तुर्कमान गेट के फैज-ए-इलाही मस्जिद की कब पड़ी थी बुनियाद, नाम से लेकर मतलब तक की पूरी कहानी, जान लीजिए

कुछ स्थानीय लोग इसे दरगाह फैज ए इलाही भी कहते हैं. उनका कहना है कि यहां एक दरगाह भी हुआ करती थी.ये लेकिन वो नीचे दब गई ऊपर मस्जिद बनी है.

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मस्जिद के बाहर किए गए अतिक्रमण को एमसीडी ने हटाया
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  • दिल्ली के तुर्कमान गेट इलाके में एमसीडी ने मस्जिद के आसपास अवैध निर्माण हटाने के लिए कार्रवाई की है
  • फैज-ए-इलाही मस्जिद लगभग अस्सी साल पुरानी है और इसकी जमीन कब्रिस्तान के रूप में दी गई थी
  • मस्जिद का नाम सूफी शाह फैज इलाही के नाम पर पड़ा है जिनकी कब्र मस्जिद के पास स्थित है
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नई दिल्ली:

दिल्ली के तुर्कमान गेट इलाके में MCD की अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई के दौरान मंगलवार रात हालात तनावपूर्ण हो. तनाव उस वक्त और बढ़ गया जब अतिक्रमण हटाने कर्मचारी तुर्कमान गेट के पास बनी एक मस्जिद के पास पहुंचे. स्थानीय लोगों ने प्रशासन की इस कार्रवाई के खिलाफ हंगामा शुरू किया और हालात पत्थरबाजी तक पहुंच गई. एमसीडी के अनुसार मस्जिद के आसपास अवैध निर्माण किया गया है. ऐसे में उन्हें हटाने का आदेश है. स्थानीय लोग और प्रशासन के बीच खींचतान जारी है. जिस मस्जिद को लेकर ये बवाल हो रहा है उसे लेकर हम आज आपको सबकुछ बताने जा रहे हैं. 

 करीब 80 साल पुरानी है ये मस्जिद

तुर्कमान गेट के ठीक सामने बनी फैज-ए-इलाही मस्जिद करीब 80 साल पुरानी है. आजादी से पहले रामलीला मैदान के एक किनारे की ज़मीन पर कब्रिस्तान  होने का दावा किया गया है. दिल्ली नगर निगम के मेयर राजा इक़बाल सिंह बताते हैं कि 1942 में 900 स्क्वायर मीटर की जगह कब्रिस्तान के नाम पर दी गई थी.इसी के पेपर को दिखाकर मस्जिद की इंतजामिया कमेटी ने इस जमीन पर हक जताया था.धीरे-धीरे मस्जिद यहां बना दी गई.

क्या है फैज-ए-इलाही का मतलब

फैज ए इलाही अरबी शब्द है इसका मतलब फ़ैज़ का मतलब महिमा या ग्रेस है जबकि इलाही का मतलब अल्लाह या ईश्वर होता है. इसी के नाम पर मस्जिद का निर्माण हुआ.एक स्थानीय बुजुर्ग के मुताबिक शाह फैज इलाही नाम के एक सूफ़ी थे उन्होंने मस्जिद का निर्माण कराया था.उनके नाम पर मस्जिद का नाम पड़ा उनकी कब्र भी पास में ही थी. इसीलिए कुछ स्थानीय लोग इसे दरगाह फैज ए इलाही भी कहते हैं. उनका कहना है कि यहां एक दरगाह भी हुआ करती थी.ये लेकिन वो नीचे दब गई ऊपर मस्जिद बनी है.उसके बाद धीरे धीरे मस्जिद की इंतजामिया कमेटी ने बगल की जमीन को घेरा उसे अपने उपयोग में लाने लगे फिर 1999 के आसपास वहां पक्का निर्माण करना शुरु कर दिया. निगम के सूत्रों के मुताबिक बीते 20 साल में मस्जिद की इंतजामिया कमेटी ने पहले रुकने के लिए कमरे फिर दो मंजिला बैंक्वेट हाल बना लिया.

निगम के अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर NDTV को बताया कि धीरे-धीरे रामलीला मैदान की जमीन पर डायग्नोस्टिक सेंटर फिर लाइब्रेरी के नाम पर 4047.55 स्क्वायर यार्ड यानि करीब एक एकड़ के आसपास जमीन पर अवैध निर्माण हो चुका था. फ़ैज़ ए इलाही मस्जिद के इंतजामिया कमेटी के सदस्य मतलूब  से संपर्क करने की कोशिश की लेकिन उनका फोन नहीं उठाया जबकि मस्जिद के काजी साहब ने कहा कि फ़िलहाल वो इस मामले पर बात नहीं करना चाहते हैं.

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