Medical Counseling Committee MCC Updates : देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा नीट (NEET) पास करने के बाद भी कई टैलेंटेड स्टूडेंट्स सिर्फ इसलिए डॉक्टर नहीं बन पा रहे हैं क्योंकि उनके पास करोड़ों रुपये की फीस चुकाने के पैसे नहीं हैं. मेडिकल काउंसलिंग कमेटी (MCC) के सूत्रों के अनुसार, देश भर में खाली बची कुल 837 MBBS सीटों (जिसमें ऑल इंडिया कोटा की सीटें भी शामिल हैं) में से 824 सीटें अकेले तमिलनाडु और पुडुचेरी के डीम्ड विश्वविद्यालयों में खाली हैं. शिक्षाविदों और इंडस्ट्री एक्सपर्ट्स का कहना है कि भारी ट्यूशन फीस के कारण यह स्थिति पैदा हुई है.
शिक्षाविदों ने भारी-भरकम की आलोचना
शिक्षाविदों ने डीम्ड विश्वविद्यालयों के लिए फीस की कोई सीमा न होने की आलोचना की है. उन्होंने बताया कि NEET में अच्छे अंक लाने वाले छात्र भी इन सीटों को लेने से मजबूरन पीछे हट जाते हैं, क्योंकि वे इतनी भारी फीस नहीं भर सकते. इससे मेरिट के आधार पर होने वाली राष्ट्रीय प्रवेश परीक्षा का मुख्य उद्देश्य ही खत्म हो जाता है.
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वरिष्ठ शिक्षाविद और 'स्टेट प्लेटफॉर्म फॉर कॉमन स्कूल सिस्टम तमिलनाडु' (SPCSS-TN) के महासचिव पी.बी. प्रिंस गजेंद्र बाबू ने PTI को बताया कि NEET में अच्छे नंबर लाने वाले वे छात्र, जिनकी आर्थिक स्थिति ऐसी नहीं है कि वे भारी फीस वाले प्राइवेट इंस्टीट्यूट्स में दाखिला ले सकें, वे खुद ही बाहर हो जाते हैं. ऐसे छात्र काउंसलिंग के लिए आवेदन ही नहीं करते.
उन्होंने कहा, "कम अंक लाने वाले वे छात्र, जो आर्थिक रूप से मजबूत हैं, आवेदन करते हैं और सीट हासिल कर लेते हैं." उन्होंने आगे कहा, "NEET अपने दोनों उद्देश्यों में विफल रहा है - न तो इसने मेरिट को सुनिश्चित किया और न ही मेडिकल शिक्षा के कमर्शियलाइजेशन पर रोक लगाई."
उन्होंने कहा कि ऐसे सभी निजी मेडिकल संस्थान जिनमें डीम्ड विश्वविद्यालय भी शामिल है, जो अपनी फीस कम नहीं कर सकते और जिनकी सीटें खाली रह जाती हैं, उन्हें बंद कर दिया जाना चाहिए. उन्होंने आगे कहा, "राज्य सरकारों को बढ़ावा दिया जाना चाहिए कि वे जरूरत के हिसाब से पर्याप्त संख्या में मेडिकल कॉलेज खोलें."
बहुत ज्यादा फीस के कारण नहीं हुए दाखिले
इंडस्ट्री एक्सपर्ट्स का मानना है कि बहुत ज्यादा सालाना ट्यूशन फीस ही छात्रों के दाखिले कम होने का मुख्य कारण है. शहर में छात्रों के लिए उच्च शिक्षा करियर काउंसलर, ए. श्रीनाथ ने दावा किया कि तमिलनाडु और पुडुचेरी के डीम्ड विश्वविद्यालयों में MBBS की सालाना फीस 25 लाख रुपये से लेकर 35 लाख रुपये तक है.
उन्होंने कहा, "निजी संस्थानों में छात्रों को हॉस्टल और मेस के लिए सालाना 1.2 लाख रुपये से 2.5 लाख रुपये तक का शुल्क देना पड़ता है. इसके उल्टा, भारत के अन्य हिस्सों में निजी संस्थानों की औसत सालाना फीस लगभग 17 लाख रुपये है. इस तरह, साढ़े चार साल के पूरे कोर्स के दौरान फीस में बहुत बड़ा अंतर आ जाता है."
सीटें खाली रह जाने की सिचुएशन में, काउंसलिंग का एक और दौर हो सकता है. इस बारे में MCC फैसला लेगी. उन्होंने आगे कहा, "हालांकि, अभी तक इस पर कोई क्लीयरिटी नहीं है."
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