- दिल्ली सरकार ने यमुना की सफाई और प्रदूषण नियंत्रण के लिए 22 हजार करोड़ रुपये का ग्रीन बजट पेश किया है.
- कुल 1,03,700 करोड़ रुपये के राज्य बजट में से 21.44 प्रतिशत हरित योजनाओं के लिए आवंटित किए गए हैं.
- दिल्ली जल बोर्ड को यमुना सफाई के लिए सबसे ज्यादा 6,485 करोड़ रुपये दिए गए हैं, जो मुख्य प्राथमिकता है.
दिल्ली की आबोहवा में बढ़ता प्रदूषण और वैश्विक स्तर पर प्रदूषित शहरों में इसका नाम आना, नागरिकों की सेहत के लिए बड़ा खतरा है. इसके समाधान के लिए रेखा सरकार ने 22 हजार करोड़ रुपये का 'ग्रीन बजट' पेश किया है. इस बजट का मुख्य फोकस यमुना की सफाई और प्रदूषण नियंत्रण पर रहेगा.
ग्रीन बजट में कुल 1,03,700 करोड़ रुपये के राज्य बजट में से 22,236 करोड़ रुपये (21.44 प्रतिशत) विशेष रूप से हरित योजनाओं के लिए निर्धारित किए गए हैं, जो सरकार की पर्यावरणीय प्राथमिकताओं को स्पष्ट रूप से दर्शाता है. मुख्यमंत्री ने बताया कि कुल 17 प्रमुख विभागों को चरणबद्ध रूप में धनराशि आवंटित की गई है, ताकि हर क्षेत्र में समन्वित तरीके से काम हो सके.
ग्रीन बजट का आकार और प्राथमिकताएं
मुख्यमंत्री के अनुसार ग्रीन बजट का सबसे बड़ा हिस्सा लगभग 6,485 करोड़ रुपये दिल्ली जल बोर्ड को दिया गया है, जिसका उपयोग यमुना की सफाई और जल उपचार परियोजनाओं में किया जाएगा. इसके बाद परिवहन विभाग को 4,758 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं, जिनका लक्ष्य ई-बसों को बढ़ावा देना और स्वच्छ परिवहन प्रणाली को मजबूत करना है. लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) को 3,350 करोड़ रुपये दिए गए हैं, जिनसे धूल नियंत्रण और हरित बुनियादी ढांचे का विकास किया जाएगा.
समन्वित विकास की दिशा
योजना विभाग को 2,350 करोड़ रुपये प्रदान किए गए हैं ताकि विभिन्न हरित परियोजनाओं की रूपरेखा तैयार की जा सके. शहरी विकास विभाग और डूसिब को मिलाकर 2,273 करोड़ रुपये दिए गए हैं, जिनका उपयोग विशेष पर्यावरणीय अभियानों में होगा. वहीं, बिजली विभाग को 1,410 करोड़ रुपये सौर और अन्य नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों को बढ़ावा देने के लिए आवंटित किए गए हैं.
हरित कोष के जरिए व्यापक कवरेज
इसके अतिरिक्त, अन्य विभागों को भी ‘हरित कोष' के तहत महत्वपूर्ण राशि दी गई है. पर्यावरण विभाग को प्रदूषण नियंत्रण की प्रमुख योजनाओं के लिए 558 करोड़ रुपये, सिंचाई एवं बाढ़ नियंत्रण विभाग को जल संरक्षण कार्यों के लिए 305 करोड़ रुपये, और विकास विभाग को ग्रामीण क्षेत्रों में हरित विकास को बढ़ावा देने के लिए 258 करोड़ रुपये दिए गए हैं.
शिक्षा, पर्यटन और उद्योग तक फैला हरित एजेंडा
वन विभाग को वृक्षारोपण और वन्यजीव संरक्षण के लिए 181 करोड़ रुपये, पर्यटन विभाग को पर्यावरण अनुकूल पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए 102 करोड़ रुपये और शिक्षा विभाग को विद्यालयों में हरित पहलों के लिए 100 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं. इसी क्रम में, उद्योग विभाग को औद्योगिक प्रदूषण कम करने के लिए 42 करोड़ रुपये, स्वास्थ्य विभाग को अस्पतालों में पर्यावरणीय सुधार के लिए 31 करोड़ रुपये, और राजस्व विभाग को आपदा प्रबंधन एवं हरित सर्वेक्षण के लिए 23 करोड़ रुपये दिए गए हैं.
कौशल और शोध के जरिए भविष्य की तैयारी
प्रशिक्षण एवं तकनीकी शिक्षा विभाग को हरित कौशल विकास के लिए 7 करोड़ रुपये तथा उच्च शिक्षा विभाग को शोध और पर्यावरण अध्ययन के लिए 2 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं. इस तरह, ग्रीन बजट-2026-27 के जरिए दिल्ली सरकार ने एक समग्र, विभागवार और चरणबद्ध रणनीति अपनाते हुए राजधानी को स्वच्छ, हरित और टिकाऊ शहर में बदलने की दिशा में ठोस कदम बढ़ाया है.
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