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UPPCS Final Result 2024: यूपीएससी परीक्षा में फेल्योर को भुलाया, यूपीपीसीएस में रचा इतिहास, जानें कौन हैं दीप्ति वर्मा?

6th Rank In UPPCS 2024: हरदोई की दीप्ति वर्मा को बार-बार मिली असफलता की बीच मिले परिवार के अटूट समर्थन ने अफसलता को अवसाद में नहीं जाने दिया, जिससे दीप्ति वर्मा ने ऐसा मुकाम हासिल कर लिया, जिसका सपना दीप्ति ने 12वीं परीक्षा पास करने के तुरंत बाद ही देख लिया था. तीसरे प्रयास में दीप्ति ने पीसीएस परीक्षा पास करके अपने परिवार का नाम रोशन कर दिया है. 

UPPCS Final Result 2024: यूपीएससी परीक्षा में फेल्योर को भुलाया, यूपीपीसीएस में रचा इतिहास, जानें कौन हैं दीप्ति वर्मा?
OVERCOME FROM FAILURE HARDOI GIRL DIPTI VERMA CREATES HISTORY IN UPPCS 2024

यूपीपीसीएस परीक्षा 2024 के फाइनल परिणाम में टॉप-10 में जगह बनाने वाली हरदोई जिले की दीप्ति वर्मा ने दो बार की असफलता को दरकिनार कर सफलता की इबारत लिखने में कामयाब हो गई हैं. कड़ी मेहनत के बावजूद दामन में आई असफलताओं को दरकिनार कर दीप्ति वर्मा ने कभी हौसला नहीं खोया और 12वीं के बाद सिविल ऑफिसर बनने के संजोए सपने को दीप्ति ने तीसरे प्रयास में 6वीं रैंक लाकर साकार कर दिया है. 

हरदोई की दीप्ति वर्मा को बार-बार मिली असफलता की बीच मिले परिवार के अटूट समर्थन ने अफसलता को अवसाद में नहीं जाने दिया, जिससे दीप्ति वर्मा ने ऐसा मुकाम हासिल कर लिया, जिसका सपना दीप्ति ने 12वीं परीक्षा पास करने के तुरंत बाद ही देख लिया था. तीसरे प्रयास में दीप्ति ने पीसीएस परीक्षा पास करके अपने परिवार का नाम रोशन कर दिया है. 

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यूपीपीसीएस में 6वां रैंक लाने वाली दीप्ति के पिता हैं LIC में एंजेंट

हरदोई जिले के मल्लावां विकास खंड के पुरवावा गांव के मूल निवासी देवेंद्र सिंह वर्मा की पुत्री दीप्ति वर्मा पढ़ने में शुरू से होशियार थी. इसकी तस्दीक उनके हाईस्कूल और इंटरमीडियट के रिजल्ट करते हैं. लखनऊ के विकास नगर में रहने वाली दीप्ति वर्मा के पिता देवेंद्र सिंह LIC में एंजेंट हैं और लंबे समय से लखनऊ में रह रहे हैं. दीप्ति की मां पूनम वर्मा एक गृहणी हैं, जिन्होंने दीप्ति की परवरिश में पढ़ाई में कभी रोक-टोक नहीं लगाई.

12वीं के बाद प्रशासनिक सेवा में जाने का तय कर लिया था लक्ष्य

दीप्ति बताती है कि उन्होंंने 12वीं के बाद ही प्रशासनिक सेवा में जाने का लक्ष्य तय कर लिया. उनका पहला फोकस UPSC का एक्जाम था, लेकिन असफलताओं के बाद उन्होंने खुद को संभाला और अपने लक्ष्य पर डटी रहीं. यूपीएससी की असफता को भुलाकर दीप्ति ने UPPCS पर फोकस किया और अपने तीसरे प्रयास में यूपीपीसीएस की परीक्षा क्रैक उनको सफलता मिल गई.

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लखनऊ के सेंट फिदलिस इंटर कालेज में साइंट स्टूडेंट रहीं दीप्ति वर्मा ने हाईस्कूल में 90 .4 फीसदी अंक हासिल किया था और इंटरमीडियट में 94 .5 फीसदी अंक लेकर आई थीं. लखनऊ विश्वविद्यालय से बीएससी 72 फीसदी अंक लाने वाली दीप्ति वर्मा का छोटा भाई भी उनकी तरह होशियर है. पेशे से इंजीनियर छोटा भाई TCS में काम कर चुका है. 

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UPSC के अनुभवों को आधार बनाकर PCS की तैयारी को दी नई दिशा

दीप्ति के मुताबिक UPSC के अनुभवों को आधार बनाकर उसने PCS की तैयारी को नई दिशा दी. अपने तीसरे प्रयास में यूपीपीसीएस में सफलता हासिल करने वाली दीप्ति ने अपनी सफलता का श्रेय  धैर्य, निरंतर प्रयास और अनुशासित तैयारी को दिया. तैयारी के दौरान दीप्ति ने लाइब्रेरी जॉइन की, जहां वह सुबह से लेकर शाम 7 बजे तक नियमित अध्ययन करती थीं.

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दीप्ति के लिए सबसे कठिन चरण रहा यूपीएससी की प्रीलिम्स परीक्षा

दीप्ति ने बताया कि परीक्षा की तैयारी के दौरान उनकी रणनीति में शामिल था तय समय पर रोजाना पढ़ाई, सीमित और उपयोगी अध्ययन सामग्री का अध्ययन और अध्ययन सामग्री का नियमित रिवीजन और मॉक टेस्ट के जरिए खुद का मूल्यांकन करना. दीप्ति बताती हैं कि उनके लिए सबसे कठिन चरण प्रीलिम्स परीक्षा रहा, जिसमें उन्हें कई बार असफलता मिली, लेकिन रणनीति में बदलाव करते हुए इस बाधा को पार करने में सफलता पाई.

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दीप्ति का कहना है कि उनकी हर असफलता के बाद परिवार ने उनके साथ खड़ा रहा और उनका मनोबल बढ़ाता रहा. अपनी सफलता में माता-पिता और भाई के योगदान की चर्चा करते हुए दीप्ति ने कहा कि उनकी प्रेरणा ने ही उनके अंदर सफलता की ज्योति जलाए रखा, जिससे वो तीसरे प्रयास में सफलता हासिल कर सकीं हैं. 

'सोशल मीडिया का सीमित उपयोग जरूरी, लेकिन लत से बचना चाहिए'

दीप्ति मानती हैं कि अगर परिवार का भरोसा और समर्थन न मिलता, तो उनका सफल होना कठिन था. दीप्ति का मानना है कि पढ़ाई और मनोरंजन के बीच संतुलन बनाए रखना ही सफलता की कुंजी है. दीप्ति वर्मा ने सोशल मीडिया का सीमित उपयोग जरूरी है, लेकिन लत से भी बचना चाहिए. दीप्ति की कहानी उन युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत है, जो असफलताओं से घबराकर अपने सपनों को छोड़ देते हैं.

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