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एक मार्कशीट की कीमत 'ज़िंदगी' तो नहीं ! खरगोन, मुरैना, छिंदवाड़ा में बुझे चिराग, उज्जैन में भी खुदकुशी की कोशिश

MP Board Result: मध्य प्रदेश बोर्ड परीक्षा परिणाम के बाद कई छात्रों द्वारा आत्महत्या की दुखद खबरें सामने आई हैं. खरगोन, मुरैना और छिंदवाड़ा की ये घटनाएं समाज में बढ़ते परीक्षा के दबाव और बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य पर गंभीर सवाल खड़े करती हैं.

एक मार्कशीट की कीमत 'ज़िंदगी' तो नहीं ! खरगोन, मुरैना, छिंदवाड़ा में बुझे चिराग, उज्जैन में भी खुदकुशी की कोशिश
  • मध्य प्रदेश बोर्ड के 10वीं और 12वीं के परिणाम घोषित होने के बाद कुछ छात्रों ने आत्महत्या जैसे गंभीर कदम उठाए
  • खरगोन के छात्र वैदिक राठौड़ ने 67 प्रतिशत अंक प्राप्त करने के बाद भी आत्महत्या की
  • छिंदवाड़ा की छात्रा सानिया ने तीन विषयों में फेल होने के बाद बाथरूम में फांसी लगाकर अपनी जान दे दी

MP Board Results 2026: मध्य प्रदेश बोर्ड के 10वीं और 12वीं के नतीजे बुधवार को घोषित हुए तो किसी के घर में खुशियों का उजाला हुआ, तो कहीं उम्मीदें टूट गईं. हालांकि अफसोस की बात ये है कि इसी दौरान कई घरों के चिराग भी बुझ गए.कोई फंदे पर झूल गया, तो किसी ने खुद को गोली मार ली. खरगोन, मुरैना और छिंदवाड़ा से आ रही ये खबरें सिर्फ 'क्राइम रिपोर्ट' नहीं हैं, बल्कि हमारे समाज की उस हार की कहानी हैं जहां एक 'फेल' लिखा हुआ कागज का टुकड़ा ज़िंदगी पर भारी पड़ गया.ये खबरें सिर्फ आंकड़े नहीं, बल्कि हमारे समाज के लिए एक गंभीर चेतावनी हैं. 

खरगोन:फर्स्ट डिवीजन आया फिर भी खुदकुशी 

खरगोन के आदर्श नगर में रहने वाले 10वीं के छात्र वैदिक राठौड़ की कहानी सबसे ज्यादा चौंकाने वाली और दुखी करने वाली है. बुधवार शाम वैदिक ने फांसी लगाकर खुद को खत्म कर लिया. ताज्जुब की बात यह है कि वैदिक फेल नहीं हुआ था, उसने 67 प्रतिशत अंक हासिल किए थे. सवाल ये है कि एक ऐसा छात्र जो सम्मानजनक अंकों के साथ उत्तीर्ण हुआ, आखिर उसने ऐसा घातक कदम क्यों उठाया? परिजनों के मुताबिक, रिजल्ट आने के बाद जब वह काफी देर तक कमरे से बाहर नहीं आया, तब उसकी मां ने दरवाजा तोड़ा और देखा कि उनका बेटा फंदे पर झूल रहा था. परिवार में किसी को समझ में नहीं आ रहा है कि वैदिक ने ये कदम क्यों उठाया? क्या यह समाज की तुलनात्मक सोच का दबाव था या खुद से बहुत ऊंची उम्मीदें? 

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छिंदवाड़ा: बाथरूम में खुद को किया खत्म

छिंदवाड़ा के परासिया तहसील में 17 वर्षीय सानिया अब इस दुनिया में नहीं है. वह कुछ समय से अपने नाना-नानी के घर रहकर पढ़ाई कर रही थी. उसकी बहन इशिता ने बताया कि रिजल्ट आने से पहले सानिया बिल्कुल सामान्य थी, लेकिन जैसे ही उसे पता चला कि वह 10वीं में तीन विषयों में फेल हो गई है, वह टूट गई. सानिया ने खुद को बाथरूम में बंद किया और फांसी लगा ली. जब तक उसे अस्पताल ले जाया जाता, तब तक देर हो चुकी थी.उसे बचाया नहीं जा सका. 

मुरैना: बंदूक की गोली ने छीन लिया भविष्य

मुरैना के महावीरपुरा में तो मंजर और भी भयावह था. 12वीं के छात्र ऋतिक दंडोतिया ने फिजिक्स, केमिस्ट्री और मैथ्स में फेल होने के बाद देसी कट्टे से खुद को गोली मार ली. शिक्षा विभाग में कार्यरत पिता का बेटा ऋतिक शायद असफलता का सामना नहीं कर पाया. एक युवा का अंत सिर्फ इसलिए हो गया क्योंकि उसे लगा कि फेल होने के बाद जिंदगी रुक गई है.
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उज्जैन: ब्रिज से लगाई छलांग, पर बच गई जान

उज्जैन में एक छात्रा ने मक्सी रोड ब्रिज से कूदकर जान देने की कोशिश की. बताया जा रहा है कि उज्जैन जिले के नानाखेड़ा क्षेत्र की लोहार पट्टी निवासी 18 वर्षीय छात्रा बुधवार को अपनी सहेली के साथ एमपी ऑनलाइन सेंटर पर रिजल्ट देखने गई थी.  यहां एक विषय में सप्लीमेंट्री आने का पता चलते ही वह विचलित हो गई, लेकिन उसने अपनी सहेली को घर छोड़ा और खुद घर जाने की बात कहकर निकल गई. इसके बाद वह दोपहर को ही  गोपालपुरा स्थित मक्सी रोड ब्रिज पहुंची और वहां से कूद गई. यह देख स्थानीय लोगों और सहेली ने तुरंत उसे निजी अस्पताल पहुंचाया.परिजनों का कहना है कि सप्लीमेंट्री आने के सदमे में वह इतनी विचलित हो गई कि उसने घर जाने के बजाय ब्रिज की राह चुन ली. फिलहाल वह अस्पताल में भर्ती है, उसके हाथ-पैर में फ्रैक्चर है, लेकिन वह मौत के मुंह से बाहर आ गई है.

बच्चों से अपील: तुम मार्कशीट से बहुत बड़े हो...

यह सच है कि आपने साल भर मेहनत की और शायद नतीजे आपके पक्ष में नहीं रहे. लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि आपके माता-पिता के लिए आपकी अहमियत क्या है? उनके लिए आप किसी गोल्ड मेडल या 90% नंबरों से कहीं ज्यादा कीमती हैं.फेल होना सिर्फ एक 'पड़ाव' है, 'पूरी कहानी' नहीं. दुनिया के सबसे सफल लोगों की लिस्ट उठाकर देख लीजिए, उनमें से आधे अपनी स्कूल की परीक्षाओं में फेल हुए थे. लेकिन वे 'जीवन' की परीक्षा में नहीं हारे. एक साल दोबारा पढ़ा जा सकता है, एक मार्कशीट दोबारा मिल सकती है, लेकिन आपकी मुस्कान दोबारा नहीं आएगी. रोना आए तो रो लो, अपने माता-पिता से बात करो, लेकिन हार मत मानो. याद रखना, तुम इस दुनिया के लिए एक 'रोल नंबर' नहीं, बल्कि एक 'जीता-जागता सपना' हो.

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डिस्क्लेमर: जीवन अनमोल है. अगर आप या आपका कोई जानने वाला किसी भी तरह के मानसिक तनाव या निराशा से गुजर रहा है, तो कृपया हेल्पलाइन नंबरों पर संपर्क करें या अपने किसी भरोसेमंद व्यक्ति से बात करें. हर समस्या का हल मुमकिन है.

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Lalit Jain
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