देश की सबसे प्रतिष्ठित सिविल सेवाओं,IAS, IPS और IFS में जाने का सपना लाखों युवा देखते हैं. लेकिन इस सपने के साथ एक बड़ा सवाल हमेशा जुड़ा रहता है कि क्या UPSC की परीक्षा हिंदी भाषा में दी जा सकती है? खासकर वो छात्र जो हिंदी माध्यम से पढ़ाई करते हैं या ग्रामीण बैकग्राउंड से आते हैं. अक्सर इस उलझन में रहते हैं कि भाषा कहीं उनकी तैयारी और सिलेक्शन में बाधा न बन जाए. ऐसे में ये समझना जरूरी हो जाता है कि UPSC हिंदी माध्यम के केंडिडेट को क्या-क्या सुविधाएं और विकल्प देता है.
UPSC में हिंदी माध्यम का ऑप्शन
संघ लोक सेवा आयोग देशभर के उम्मीदवारों को समान अवसर देने के उद्देश्य से परीक्षा में भाषा के बहुत ज्यादा ऑप्शन देता है. उम्मीदवार प्रिलिमनरी परीक्षा और मुख्य परीक्षा दोनों में हिंदी को माध्यम के रूप में चुन सकते हैं. प्रश्नपत्र सामान्य रूप से हिंदी और इंग्लिश दोनों भाषाओं में उपलब्ध कराए जाते हैं. जबकि मेन परीक्षा के उत्तर केंडीडेट अपनी चुनी हुई भाषा में लिख सकते हैं. इसका मतलब ये है कि यदि कोई उम्मीदवार हिंदी माध्यम में कंफर्टेबल है, तो वो पूरी परीक्षा प्रक्रिया में हिंदी को अपनी मेन लेंग्वेज चुन सकता है. और, ये पूरी तरह मान्य माना जाता है.
हिंदी में इंटरव्यू भी संभव
UPSC न केवल लिखित परीक्षा में, बल्कि इंटरव्यू के दौरान भी भाषा का ऑप्शन उपलब्ध कराता है. उम्मीदवार इंटरव्यू में भी हिंदी भाषा का चयन कर सकते हैं. यदि अभ्यर्थी को किसी प्रकार की भाषाई मदद की आवश्यकता हो, तो आयोग इंटरप्रेटर की सुविधा भी उपलब्ध कराता है. जिससे संवाद में किसी तरह की रुकावट न आए. इस व्यवस्था का मकसद ये सुनिश्चित करना है कि भाषा किसी भी केंडीडेट की योग्यता, अभिव्यक्ति या कॉन्फिडेंस के बीच रुकावट न बने और सभी उम्मीदवारों को अपनी समझ और नजरिया साफ तरीके से रखने का अवसर मिल सके.
तैयारी कैसे करें
आज हिंदी माध्यम के अभ्यर्थियों के लिए पुस्तकों, करंट अफेयर्स सामग्रियों और ऑनलाइन अध्ययन सामग्री की कोई कमी नहीं है. पुराने क्वश्चन पेपर और मॉडल आंसर का अध्ययन करके लिखने की कला को निखारा जा सकता है. विशेषज्ञों का मानना है कि UPSC में सफलता का निर्धारण भाषा से नहीं, बल्कि समझ, एनालिसिस और प्रेजेंटेशन की क्षमता से होता है.
NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं