पानी की किल्लत के बीच दिल्ली का बड़ा दांव, मानसून से पहले 1,500 रेन वाटर हार्वेस्टिंग प्रोजेक्ट्स होंगे पूरे 

दिल्ली में पानी की किल्लत के बीच सरकार ने बड़ा कदम उठाते हुए 1500 रेन वाटर हार्वेस्टिंग प्रोजेक्ट शुरू किए हैं. मानसून से पहले 500 नए ढांचे बनाए जाएंगे और 1000 बंद सिस्टम को फिर से चालू किया जाएगा. इससे हर साल 73 करोड़ लीटर पानी भूजल में रिचार्ज होने की उम्मीद है.

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गर्मियों में पानी की किल्लत झेलने के बाद अब दिल्ली सरकार मानसून के पानी को सहेजने की तैयारी में जुट गई है. राजधानी में 500 नए रेन वाटर हार्वेस्टिंग ढांचे बनाए जाएंगे, जबकि 1,000 बंद पड़ी प्रणालियों को फिर से चालू किया जाएगा. सरकार का अनुमान है कि इससे हर साल 73 करोड़ लीटर से ज्यादा पानी भूजल में वापस पहुंच सकेगा.

दिल्ली जल बोर्ड (डीजेबी) की ओर से शुरू किए गए इस अभियान का उद्देश्य मानसून के दौरान होने वाली बारिश के पानी को संरक्षित करना और भूजल स्तर को बेहतर बनाना है. यह पहल ऐसे समय में सामने आई है जब हाल के हफ्तों में राजधानी के कई इलाकों में पानी की कमी और आपूर्ति संबंधी शिकायतें चर्चा में रही हैं.

पानी की किल्लत के बाद अब भूजल पर फोकस

दिल्ली अपनी पानी की जरूरतों के लिए काफी हद तक यमुना और पड़ोसी राज्यों से मिलने वाले पानी पर निर्भर है. हर साल गर्मियों में बढ़ती मांग और सीमित संसाधनों के कारण कई इलाकों में जल संकट की स्थिति बन जाती है. ऐसे में सरकार का मानना है कि वर्षा जल संचयन भूजल भंडार को मजबूत करने और भविष्य में पानी के दबाव को कम करने का एक अहम जरिया बन सकता है.

1,500 प्रोजेक्ट्स पर एक साथ काम

  • दिल्ली जल बोर्ड के मुताबिक, अभियान के पहले चरण में 500 नए रेन वाटर हार्वेस्टिंग ढांचे बनाए जाएंगे और 1,000 ऐसी प्रणालियों को दोबारा कार्यशील बनाया जाएगा जो फिलहाल निष्क्रिय हैं.
  • इस पहल में नगर निगम दिल्ली (एमसीडी), लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी), दिल्ली अर्बन शेल्टर इम्प्रूवमेंट बोर्ड (डीयूएसआईबी), शिक्षा निदेशालय और अन्य सरकारी विभागों की इमारतों को शामिल किया जाएगा.
  • दिल्ली में वर्ष 2001 से 100 वर्ग मीटर या उससे बड़े भूखंडों पर रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम अनिवार्य है. हालांकि, समय के साथ कई प्रणालियां रखरखाव के अभाव में बंद हो गईं.
  • सरकारी आंकड़ों के अनुसार, दिल्ली के 9,148 सरकारी भवनों में से करीब 7,596 भवनों में रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम मौजूद हैं. अब इन प्रणालियों को मानसून से पहले पूरी तरह कार्यशील बनाने पर जोर दिया जा रहा है.

30 जून तक पूरा करना है लक्ष्य

दिल्ली जल बोर्ड ने इस अभियान के पहले चरण को 30 जून तक पूरा करने का लक्ष्य रखा है. अधिकारियों के मुताबिक, निविदाएं तत्काल आमंत्रित की जा रही हैं और जून के पहले सप्ताह में कार्यादेश जारी किए जाएंगे. कोशिश यह है कि मानसून की बारिश शुरू होने से पहले सभी नए और पुनर्जीवित सिस्टम काम करने लगें.

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हर साल 73 करोड़ लीटर रिचार्ज का दावा

दिल्ली जल बोर्ड का अनुमान है कि इस परियोजना के तहत आने वाले भवनों की छतों और दिल्ली की औसत वार्षिक वर्षा के आधार पर हर साल करीब 733 मिलियन लीटर यानी 73 करोड़ लीटर से ज्यादा पानी भूजल में रिचार्ज किया जा सकेगा. अधिकारियों का कहना है कि इससे बारिश का वह पानी, जो सामान्य तौर पर बहकर निकल जाता है, उसे जमीन के भीतर पहुंचाने में मदद मिलेगी.

निगरानी के लिए बनेगा ऑनलाइन पोर्टल

अभियान की निगरानी के लिए दिल्ली जल बोर्ड एक समर्पित ऑनलाइन पोर्टल भी विकसित कर रहा है. अधिकारियों के अनुसार, इस पोर्टल के जरिए रेन वाटर हार्वेस्टिंग प्रणालियों की स्थापना, अनुपालन और रखरखाव की निगरानी की जाएगी. इसके अलावा, दिल्ली जल बोर्ड ने इस काम के लिए राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में 59 सेवा प्रदाताओं को सूचीबद्ध किया है.

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"बारिश की हर बूंद एक मूल्यवान संसाधन"

दिल्ली के जल मंत्री परवेश वर्मा ने कहा कि जल संरक्षण को केवल मौसमी चर्चा तक सीमित नहीं रखा जा सकता. "जल संरक्षण केवल मौसमी चर्चा का विषय नहीं हो सकता, बल्कि इसे एक जन आंदोलन बनाना होगा. दिल्ली में गिरने वाली बारिश की हर बूंद एक मूल्यवान संसाधन है और हमारी जिम्मेदारी है कि उसे व्यर्थ बहने देने के बजाय संरक्षित कर भूजल में वापस पहुंचाया जाए."

उन्होंने कहा कि अभियान का उद्देश्य केवल नए ढांचे बनाना नहीं, बल्कि पहले से मौजूद प्रणालियों को भी फिर से सक्रिय करना है. "यह अभियान केवल नए ढांचे बनाने तक सीमित नहीं है. इसका महत्वपूर्ण उद्देश्य पहले से मौजूद प्रणालियों को पुनर्जीवित करना और यह सुनिश्चित करना भी है कि सरकारी संस्थान स्वयं उदाहरण प्रस्तुत करें. आगामी मानसून दिल्ली के भूजल भंडार को मजबूत करने का महत्वपूर्ण अवसर है और हम इसका अधिकतम लाभ उठाने के लिए प्रतिबद्ध हैं."

क्या इससे कम होगी दिल्ली की पानी की समस्या?

जल मंत्री ने कहा कि दिल्ली की दीर्घकालिक जल सुरक्षा के लिए प्रभावी जल प्रबंधन, संरक्षण उपायों और जनभागीदारी जरूरी है. "दिल्ली सरकार राजधानी के लिए एक टिकाऊ और जल-सुरक्षित भविष्य बनाने के लिए प्रतिबद्ध है. वर्षा जल संचयन हमारे पास उपलब्ध सबसे प्रभावी उपायों में से एक है. यह पहल भूजल संसाधनों को मजबूत करने तथा भविष्य की जल चुनौतियों के प्रति दिल्ली को अधिक सक्षम और लचीला बनाने के हमारे संकल्प को दर्शाती है."

मानसून के दिल्ली पहुंचने में अब ज्यादा समय नहीं बचा है. ऐसे में सरकार की कोशिश है कि बारिश शुरू होने से पहले अधिक से अधिक रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम चालू हो जाएं, ताकि आने वाले वर्षों में राजधानी की जल जरूरतों को पूरा करने में भूजल भंडार की भूमिका मजबूत हो सके.

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