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ईरान की इस इंजीनियरिंग यूनिवर्सिटी का है दुनियाभर में जलवा, IIT से भी मुश्किल है एडमिशन

Iran Engineering College: ईरान इंजीनियरिंग शिक्षा के क्षेत्र में दुनिया में खास पहचान रखता है. तेहरान की शरीफ यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी को मिडिल ईस्ट का MIT कहा जाता है. यहां एडमिशन बेहद कठिन है और केवल टॉप 1% छात्र ही जगह बना पाते हैं.

ईरान की इस इंजीनियरिंग यूनिवर्सिटी का है दुनियाभर में जलवा, IIT से भी मुश्किल है एडमिशन
Iran Engineering College: ईरान का सबसे प्रतिष्ठित इंजीनियरिंग कॉलेज

Iran Engineering College: युद्ध में अमेरिका के खिलाफ डटा हुआ दिख रहा ईरान एजुकेशन के क्षेत्र में भी काफी दमदार है. इंजीनियरिंग के क्षेत्र में ईरान खास पहचान रखता है. सिविल, मैकेनिकल और कंप्यूटर इंजीनियरिंग में ईरानी इंजीनियरों का लोहा दुनिया मानती है. इसकी वजह है ईरान की यूनिवर्सिटी. तेहरान की शरीफ यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी (SUT) को मिडिल ईस्ट का MIT भी कहा जाता है. यहां दाखिला लेना इतना कठिन माना जाता है कि कई लोग इसे भारत के IIT से भी ज्यादा टफ बताते हैं. चलिए जानते हैं ईरान में इंजीनियरिंग की पढ़ाई इतनी खास क्यों मानी जाती है और शरीफ यूनिवर्सिटी में एडमिशन कैसे मिलता है?

शरीफ यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी क्यों है खास

तेहरान में स्थित शरीफ यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी को ईरान का सबसे प्रतिष्ठित टेक्निकल इंस्टीट्यूट माना जाता है. इसकी स्थापना 1966 में हुई थी. यहां इंजीनियरिंग और कंप्यूटर साइंस के प्रोग्राम दुनिया के बेहतरीन प्रोग्राम्स में गिने जाते हैं. यूनिवर्सिटी के कई प्रोफेसर दुनिया के टॉप संस्थानों से पढ़े हुए हैं. यही वजह है कि यहां के ग्रेजुएट्स को अमेरिका और यूरोप की यूनिवर्सिटीज जैसे स्टैनफोर्ड, MIT और बर्कले में आसानी से रिसर्च और आगे की पढ़ाई के मौके मिलते हैं.

SIT में एडमिशन कैसे मिलता है

शरीफ यूनिवर्सिटी में एडमिशन पाना बेहद कठिन माना जाता है. यहां एडमिशन नेशनल लेवल की कठिन एंट्रेंस एग्जाम के जरिए होता है. इस एग्जाम में लाखों छात्र शामिल होते हैं लेकिन केवल टॉप 1% छात्र ही शरीफ यूनिवर्सिटी तक पहुंच पाते हैं. मुकाबला इतना ज्यादा होता है कि कई बार टॉप 100 रैंक पाने वाले छात्र ही अपनी पसंद की इंजीनियरिंग ब्रांच चुन पाते हैं.

प्रतिबंधों ने भी बढ़ाई तकनीकी क्षमता

पिछले कई दशकों से ईरान पर अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंध लगे हुए हैं. इन पाबंदियों के कारण देश को कई तकनीकों के लिए बाहरी मदद नहीं मिल पाई. लेकिन इसी चुनौती ने ईरानी साइंटिस्ट और इंजीनियरों को स्वदेशी डेवलेप करने के लिए इंस्पायर किया. आज ईरान ड्रोन टेक्नोलॉजी, नैनोटेक्नोलॉजी, बायोटेक और मेडिकल रिसर्च जैसे क्षेत्रों में तेजी से आगे बढ़ रहा है.

रिसर्च और इनोवेशन में भी आगे

वैज्ञानिक शोध के मामले में भी ईरान ने बड़ी प्रगति की है. 2023 तक साइंटिफिक पब्लिकेशन की संख्या के मामले में ईरान दुनिया में 15वें स्थान पर पहुंच गया. नैनोटेक्नोलॉजी में तो ये दुनिया के टॉप देशों में गिना जाता है. यही वजह है कि तमाम चुनौतियों के बावजूद ईरान की इंजीनियरिंग एजुकेशन दुनिया की बेहतरीन टेक्निकल एजुकेशन सिस्टम में काउंट होती है.

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