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राष्ट्रगान और राष्ट्रगीत में क्या है अंतर, जानिए दोनों से जुड़ा पूरा इतिहास

भारत का राष्ट्रगान जन गण मन है. इसकी रचना गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर ने की थी. मूल रूप से ये गीत बंगाली भाषा में लिखा गया था.

राष्ट्रगान और राष्ट्रगीत में क्या है अंतर, जानिए दोनों से जुड़ा पूरा इतिहास

What is the difference between the national anthem and the national song : हमारा देश विविधता में एकता के लिए मशहूर है. लेकिन इस डायवर्सिटी को यूनिटी में बदलने के लिए कुछ खास प्रतीक भी हैं. जो देश के हर नागरिक को एक सूत्र में बांध कर रखते हैं. जिसमें से दो सबसे अहम हैं. एक 'राष्ट्रगान', जिसे सुनकर रोंगटे खड़े हो जाते हैं और दूसरा है, 'राष्ट्रगीत'. जिसे सुनकर रंगों में दौड़ता खून भी उबलने लगता है. पर अक्सर लोग इन दोनों को एक ही समझ कर कंफ्यूज भी होते हैं. जबकि दोनों का इतिहास और रचना काफी अलग-अलग हैं. चलिए आज जानते हैं कि स्कूलों, कॉलेजों या फंक्शन्स में अक्सर सुनाई देने वाले राष्ट्रगीत और राष्ट्रगान में मूल अंतर क्या है.

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राष्ट्रगान- देश की एकता की आवाज

भारत का राष्ट्रगान जन गण मन है. इसकी रचना गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर ने की थी. मूल रूप से ये गीत बंगाली भाषा में लिखा गया था. पहली बार इसे 27 दिसंबर 1911 को भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के कलकत्ता अधिवेशन में गाया गया था. आज जो राष्ट्रगान गाया जाता है और पूरी तरह एक्सेप्ट है, उसकी अवधि करीब 52 सेकंड है.

24 जनवरी 1950 को जन गण मन को आधिकारिक रूप से भारत के राष्ट्रगान के रूप में अपनाया गया. संविधान और सरकारी निर्देशों के अनुसार कुछ विशेष मौकों पर राष्ट्रगान बजाए जाने पर नागरिकों का सम्मान पूर्वक खड़े रहना अनिवार्य माना जाता है. ये गीत भारत की एकता, विविधता और साझा विरासत का प्रतीक है.

राष्ट्रीय गीत- स्वतंत्रता आंदोलन की प्रेरणा

भारत का राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम् है. इसे बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय ने लिखा था और ये उनके उपन्यास आनंद मठ से लिया गया है. ये गीत मुख्य रूप से संस्कृत भाषा में है. वंदे मातरम् को पहली बार 1896 में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के अधिवेशन में सार्वजनिक रूप से गाया गया था. 26 जनवरी 1950 को इसे भारत का राष्ट्रीय गीत घोषित किया गया. ये गीत स्वतंत्रता संग्राम के दौरान देशभक्ति और बलिदान की भावना जगाने का सबसे बड़ा माध्यम बना.

संवैधानिक स्थिति और महत्व

जहां राष्ट्रगान के पालन से जुड़े कुछ नियम हैं, वहीं राष्ट्रीय गीत को लेकर ऐसा कोई संवैधानिक दायित्व नहीं है. राष्ट्रीय गीत गाना अनिवार्य नहीं है, लेकिन इसका भावनात्मक और ऐतिहासिक महत्व बेहद गहरा है. आजादी की लड़ाई से जुड़े होने के कारण भी राष्ट्रगीत सिर्फ एक गीत नहीं बल्कि वीरों की शहादत को याद करने का एक जरिया है.

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