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उमर खालिद ने JNU से किस विषय में की थी PhD? इस समुदाय पर लिखी थीसिस

उमर खालिद को सुप्रीम कोर्ट ने जमानत देने से इनकार कर दिया है. जेएनयू का पूर्व छात्र उमर पीएचडी है और एक विषय पर थीसिस भी लिखी है. वह 5 साल से ज्यादा समय से दिल्ली के तिहाड़ जेल में हैं. जानिए उसने किस सब्जेक्ट से पढ़ाई की है.

उमर खालिद ने JNU से किस विषय में की थी PhD? इस समुदाय पर लिखी थीसिस
Umar Khalid Education: उमर खालिद की पढ़ाई

Umar Khalid Education: सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को दिल्ली दंगों के आरोपी उमर खालिद और शरजील इमाम की जमानत याचिका खारिज कर दी. वहीं, अन्य पांच आरोपियों को 12 शर्तों के साथ जमानत दे दी गई. उमर खालिद दिल्ली के जेएनयू (Jawaharlal Nehru University) का पूर्व छात्र हैं. यहीं से उनके अपनी पीएचडी कंप्लीट की और एक समुदाय पर थीसिस भी लिखी है. जानिए उसने किस सब्जेक्ट में पीएचडी की है और थीसिस का टॉपिक क्या था.

उमर खालिद को क्यों नहीं मिली जमानत

उमर खालिद और शरजील इमाम के साथ गुलफिशा फातिमा, मीरान हैदर, शिफा उर रहमान, मोहम्मद सलीम खान और शादाब अहमद दिल्ली दंगों के आरोप में 5 साल से ज्यादा समय से दिल्ली के तिहाड़ जेल में बंद थे. उन्होंने दिल्ली हाईकोर्ट के उस फैसले को चुनौती दी थी, जिसमें 2020 के दिल्ली दंगों से जुड़े मामले में बेल से इनकार कर दिया गया था. अब सुप्रीम कोर्ट से भी उन्हें राहत नहीं मिली है. हालांकि, 5 आरोपियों को शर्तों के साथ जमानत मिल गई है.

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उमर खालिद ने किस विषय में की PhD

उमर खालिद का परिवार करीब तीन दशक पहले महाराष्ट्र के अमरावती से दिल्ली आया और जाकिरनगर में बस गया. उनके पिता सैयद कासिम रसूल इलियास ने दिल्ली में ऊर्दू मैगजिन 'अफकार-ए-मिल्ली' चलाया. उमर खालिद ने दिल्ली के जेएनयू (Jawaharlal Nehru University) से पढ़ाई की है. उन्होंने इतिहास में एमए और एमफिल किया और इसके बाद ऐतिहासिक अध्ययन केंद्र (Centre for Historical Studies) से PhD पूरी की.

उमर खालिद ने किस समुदाय पर थीसिस लिखी

उमर खालिद ने अपने पीएचडी के दौरान एक थीसिस लिखी, जिसका विषय 'झारखंड में आदिवासियों के शासन पर दावे और आकस्मिकताएं' (Contesting claims and contingencies of the rule on Adivasis of Jharkhand) थी. इस थीसिस में उन्होंने मुख्य रूप से झारखंड के आदिवासी समुदायों की जिंदगी, उनकी आंतरिक संरचनाओं और राज्य के साथ उनके संबंधों पर अध्ययन किया. उसने यह देखा कि उपनिवेशवादी काल से लेकर आज तक आदिवासियों की भूमि, सत्ता संघर्ष और सामाजिक संरचना में कैसे बदलाव आया.

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