दिल्ली में बचे हैं सिर्फ 21,000 किसान, सरकार ने किया इनके लिए बड़ा ऐलान

दिल्ली में फिर से गेहूं की सरकारी खरीद होगी. 24 अप्रैल 2026 से दिल्ली के दो प्रमुख स्थानों, नरेला स्थित एफसीआई डिपो और नजफगढ़ मंडी में गेहूं की सरकारी खरीद होगी.

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दिल्ली में रबी विपणन सत्र 2026-27 में गेहूं खरीद होगी.

दूसरे राज्य की तरह अब दिल्ली में भी न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर गेहूं की सरकारी खरीद होगी. बीते 3 साल से सरकारी खरीद ठप पड़ी थी. हालांकि उससे पहले भी गेहूं की सरकारी खरीद सिर्फ नाम मात्र होती थी. दिल्ली में घटते किसान और खेती की जमीन के मद्देनजर गेहूं का उत्पादन घटा है. साथ ही किसानों का पंजीकरण कराने में तमाम औपचारिक कठिनाइयों के चलते किसान का गेहूं की सरकारी खरीद लगभग न के बराबर होती थी.

दिल्ली में फिर होगी गेहूं की सरकारी खरीद

अब दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने मंगलवार को ऐलान किया कि केंद्र सरकार ने दिल्ली में भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) के जरिए गेहूं की सरकारी खरीद फिर से शुरू करने का फैसला लिया है. इस फैसले से किसानों को उनकी फसल का न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) मिल सकेगा और स्थानीय कृषि व्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी. इस विषय पर मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने हाल ही में केंद्रीय उपभोक्ता मामले, खाद्य और सार्वजनिक वितरण मंत्री प्रल्हाद जोशी को पत्र लिखकर रबी विपणन सत्र में दिल्ली में एफसीआई के जरिए गेहूं खरीद तत्काल बहाल करने का अनुरोध किया था.

इस दिन से होगी गेहूं की खरीद

उन्होंने अपने पत्र में लिखा था कि दिल्ली में एफसीआई स्थानीय स्तर पर खरीद न होने के कारण किसानों को अपनी उपज एमएसपी से कम कीमत पर बेचने के लिए विवश होना पड़ रहा है, जिससे उनकी आय पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है. मुख्यमंत्री के इस आग्रह पर सकारात्मक रुख अपनाते हुए केंद्र सरकार ने एफसीआई को निर्देश जारी किए हैं कि रबी विपणन सत्र 2026-27 में दिल्ली में गेहूं खरीद की प्रक्रिया शुरू की जाए. इसके तहत 24 अप्रैल 2026 से दिल्ली में दो प्रमुख स्थानों, नरेला स्थित एफसीआई डिपो और नजफगढ़ मंडी में खरीद केंद्र संचालित किए जाएंगे, जिससे किसानों को उनके निकट ही अपनी उपज बेचने की सुविधा उपलब्ध हो सकेगी.

गेहूं की 3 साल बाद फिर शुरु होगी सरकारी खरीद 

मुख्यमंत्री कार्यालय के मुताबिक, 2021-22 के बाद दिल्ली में FCI की ओर से एमएसपी पर गेहूं की खरीद फिर से शुरू की जा रही है. राजधानी में लगभग 29 हजार हेक्टेयर भूमि पर कृषि होती है. प्रतिवर्ष लगभग 80 हजार मीट्रिक टन गेहूं का उत्पादन होता है, जो स्थानीय खपत से अधिक है और बाजार में बेचने के लिए उपलब्ध रहता है. इस पहल से दिल्ली के लगभग 21,000 किसानों को सीधा लाभ मिलने का अनुमान है. किसानों को अपनी उपज बेचने के लिए आधार कार्ड, भूमि अभिलेख की प्रति और बैंक पासबुक साथ लानी होगी. सरकार द्वारा गांव-वार खरीद कार्यक्रम शीघ्र जारी किया जाएगा. सरकार ने किसानों से अपील की है कि वे निर्धारित समय-सारिणी के अनुसार ही खरीद केंद्रों पर पहुंचें ताकि किसी प्रकार की असुविधा से बचा जा सके.

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