे काफी प्रभावित रहे.
साल 2023 में जब मुलायम सिंह यादव को मरणोपरांत पद्मविभूषण दिया गया तो अखिलेश ने एक बेटे के रूप में राष्ट्रपति के हाथों ये पुरस्कार ग्रहण किया था. लेकिन बाद में मैनपुरी पहुंचकर उन्होंने पद्मविभूषण सम्मान उदय प्रताप सिंह के हाथों में रखा. इसे अखिलेश यादव की ओर से अपने पिता के गुरु को सम्मान देने के तौर पर देखा गया.
सपा के लिए गीत रचने वाले कवि भी हैं येमुलायम और उदय प्रताप सिंह का रिश्ता बेहद खास था. मुलायम सिंह यादव छात्र जीवन में उदय प्रताप सिंह के स्टूडेंट रह चुके हैं. जाहिर है कि मुलायम उनका बेहद सम्मान करते थे. एक बार जब समाजवादी पार्टी के लिए “झंडा गीत” लिखवाने की बात आई, तब मुलायम सिंह यादव ने सबसे पहले उदय प्रताप सिंह को याद किया था. इतना ही नहीं, “मन से मुलायम” और “साइकिल भी है खूब सवारी” जैसे चर्चित गीत भी उदय प्रताप सिंह ने ही लिखे थे. उदय प्रताप सिंह की कविताएं भी काफी चर्चित रही हैं. उनकी एक लाइन, “न तेरा है, न मेरा है, ये हिंदुस्तान सबका है”, अक्सर राजनीतिक मंचों पर सुनाई देती रही है. अखिलेश यादव ने भी कई मौकों पर इस कविता का जिक्र किया है.
आज भी सपा में इनका बहुत सम्मान हैमुलायम सिंह यादव के निधन के बाद भी उदय प्रताप सिंह का समाजवादी परिवार में सम्मान कम नहीं हुआ. अखिलेश यादव भी कई पब्लिक इवेंट्स में उन्हें सम्मान देते नजर आए हैं. राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा भी रहती है कि अखिलेश यादव समय-समय पर उनसे सलाह लेते हैं और उनकी बातों को गंभीरता से सुनते हैं. यही वजह है कि समाजवादी पार्टी में उदय प्रताप सिंह को सिर्फ एक कवि या साहित्यकार नहीं, बल्कि नेताजी की विचारधारा से जुड़े ऐसे बुजुर्ग चेहरे के तौर पर देखा जाता है, जिनका असर आज भी पार्टी और यादव परिवार में मौजूद है.
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