राजधानी दिल्ली के रजोकरी स्थित वेस्टएंड ग्रीन फार्म्स के जमीन सीमांकन (Demarcation) विवाद में दिल्ली हाई कोर्ट ने अहम आदेश जारी किया है. अदालत ने दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA) को निर्देश दिया है कि वह पहले भू-स्वामियों के मालिकाना हक और रेवेन्यू रिकॉर्ड का वेरिफिकेशन करे और उन्हें अपनी बात रखने का उचित अवसर दे, उसी के बाद कोई फैसला करे.
दरअसल वेस्टएंड ग्रीन फार्म्स में जमीन के कई मालिकों का दावा है कि उनकी संपत्ति के कुछ हिस्सों को गलत तरीके से बरसाती नाले के रूप में चिन्हित कर दिया गया है. एडवोकेट सुमित गहलोत और मंजू गहलोत ने अदालत में दलील दी कि उनके मुवक्किल अजय एस. श्रीराम, विक्रम एस. श्रीराम और अजीत एस. श्रीराम वेस्टएंड ग्रीन फार्म्स में 12 बीघा 14 बिस्वा (2.75 एकड़) जमीन के मालिक हैं. लेकिन अधिकारियों ने सीमांकन प्रक्रिया में उन्हें शामिल किए बिना ही कार्यवाही पूरी कर थी जबकि उनकी जमीन सीधे प्रभावित हो रही थी.
वकीलों ने दलील दी कि उनके क्लाइंट के पास रजिस्टर्ड डीड, खतौनी और स्वीकृत बिल्डिंग प्लान जैसे वैध दस्तावेज हैं. इसके बावजूद अधिकारियों ने मालिकाना हक की जांच किए बिना ही, सिर्फ अनुमान के आधार पर यह तय कर दिया था कि उनकी जमीन का एक हिस्सा नाले के क्षेत्र में आता है.
जस्टिस संजीव नरूला ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद फैसले में कहा कि जिन भू-स्वामियों की संपत्ति सीमांकन के दायरे में आने वाली जमीन से सटी हुई है, उन्हें इस प्रक्रिया से बाहर नहीं रखा जा सकता. अदालत ने साफ किया कि अंतिम फैसला लेने से पहले ऐसे व्यक्तियों को अपने दस्तावेज दिखाने और आपत्तियां पेश करने का मौका दिया जाना चाहिए.
यह विवाद पिछले साल 9 दिसंबर को डीडीए की तरफ से जारी एक नोटिस से शुरू हुआ था, जिसमें समालखा और रजोकरी गांवों के बीच नाले की जमीन के सीमांकन की बात कही गई थी. इस दौरान अधिकारियों ने मान लिया कि आसपास की निजी कृषि भूमि के कुछ हिस्से भी नाली क्षेत्र में आते हैं. इसी को लेकर विवाद अदालत में पहुंचा.
अदालत में बताया गया कि इसी तरह के अन्य मामलों में जमीन मालिकों को अधिकारियों के सामने दस्तावेज पेश करके अपनी बात रखने की इजाजत दी जा चुकी है. इस पर संज्ञान लेते हुए कोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ताओं को भी इसी तरह का मौका मिलना चाहिए. कोर्ट ने अब याचिकाकर्ताओं से कहा है कि वो 24 अप्रैल को डीडीए के डिप्टी डायरेक्टर (लैंड मैनेजमेंट) के सामने अपने सभी दस्तावेज लेकर पेश हों. अदालत ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि वो इन दस्तावेजों की छानबीन करें और उसके बाद कानून के मुताबिक आगे की प्रक्रिया शुरू करें.














