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CGPA और Percentage में क्या अंतर है? नौकरी में किसकी ज्यादा अहमियत होती है?

कॉलेज के छात्रों के लिए CGPA और Percentage का अंतर समझना जरूरी है. जानिए दोनों में क्या फर्क है, नौकरी में किसे ज्यादा अहमियत मिलता है और भर्ती प्रक्रिया में किन बातों का ध्यान रखना चाहिए.

CGPA और Percentage में क्या अंतर है? नौकरी में किसकी ज्यादा अहमियत होती है?
छात्रों के लिए सबसे अच्छा तरीका यह है कि वे CGPA या Percentage दोनों को बेहतर रखने के साथ-साथ अपने कौशल पर भी लगातार काम करें

Job ke liye CGPA ya Percentage : ज्यादातर छात्रों के मन में एक सवाल जरूर आता है कि आखिर CGPA और Percentage में क्या अंतर है? नौकरी के लिए आवेदन करते समय कौन ज्यादा मायने रखता है? कई बार स्टूडेंट्स को रिज्यूमे बनाते समय या भर्ती फॉर्म भरते समय भी यह समझ नहीं आता कि CGPA लिखें या पर्सेंटेज. आज के इस आर्टिकल में हम आपको इन दोनों में अंतर क्या है और नौकरी के लिए किसकी क्या अहमियत, इसके बारे में विस्तार से बताने जा रहे हैं. 

क्या होता है CGPA?

CGPA (Cumulative Grade Point Average) एक ऐसा मार्किंग सिस्टम है जिसमें छात्रों के एकेडेमिक परफॉर्मेंस को ग्रेड पॉइंट्स के आधार पर मापा जाता है. कई यूनिवर्सिटी और बोर्ड स्टूडेंट्स को सीधे नंबर देने की बजाय ग्रेड और ग्रेड पॉइंट्स देते हैं.

उदाहरण के तौर पर अगर किसी छात्र ने सभी सेमेस्टर में अच्छा प्रदर्शन किया है तो उसका CGPA 8.5, 9.0 या 9.5 हो सकता है. इससे यह पता चलता है कि स्टूडेंट्स का कुल प्रदर्शन कितना बेहतर रहा है.

Percentage क्या होता है?

Percentage किसी स्टूडेंट्स द्वारा मिले नंबर का सीधा प्रतिशत होता है. मान लीजिए किसी परीक्षा में कुल 1000 नंबर थे और छात्र ने 800 अंक हासिल किए, तो उसका प्रतिशत 80% होगा.

भारत में लंबे समय से ज्यादातर रिक्रूटमेंट प्रोसेस और एंट्रेंस एग्जाम में प्रतिशत का इस्तेमाल होता आ रहा है, इसलिए यह स्टूडेंट्स और एंप्लॉयर दोनों के लिए आसानी से समझ में आने वाला पैमाना माना जाता है.

CGPA को Percentage में कैसे बदलते हैं?

अलग-अलग बोर्ड और यूनिवर्सिटी CGPA को प्रतिशत में बदलने के लिए अलग-अलग फॉर्मूला अपना सकते हैं. जैसे CBSE में लंबे समय तक CGPA को 9.5 से गुणा करके प्रतिशत निकाला जाता था. हालांकि हर संस्थान का नियम अलग हो सकता है, इसलिए छात्रों को अपने संस्थान की ऑफिशियल गाइडलाइन जरूर देखनी चाहिए.

नौकरी में किसकी ज्यादा अहमियत होती है?

असल में नौकरी में केवल CGPA या Percentage ही सब कुछ तय नहीं करते. कंपनियां और सरकारी संस्थान अपने-अपने नियमों के अनुसार योग्यता निश्चित करते हैं.

कई प्राइवेट कंपनियां न्यूनतम 60 फीसदी या उसके बराबर CGPA मांगती हैं. वहीं, कुछ संस्थान आवेदन के दौरान सीधे पर्सेंटेज मांगते हैं, जबकि कुछ CGPA स्वीकार करते हैं. अगर भर्ती एडवर्टीजमेंट में प्रतिशत मांगा गया है तो कैंडिडेट्स को अपने CGPA को निर्धारित फॉर्मूले के अनुसार प्रतिशत में बदलकर देना पड़ सकता है.

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