मानसून से पहले दिल्ली के ड्रेनेज सिस्टम को तैयार करने का काम जारी है, लेकिन रफ्तार और समयसीमा पर सवाल बने हुए हैं. सिंचाई और बाढ़ नियंत्रण विभाग के 23 अप्रैल तक के आंकड़ों के मुताबिक, राजधानी के 76 प्रमुख नालों से अब तक 16.48 लाख घन मीटर गाद निकाली गई है, जो इस साल के लक्ष्य का 57.68 फीसदी है. यानी करीब 42 फीसदी काम अभी बाकी है.
संवेदनशील नालों पर ज्यादा काम, लेकिन तस्वीर अधूरी
जलभराव वाले इलाकों को ध्यान में रखते हुए 21 प्राथमिकता वाले नालों पर 76 फीसदी से ज्यादा डी-सिल्टिंग हो चुकी है.इसके उलट, दिल्ली के सबसे बड़े ड्रेनेज नेटवर्क नजफगढ़ ड्रेन में अब तक सिर्फ 48 फीसदी काम हुआ है. मानसून से पहले इसे पूरा करना विभाग के लिए बड़ी चुनौती बना हुआ है.बाकी 55 नालों में औसतन 63 फीसदी काम पूरा हुआ है.
94 करोड़ की मशीनरी योजना, जमीनी तैनाती सीमित
बाढ़ प्रबंधन के लिए 94 करोड़ रुपये की मशीनरी योजना बनाई गई है. इसके तहत 38 आधुनिक मशीनें शामिल की जानी हैं, जिनमें एम्फीबियस एक्सकेवेटर, लॉन्ग-बूम हाइड्रोलिक एक्सकेवेटर, ड्रेजर और ड्रैगलाइन शामिल हैं.हालांकि, अब तक सिर्फ 12 मशीनें ही तैनात हो पाई हैं, जबकि बाकी के लिए टेंडर और ऑर्डर की प्रक्रिया जारी है.
निस्तारण के दावे, लेकिन निगरानी पर सवाल
अधिकारियों का कहना है कि इस बार गाद को नालों के किनारे छोड़ने के बजाय तय स्थानों तक पहुंचाया जा रहा है, ताकि बारिश में वह दोबारा नालों में न लौटे. इसे ‘वैज्ञानिक निस्तारण' और जवाबदेही बढ़ाने की कोशिश बताया जा रहा है.फिलहाल, जून के मध्य तक सभी अहम नालों को पूरी क्षमता में लाने का लक्ष्य है. लेकिन जब लक्ष्य का 42 फीसदी काम अभी बाकी है और सबसे बड़े ड्रेन में आधा काम भी पूरा नहीं हुआ है, तो सवाल यही है - क्या दिल्ली इस बार मानसून से पहले सच में तैयार हो पाएगी. ये भी एक बड़ा सवाल है.
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