NEET Paper Leak: नीट परीक्षा रद्द होने के बाद देशभर में 'गेस पेपर' को लेकर चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है. आखिर गेस पेपर की प्रमाणिकता क्या होती है और क्या गेस पेपर से भी किसी बड़ी प्रतियोगी परीक्षा को क्रैक किया जा सकता है. कोचिंग सिटी कोटा में भी नीट की प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी के लिए बड़ी संख्या में देश के विभिन्न प्रदेशों से स्टूडेंट आते हैं और यहां मौजूद कोचिंग संस्थानों में प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करते हैं. कोटा कोचिंग संस्थाओं से जुड़े लोगों का कहना है कि कोटा में मेडिकल और इंजीनियरिंग की प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए कोचिंग करवाई जाती है. लेकिन कोचिंग अपने स्तर पर कभी भी पेपर से पूर्व किसी तरह का कोई गेस पेपर स्टूडेंट को सजेस्ट नहीं करते हैं. बल्कि कोटा की कोचिंग संस्थानों में वीकली और मंथली होने वाले टेस्ट ही इस तरह से करवाए जाते हैं जिसमें प्रतियोगी परीक्षा में आने वाले सवालों का पैटर्न रहता है. सिर्फ बच्चों को पैटर्न बताया जाता है, गेस पेपर निर्धारित करना और स्टूडेंट को उसे गैस पेपर के अनुरूप भी पढ़ाई करने की सलाह देने की परंपरा नहीं है.
कोचिंग के टेस्ट में पैटर्न बताया जाता है गेस पेपर नहीं होता
झालावाड़ जिले के खानपुर के रहने वाले आर्यन मेहता बताते हैं कि मैं पिछले 2 साल से कोटा में रहकर नीट की प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी कर रहा हूं. इस साल मैंने 12वीं पास करने के बाद नीट का एग्जाम दिया था. मेरा एग्जाम भी उम्मीद के मुताबिक अच्छा गया था. लेकिन परीक्षा रद्द कर दी गई है. इससे मुझे निराशा हाथ लगी है. गेस पेपर को लेकर आर्यन मेहता ने कहा कि हमने गैस पेपर के बारे में पहली बार ही सुना है. कोचिंग संस्थानों में जो टेस्ट करवाए जाते हैं, उसकी परफॉर्मेंस ही हमारा रिजल्ट कैसा आएगा उसे विश्वास को बढ़ाती हैं और ज्यादा मेहनत करने के लिए उत्साहित करती है.
टेस्ट में पैटर्न बताया जाता है यह नहीं कहा जाता यही आएगा सवाल
कोटा निवासी अहद अली ने दूसरी बार नीट की प्रतियोगी परीक्षा दी थी. हमने गेस पेपर के बारे में जब उनसे बात की तो अहद अली ने बताया कि कोचिंग संस्थान में जो टेस्ट करवाए जाते हैं, उनका पैटर्न वही रखा जाता है जो नीट प्रतियोगी परीक्षा में पैटर्न होता है. लेकिन यह नहीं होता कि हमारे टेस्ट में जो क्वेश्चन आए हैं वही क्वेश्चन नीट की परीक्षा में आ जाए. पैटर्न के अनुरूप ही कोचिंग संस्थान में स्टूडेंटस को अध्ययन करवाया जाता है. मैंने दूसरी बार नीट की परीक्षा दी है. लेकिन गैस पेपर क्या होता है इसके बारे में हमें जानकारी ही नहीं है. सोशल मीडिया पर कई बार ऐसे वीडियो भी देखे जाते हैं जो परीक्षा में कैसे सवाल आएंगे इसके बारे में जानकारी देते हैं. लेकिन उन पर भरोसा नहीं किया जा सकता. कोचिंग संस्थान द्वारा करवाए जाने वाले मॉक टेस्ट ही हमारे एग्जाम की तैयारी का असल टेस्ट होता है.
बोर्ड परीक्षाओं के लिए आया करते थे गैस पेपर
गेस पेपर को लेकर कोचिंग संचालक सुनील नयन का कहना है कि नीट जैसी बड़ी परीक्षा के गैस पेपर के बारे में अंदाज लगाना भी मुश्किल है. बोर्ड की परीक्षाओं के लिए गेस पेपर आया करते थे, कोचिंग संस्थान के डायरेक्टर सुनील नयन ने एनटीए द्वारा रद्द की गई परीक्षा के निर्णय का स्वागत करते हुए कहा है कि एनडीए बहुत अच्छा और जल्दी इस कदम को उठाया. अब जो परीक्षा आयोजित होगी उसको आत्मविश्वास के साथ स्टूडेंट दे सकेंगे. हम स्टूडेंट से अपील कर रहे हैं कि वह पैनिक ना हो जल्द ही परीक्षा आयोजित होगी.
वरिष्ठ कोचिंग फैकेल्टी फिजिक्स देव शर्मा ने गैस पेपर को लेकर खुलकर अपनी बात रखते हुए कहा है कि वर्षों से बोर्ड परीक्षाओं/प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए अनुमानित प्रश्नपत्र यानी गेस-पेपर जारी करने की परंपरा रही है. इंजीनियरिंग तथा मेडिकल प्रवेश परीक्षा में जेईई-एडवांस्ड को छोड़ दिया जाए तो मेडिकल प्रवेश परीक्षा नीट-यूजी तथा इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षा जेईई-मेन का अनुमानित प्रश्नपत्र/गेस पेपर विषय विशेषज्ञों द्वारा इस प्रकार तैयार किया जा सकता है कि लगभग 30%-से 50% प्रश्न अनुमानित प्रश्न पत्र/गेस पेपर से हो सकते हैं.
जब तक प्रश्न पत्र में प्रीवियस ईयर क्वेश्चन पेपर्स-पीवाईक्यू से प्रश्न पूंछे जाएंगे, प्रश्न पत्र में कोई नवाचार नहीं होगा, प्रश्न पत्र का पैटर्न पहले से ही ज्ञात होगा तब तक यह कार्य अनुभव विषय-विशेषज्ञों द्वारा आसानी से किया जा सकता है.
ये भी पढ़ें- जयपुर नहीं, महाराष्ट्र के इस शहर से लीक हुआ था NEET UG एग्जाम का पेपर, जांच में हुआ बड़ा खुलासा
NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं