दिल्ली में पेशाब करने पर मर्डर, पहले कहासुनी और फिर चाकू से गोद डाला

पुलिस ने इस ब्लाइंट मामले को सुलझाने के लिए 500 से ज्यादा सीसीटीवी फुटेज की जांच की. इसके बाद पुलिस ने पहले एक आरोपी की पहचान की और उसके बाद तीन अन्य को भी गिरफ्तार किया गया.

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दिल्ली में कैब चालक की चाकू से गोदकर हत्या
नई दिल्ली:

दिल्ली के हज़रत निज़ामुद्दीन इलाके में 3 दिसंबर की सुबह उस समय सनसनी फैल गई जब बरापुला फ्लाईओवर के नीचे एक युवक का शव पड़ा हुआ मिला. PCR कॉल मिलते ही स्थानीय पुलिस और ACP मौके पर पहुंच गए. पुलिस ने मृतक की पहचान 27 साल के कुलदीप उर्फ राम सिंह के रूप में की गई है. पुलिस के लिए ये ब्लाइंड मर्डर केस था. मामले की गंभीरता देखते हुए पुलिस ने तुरंत एक संयुक्त टीम गठित की, सभी टीमें मिलकर इस हत्या की गुत्थी को जल्द सुलझाने में जुट गईं.

500 से ज्यादा सीसीटीवी फुटेज की जांच

जांच टीम ने इलाके के 500 से अधिक CCTV फुटेज खंगाले. घंटों तक फुटेज देखने के बाद पुलिस को एक महत्वपूर्ण सुराग मिला भोगल स्थित जैन मंदिर के पास बने एक सार्वजनिक शौचालय के बाहर से मिली CCTV फुटेज. इस फुटेज में कुछ संदिग्ध दिखाई दिए. पुलिस ने तुरंत तकनीकी सर्विलांस, नंबर प्लेट ट्रैकिंग, और स्थानीय स्रोतों से जानकारी जुटाकर इन संदिग्धों की पहचान कर ली. इसके आधार पर पुलिस ने चार आरोपियों को पकड़ लिया, जिनमें एक बालिग युवक और तीन नाबालिग शामिल हैं.

मुख्य आरोपी की पहचान इमरान उर्फ पानवाड़ी (19) के रूप में हुई, जो पहले से ही स्नैचिंग और चोरी के तीन मामलों में शामिल रह चुका है. पूछताछ में इमरान और उसके साथियों ने हत्या की दिल दहला देने वाली कहानी बताई. आरोपियों ने बताया कि इमरान का जन्मदिन मनाने के बाद चारों रात को इंडिया गेट घूमने निकले थे. रास्ते में भोगल इलाके में वे एक सार्वजनिक शौचालय के पास रुके, जहां उनकी मुलाकात पीड़ित कुलदीप से हुई. पीड़ित अपनी कार के पास खड़ा था. पेशाब करने को लेकर कहासुनी इतनी बढ़ गई कि सभी आरोपी जो शराब के नशे में थे गुस्से में आकर कुलदीप पर टूट पड़े. इमरान ने चाकू से वार करके कुलदीप की हत्या कर दी. हत्या के बाद चारों युवक कुलदीप की कार लेकर फरार हो गए. 

पुलिस ने आरोपियों के पास से मृतक की कार, हत्या के समय पहने गए खून से सने कपड़े, और हत्या में इस्तेमाल किया गया चाकू बरामद कर लिया है. यह सभी सबूत मामले को मजबूत बनाने में बेहद अहम साबित हुए हैं. दिल्ली पुलिस की तेजतर्रार और संगठित कार्रवाई के कारण यह ब्लाइंड मर्डर केस सिर्फ 24 घंटों में सुलझाया जा सका. तकनीकी और मानव खुफिया दोनों तरह की जांच ने इसमें बड़ी भूमिका निभाई. चारों आरोपियों की गिरफ्तारी से न केवल इस जघन्य वारदात का खुलासा हुआ, बल्कि पीड़ित परिवार के लिए न्याय की राह भी साफ हुई.

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