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सवाल बनने से लेकर पेपर छपने और सेंटर तक पहुंचने तक...ये होता है NEET क्वेश्चन पेपर का पूरा ट्रेल

NEET Paper : नीट का पेपर बेहद सिक्योर और कई लेयर वाली प्रक्रिया से गुजरता है. सवाल एक्सपर्ट्स बनाते हैं, फिर एन्क्रिप्टेड फाइल में भेजकर सरकारी प्रिंटिंग प्रेस में छापा जाता है. इसके बाद पेपर सील करके ट्रकों से बैंक की स्ट्रॉन्ग रूम में रखा जाता है.

सवाल बनने से लेकर पेपर छपने और सेंटर तक पहुंचने तक...ये होता है NEET क्वेश्चन पेपर का पूरा ट्रेल
NEET Paper Trail का पूरा एक्सप्लेनर

NEET Paper Trail: 3 मई को हुए नीट यूजी एग्जाम (NEET UG 2026) को पेपर लीक के आरोपों के चलते रद्द कर दिया गया है. 12 मई को नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) ने यह फैसला लिया. अब दोबारा परीक्षा का शेड्यूल भी जारी हो गया है, जो रविवार 21 जून को होगी. पेपर लीक की जांच केंद्र सरकार ने CBI को सौंप दी है, लेकिन हर स्टूडेंट और पैरेंट्स के मन में एक ही सवाल है कि आखिर इतनी सुरक्षा के बाद भी पेपर लीक कैसे हो जाता है. आइए एक्सपर्ट्स से समझते हैं नीट पेपर का पूरा ट्रेल.

नीट पेपर कैसे बनता है, सवाल कौन सेलेक्ट करता है

पेपर की शुरुआत बेहद सीक्रेटे तरीके से होती है. नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) एक्सपर्ट्स का एक पैनल बनाती है. ये वो लोग होते हैं जिन्हें खुद नहीं पता होता कि उनके बनाए कौन-से सवाल फाइनल पेपर में जाएंगे. इसके एक नहीं कई सेट तैयार किए जाते हैं. जब सवाल फाइनल हो जाते हैं, तो उन्हें एक इनक्रिप्टेड फाइल में बदल दिया जाता है. यह ऐसी फाइल होती है, जिसे बिना खास कोड के खोला नहीं जा सकता है. यह पूरा सिस्टम इस तरह डिजाइन होता है कि सिर्फ निर्धारित अधिकारी ही एक्सेस कर सकें.

नीट का पेपर कहां छपता है

एक्सपर्ट्स के अनुसार, इन सवालों की फाइल को प्रिंटिंग के लिए भेजा जाता है. ये प्रेस आम नहीं होते हैं. यह काम सिर्फ सरकारी अधिकृत और हाई-सिक्योरिटी प्रिंटिंग प्रेस में होता है. यहां काम करने वाले कर्मचारियों को बाहरी दुनिया से कट जाना पड़ता है. CCTV, सिक्योरिटी गार्ड और मल्टी-लेयर चेकिंग होती है. प्रिंटिंग के दौरान मोबाइल, इंटरनेट या बाहर की किसी भी चीज की परमिशन भी नहीं होती है. प्रिंट होने के बाद पेपर को सील कर दिया जाता है.

नीट का पेपर प्रिंट होने के बाद कैसे और कहां भेजा जाता है

जब प्रिटिंग प्रेस में पेपर छप जाता है, छपने के बाद पेपर के बॉक्स सील किए जाते हैं. प्रिंटिंग के बाद पेपर को सीधे एग्जाम सेंटर नहीं भेजा जाता है. यह सुरक्षित ट्रकों (Security Convoy) के जरिए अलग-अलग शहरों में भेजा जाता है.हर ट्रक के साथ सुरक्षा टीम और दस्तावेज होते हैं. इन पैकेट्स को सीधे बैंक की स्ट्रॉन्ग रूम में रखा जाता है.

बैंक में नीट पेपर की सिक्योरिटी कैसी होती है

बैंक यहां सिर्फ पैसे नहीं रखता, बल्कि पेपर की सुरक्षा का अहम हिस्सा होता है. पेपर बैंक के स्ट्रॉन्ग रूम (Strong Room) में रखा जाता है, जहां 24x7 CCTV और सुरक्षा रहती है. आमतौर पर पेपर एग्जाम से 3 से 7 दिन पहले ही बैंक पहुंच जाते हैं और इन्हें परीक्षा के दिन तक कोई नहीं खोल सकता है.

पेपर कब खोला जाता है

एग्जाम वाले दिन ही असली प्रक्रिया शुरू होती है. इसी दिन सुबह बैंक से सीलबंद बॉक्स निकाले जाते हैं. इन्हें पुलिस और सेंटर कोऑर्डिनेटर की मौजूदगी में सेंटर तक पहुंचाया जाता है. ये बॉक्स सेंटर पर ही खोले जाते हैं. इसके बाद OMR शीट और पेपर छात्रों को दिए जाते हैं.

इतनी सिक्योरिटी के बाद पेपर लीक कैसे हो जाता है

एक्सपर्ट्स के अनुसार, सिस्टम में कई लेयर होने के बावजूद कुछ जगह रिस्क रहता है. ज्यादा लोग बैंक, ट्रांसपोर्ट, सेंटर औऱ ऑफिशियल्स शामिल होते हैं. अगर कुछ लोग मिल जाएं तो पेपर लीक संभव हो सकता है. चूंकि इंसेंटिव बहुत बड़ा होता है, इसलिए सिस्टम पूरी तरह फूलप्रूफ बनाना मुश्किल होता है. इसे डिटेल्स में समझें, तो गड़बड़ी की सबसे बड़ी आशंका पेपर के आसपास ही होती है. अगर बैंक मैनेजर, सिक्योरिटी और सेंटर कोऑर्डिनेटर मिल जाएं, तो पेपर रात में ही खोला जा सकता है. सिर्फ एक फोटो खींचनी है और वॉट्सऐप के जरिए वो लाखों में बिक जाता है.

नीट में इतनी गड़बड़ी क्यों

एक्सपर्ट्स का कहना है कि सरकारी कॉलेज में डॉक्टर बनने का खर्च लगभग 5 लाख है, जबकि प्राइवेट में यह डेढ़ करोड़ तक चला जाता है. यह 1.4 करोड़ का अंतर ही नकल माफिया के लिए सबसे बड़ा इंसेंटिव यानी लालच है. एक्सपर्ट्स बताते हैं कि 6 बिलियन डॉलर की कोचिंग इंडस्ट्री का दबाव इतना है कि हर कोई शॉर्टकट से डॉक्टर बनना चाहता है.

क्या इसका कोई सॉल्यूशन है

1. एक्सपर्ट्स के अनुसार, इसके लिए हाइब्रिड मॉडल अपनाया जा सकता है. जैसे JEE का एग्जाम कई दिनों तक चलता है और पेपर सीधे कंप्यूटर स्क्रीन पर आता है, वैसा ही नीट में भी मुमकिन हो सकता है.

2. सब्जेक्टिविटी को लाना चाहिए, क्योंकि सिर्फ OMR शीट पर टिक करना काफी नहीं है. छात्र की असल समझ परखने के लिए उसे कुछ डिटेल्स से लिखने वाले सवाल देने चाहिए.

3. स्कूल के मार्क्स को भी वेटेज देना चाहिए. सिर्फ 3 घंटे का एक एग्जाम किसी का भविष्य तय करे, यह सही नहीं हो सकता है. ऐसे में स्कूल के परफॉर्मेंस को भी वेटेज मिलना चाहिए, ताकि एक दिन के पेपर लीक से पूरा सिस्टम न गिरे.

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