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US Visa ने किया था रिजेक्ट, अब NASA ने लगाया गले: ट्रैक्टर ड्राइवर के बेटे Dr. Anand Megalingam की रोचक कहानी

Tractor driver son scientist : जानिए स्पेस टेक कंपनी 'स्पेस जोन इंडिया' के CEO डॉ. आनंद मेगालिंगम की मोटिवेशनल कहानी, जिन्होंने यूएस वीजा रिजेक्शन और गरीबी को हराकर NASA तक का सफर तय किया.

US Visa ने किया था रिजेक्ट, अब NASA ने लगाया गले: ट्रैक्टर ड्राइवर के बेटे Dr. Anand Megalingam की रोचक कहानी
एरोस्पेस सेक्टर में आगे बढ़ने के दौरान डॉ. आनंद ने अमेरिकी वीजा (US Visa) के लिए अप्लाई किया, लेकिन उनका वीजा रिजेक्ट हो गया.

Dr Anand Megalingam Success Story : आज जब भारत का प्राइवेट स्पेस सेक्टर दुनिया में अपनी धाक जमा रहा है, तब डॉ. आनंद मेगालिंगम की सफलता की कहानी हर उस युवा के लिए एक मिसाल है जो संसाधनों की कमी को अपनी कमजोरी मान लेता है. आइए जानते हैं कि कैसे एक गांव का लड़का, जो कभी 6 किलोमीटर पैदल चलकर स्कूल जाता था, आज भारत का 'रॉकेट मैन' बनने की राह पर है.

6 किलोमीटर का पैदल सफर और ट्रैक्टर ड्राइवर पिता का सपना

आनंद का जन्म भारत के एक बेहद साधारण किसान परिवार में हुआ था. घर की माली हालत ऐसी नहीं थी कि बड़े-बड़े सपने देखे जा सकें. उनके पिता एक ट्रैक्टर ड्राइवर थे, जो दिन-रात मेहनत करके परिवार का पेट पालते थे. आनंद के पास न तो महंगी गाड़ियां थीं और न ही बड़े स्कूलों की सुविधाएं. उन्हें रोजाना स्कूल पहुंचने के लिए लगभग 6 किलोमीटर पैदल चलना पड़ता था. लेकिन आनंद के इरादे इतने मजबूत थे कि इस मुश्किल सफर ने उनके पैरों को थकाया नहीं.

कॉलेज ड्रॉपआउट से गोल्ड मेडलिस्ट बनने तक का टर्निंग पॉइंट

आनंद की शुरुआती पढ़ाई के बाद का सफर भी आसान नहीं था. उन्होंने पहले कंप्यूटर साइंस में दाखिला लिया, यह सोचकर कि इससे एक सुरक्षित नौकरी मिल जाएगी. लेकिन उनका दिल कोडिंग में नहीं, बल्कि आसमान की ऊंचाइयों में धड़कता था. नतीजा यह हुआ कि उन्होंने कॉलेज छोड़ दिया.

 आनंद ने इसे एक नए मोड़ की तरह लिया. उन्होंने अपने पैशन को चुना और एरोनॉटिकल इंजीनियरिंग (Aeronautical Engineering) में एडमिशन लिया. इस बार उनका जुनून ऐसा था कि उन्होंने कॉलेज में 9.8 CGPA के साथ गोल्ड मेडल जीता, जो उनके संस्थान के इतिहास के सबसे बड़े स्कोर्स में से एक था.

जब मिला रिजेक्शन, तो भारत में रहकर बड़ा करने की ठानी

एरोस्पेस सेक्टर में आगे बढ़ने के दौरान डॉ. आनंद ने अमेरिकी वीजा (US Visa) के लिए अप्लाई किया, लेकिन उनका वीजा रिजेक्ट हो गया. यह एक बड़ा झटका था, लेकिन आनंद ने हार मानने के बजाय एक ऐतिहासिक बात कही- "सरहदें इंसानों के लिए होती हैं, इनोवेशन की कोई सीमा नहीं होती."

उन्होंने भारत में ही रहकर कुछ बड़ा करने की ठानी और अपने पिता के सहयोग से 'स्पेस जोन इंडिया' की नींव रखी.

'RHUMI' रॉकेट से हिला दी दुनिया

डॉ. आनंद की लीडरशिप में स्पेस जोन इंडिया ने वो कर दिखाया जो बड़े-बड़े संस्थान नहीं कर पाते. उनकी कंपनी ने RHUMI-H मिशन लॉन्च किया, जो मोबाइल प्लेटफॉर्म से लॉन्च होने वाला भारत का पहला रीयूजेबल हाइब्रिड रॉकेट (Reusable Hybrid Rocket) था. इसके बाद RHUMI-1 के सफल लॉन्च ने एशिया के एरोस्पेस मैप पर डॉ. आनंद का नाम चमका दिया.

आनंद की यह कहानी हमें सिखलाती है कि अगर आपके इरादे मजबूत और नेक हों तो फिर बड़ी से बड़ी मुश्किल भी आपके सामने छोटी हो जाती है. आगे बढ़ने की राह आसान अपने आप आसान होती जाती है. 

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