- बिहार पुलिस दारोगा भर्ती परीक्षा की मुख्य परीक्षा 27 मई को हुई थी, जिसे BPSSC ने 23 सितंबर को रद्द कर दिया.
- परीक्षा रद्द करने के बाद सफल लगभग दस हजार अभ्यर्थी पटना में धरने पर बैठकर अपनी मांगें उठा रहे हैं.
- अभ्यर्थी सोमवार को मुख्यमंत्री आवास का घेराव और BPSSC कार्यालय तक मार्च निकालने की योजना बना रहे हैं.
बिहार पुलिस दारोगा भर्ती की मुख्य परीक्षा रद्द किए जाने के बाद अभ्यर्थियों का आक्रोश लगातार बढ़ता जा रहा है. पटना में पिछले कई दिनों से धरने पर बैठे सफल अभ्यर्थियों ने अब आंदोलन तेज करने का फैसला किया है. अभ्यर्थियों ने सोमवार को मुख्यमंत्री आवास घेराव मार्च का ऐलान किया है और सरकार से परीक्षा रद्द करने का निर्णय वापस लेकर परिणाम बहाल करने की मांग की है.
बिहार पुलिस के 1799 पदों पर दारोगा भर्ती परीक्षा BPSSC ने 23 सितंबर को रद्द कर दी थी. इस भर्ती की प्रारंभिक परीक्षा 18 और 21 जनवरी 2026 को दो पालियों में आयोजित की गई थी. इसके बाद मुख्य परीक्षा (Mains) 27 मई 2026 को दो पालियों में हुई थी. हालांकि, बिहार पुलिस अवर सेवा आयोग (BPSSC) ने 23 सितंबर को आधिकारिक नोटिस जारी कर 27 मई को आयोजित मुख्य परीक्षा को रद्द कर दिया. आयोग ने परीक्षा रद्द करने के पीछे "अपरिहार्य कारण" बताया है.
इस परीक्षा में लगभग 10 हजार से अधिक अभ्यर्थी सफल हुए थे और भर्ती प्रक्रिया का अगला तथा अंतिम चरण इंटरव्यू था. इंटरव्यू के बाद चयनित अभ्यर्थियों की नियुक्ति होनी थी, लेकिन उससे पहले ही आयोग ने परीक्षा रद्द करने का निर्णय ले लिया, जिससे हजारों अभ्यर्थियों के सामने असमंजस की स्थिति पैदा हो गई है.
धरने पर बैठे हैं सफल अभ्यर्थी
23 सितंबर को परीक्षा रद्द किए जाने के बाद से सफल अभ्यर्थी पटना के धरना स्थल पर लगातार प्रदर्शन कर रहे हैं. अभ्यर्थियों ने घोषणा की है कि सोमवार को BPSSC कार्यालय और मुख्यमंत्री आवास का घेराव किया जाएगा. इसके लिए बिहार के विभिन्न जिलों से दारोगा भर्ती की मुख्य परीक्षा पास कर चुके अभ्यर्थी पटना पहुंचेंगे और मार्च निकालेंगे.
प्रदर्शन कर रहे अभ्यर्थियों का कहना है कि वे भर्ती प्रक्रिया के अंतिम चरण तक पहुंच चुके थे और इंटरव्यू के बाद नियुक्ति की उम्मीद कर रहे थे. ऐसे में अचानक परीक्षा रद्द किए जाने से हजारों उम्मीदवारों का भविष्य अधर में लटक गया है.
BPSSC का क्या कहना है?
आयोग की ओर से अब तक परीक्षा रद्द करने के कारणों पर कोई विस्तृत स्पष्टीकरण नहीं दिया गया है. अपने आधिकारिक पत्र में आयोग ने केवल "अपरिहार्य कारणों" का हवाला देते हुए परीक्षा रद्द करने की बात कही है. इसके अलावा आयोग ने पूरे मामले पर कोई विस्तृत जानकारी सार्वजनिक नहीं की है.
आयोग के अध्यक्ष के. एस. द्विवेदी ने भी परीक्षा रद्द करने से जुड़े घटनाक्रम पर कोई सार्वजनिक बयान नहीं दिया है. आयोग ने अब तक परीक्षा में किसी प्रकार की गड़बड़ी की पुष्टि नहीं की है. हालांकि, मीडिया रिपोर्ट्स में पेपर लीक और मूल्यांकन में कथित धांधली की बातें सामने आई हैं, लेकिन इन आरोपों पर आयोग की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी गई है.
पारदर्शिता पर उठ रहे सवाल
मुख्य परीक्षा समाप्त होने के बाद से ही अभ्यर्थी और विभिन्न छात्र संगठन OMR शीट के मूल्यांकन, कटऑफ अंक और परीक्षा प्रणाली की पारदर्शिता को लेकर सवाल उठा रहे थे. अब अभ्यर्थियों ने मुख्यमंत्री से 10 मिनट का समय मांगा है. उनका कहना है कि यदि मुख्यमंत्री उनकी बात सुन लें, तो वे अपनी मांगों और आपत्तियों से अवगत करा सकते हैं. अभ्यर्थियों की प्रमुख मांग है कि सरकार और आयोग मुख्य परीक्षा रद्द करने के फैसले को वापस लें तथा पूर्व में घोषित परिणाम को बहाल कर भर्ती प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जाए.
ये भी पढ़ें : दिल्ली से बिहार भेजा गया घरेलू सामान गायब, पैकर्स एंड मूवर्स पर धोखाधड़ी का आरोप
NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं