Stream Selection Tips: CBSE समेत देशभर के तमाम बोर्ड्स के रिजल्ट आने शुरू हो गए हैं. कहीं ज्यादा मार्क्स आने पर खुशियां मनाई जा रही है, तो कोई अपने कम नंबर से परेशान हैं. इन सबके साथ ही स्टूडेंट्स पर एक बड़ा प्रेशर भी आ गया है कि आगे की पढ़ाई किस स्ट्रीम (Stream) से करनी चाहिए. अक्सर बच्चे दूसरों को देखकर या पेरेंट्स के दबाव में गलत सब्जेक्ट चुन लेते हैं, जिससे बाद में पछताना पड़ता है. अगर आप भी इसी उलझन में हैं, तो जानिए स्ट्रीम चुनते समय किन बातों का ध्यान रखना चाहिए.
अपना इंटरेस्ट पहचानें
करियर काउंसलर्स और टीचर्स के अनुसार, सबसे पहले खुद से पूछें कि आपको कौन-सा सब्जेक्ट पढ़ने में मजा आता है. अगर आपको नंबर्स और कैलकुलेशन अच्छे लगते हैं, तो कॉमर्स आपके लिए है. अगर आप दुनिया और इतिहास को समझने में दिलचस्पी रखते हैं, तो आर्ट्स (Humanities) चुन सकते हैं और अगर 'क्यों और कैसे' के सवालों में उलझना पसंद है, तो साइंस आपका रास्ता हो सकता है.
दूसरों को देखने की गलती न करें
एक्सपर्ट्स कहते हैं, अक्सर हम देखते हैं कि दोस्त क्या ले रहा है या पड़ोसी का बच्चा क्या कर रहा है. ध्यान रखिए आपके दोस्त की ताकत अलग हो सकती है और आपकी अलग. इसलिए भीड़ का हिस्सा न बनें, अपना रास्ता खुद चुनें और वही स्ट्रीम लें, जो आपका इंट्रेस्ट बढ़ाता है.
करियर गोल को दिमाग में रखें
आप लाइफ में क्या बनना चाहते हैं. अगर डॉक्टर या इंजीनियर बनना है, तो साइंस जरूरी है. लेकिन अगर आप जर्नलिज्म, लॉ या सिविल सर्विसेज (IAS) में जाना चाहते हैं, तो आर्ट्स भी एक बेहतरीन विकल्प हो सकता है. आज के दौर में हर स्ट्रीम में पैसा और नाम दोनों हैं.
अपनी काबिलियत को समझें
एक्सपर्ट्स कहते हैं कि रिजल्ट के नंबर ही सब कुछ नहीं होते, लेकिन वे आपको एक इशारा जरूर देते हैं. अगर मैथ्स में हाथ तंग है, तो सिर्फ दिखावे के लिए साइंस लेना भारी पड़ सकता है. इसलिए अपनी ताकत और कमजोरी दोनों को पहचान कर ही स्ट्रीम चुनें.
एक्सपर्ट्स और बड़ों की सलाह लें
एक्सपर्ट्स के अनुसार, कभी भी स्ट्रीम को लेकर शर्माने की जरूरत नहीं है. अपने टीचर्स से बात करें या किसी करियर काउंसलर की हेल्प लें. वे आपको आसानी से बता पाएंगे कि किस सब्जेक्ट में आगे क्या संभावनाएं हैं और आपके लिए क्या बेस्ट हो सकता है.
पैरेंट्स क्या करें
एजुकेशनल एक्सपर्ट्स का कहना है कि पैरेंट्स को इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि रिजल्ट जैसा भी हो, बच्चे पर अपनी इच्छाएं या उम्मीदें न थोपें. उसे वह पढ़ने दें जिसे वह एंजॉय कर सके. जबरदस्ती दिलाया गया सब्जेक्ट बच्चे का कॉन्फिडेंस कम कर सकता है.
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