कॉलेज एडमिशन का फॉर्म भरते वक्त या किसी सरकारी काम के लिए कागज तैयार करते समय, कई बार ऐसे शब्द सामने आ जाते हैं जो छोटे लगते हैं, लेकिन पूरा काम उन्हीं पर टिक जाता है. 'एफिडेविट' और 'नोटरी' भी ऐसे ही दो शब्द हैं, जिनको लेकर सबसे ज्यादा कन्फ्यूजन होता है. अक्सर लोग बिना समझे ही इन्हें एक जैसा मान लेते हैं और बाद में फॉर्म रिजेक्ट होने या काम अटकने की नौबत आ जाती है. असल में ये दोनों जुड़े जरूर हैं, लेकिन इनका काम बिल्कुल अलग है और यही फर्क समझना सबसे ज्यादा जरूरी है.
क्या होता है एफिडेविट?
आसान भाषा में समझें तो एफिडेविट एक लिखित बयान होता है, जिसमें आप किसी जानकारी को सही मानते हुए कागज पर घोषित करते हैं. यह एक कानूनी डॉक्यूमेंट होता है और इसमें दी गई जानकारी के लिए आप खुद जिम्मेदार होते हैं. जैसे नाम में गलती, गैप ईयर या पते से जुड़ी जानकारी के लिए अक्सर एफिडेविट दिया जाता है.
नोटरी क्या है?
नोटरी कोई कागज नहीं होता, बल्कि एक ऑथोराइज अधिकारी होता है. उसका काम यह सुनिश्चित करना होता है कि जो व्यक्ति दस्तावेज पर साइन कर रहा है, वह सही है और अपनी मर्जी से साइन कर रहा है. यानी नोटरी यह कन्फर्म करता है कि डॉक्युमेंट सही व्यक्ति ने अपनी मर्जी से साइन किया है. कई लोग “नोटरी करा लो” और “एफिडेविट बनवा लो” को एक ही समझ लेते हैं, जबकि दोनों का काम अलग है. असल में एफिडेविट एक डॉक्यूमेंट होता है, जिसे कई मामलों में नोटरी के सामने साइन कराने से डाक्यूमेंट्स की कानूनी क्रेडिबिलिटी बढ़ जाती है.
कहां और कैसे होता है इस्तेमाल?
एफिडेविट आमतौर पर ऐसे मामलों में बनाया जाता है, जहां आपको किसी जानकारी को लिखित रूप में घोषित करना होता है, जैसे नाम बदलना, एड्रेस अपडेट करना या इनकम से जुड़ी जानकारी देना. इसे व्यक्ति खुद तैयार कर सकता है. हालांकि कई बार इसे नोटरी या ऑथोराइज अधिकारी के सामने साइन कराया जाता है. वहीं नोटरी एक प्रोसेस है, जिसे सिर्फ ऑथोराइज अधिकारी ही करता है और वह साइन की पुष्टि करने के साथ उसका रिकॉर्ड भी अपने रजिस्टर में दर्ज करता है. नोटरी का इस्तेमाल आमतौर पर NOC, कॉन्ट्रैक्ट, रेंट एग्रीमेंट या पावर ऑफ अटॉर्नी जैसे डॉक्युमेंट्स में किया जाता है, जहां पहचान और सहमति की पुष्टि जरूरी होती है.
स्टूडेंट्स के लिए क्यों जरूरी है समझना?
एडमिशन, स्कॉलरशिप, हॉस्टल या जॉब वेरिफिकेशन जैसे कामों में ये दोनों चीजें बार-बार काम आती हैं. अगर फर्क समझ में नहीं आया, तो गलत डॉक्युमेंट लगाने की वजह से आवेदन रिजेक्ट भी हो सकता है. सीधी बात एफिडेविट मतलब आपकी लिखित घोषणा और नोटरी मतलब उस घोषणा को वेरिफाई करने वाला अधिकारी. फर्क छोटा है, लेकिन समझना बेहद जरूरी है.
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