ED की जालंधर ज़ोनल टीम ने डिजिटल अरेस्ट ठगी से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में बड़ी कार्रवाई की है. इस मामले में ईडी ने अर्पित राठौर के ठिकानों पर छापेमारी की और सर्च के दौरान उसे गिरफ्तार कर लिया. तलाशी के दौरान ईडी को कई आपत्तिजनक दस्तावेज, डिजिटल डिवाइस और करीब 14 लाख रुपये की बेहिसाब नकदी बरामद हुई, जिसे जब्त कर लिया गया.
ईडी ने यह जांच लुधियाना के साइबर क्राइम थाने में दर्ज एफआईआर के आधार पर शुरू की थी. इसके अलावा इसी गिरोह से जुड़े डिजिटल अरेस्ट और साइबर ठगी के 9 और मामलों को भी जांच में शामिल किया गया. जांच में सामने आया है कि ठगों ने खुद को CBI अधिकारी बताकर उद्योगपति एस. पी. ओसवाल को डिजिटल अरेस्ट किया और उनसे करीब 7 करोड़ रुपये की ठगी की. इतना ही नहीं, इसी गिरोह ने अन्य लोगों से भी 1.73 करोड़ रुपये की साइबर ठगी को अंजाम दिया.
ईडी की जांच में खुलासा हुआ है कि ठगी की रकम को कई म्यूल बैंक अकाउंट्स के ज़रिए घुमाया गया. इस पूरे नेटवर्क में रूमी कलिता (गुवाहाटी) और अर्पित राठौर (कानपुर) की अहम भूमिका सामने आई है. रूमी कलिता ने अपने साथियों के साथ मिलकर Frozenman Warehousing and Logistics और Rigglo Ventures Pvt Ltd नाम की कंपनियों के खातों का इस्तेमाल कर ठगी की रकम को सफेद करने की कोशिश की.
नौ डिजिटल अरेस्ट मामलों की रकम Frozenman के खातों में और दो मामलों की रकम Rigglo Ventures के खातों में डाली गई, जिसके बाद इसे 200 से ज्यादा म्यूल अकाउंट्स में ट्रांसफर कर दिया गया. जांच में यह भी सामने आया है कि इन पैसों के ट्रांसफर की पूरी प्रक्रिया अर्पित राठौर के निर्देश पर की जाती थी। पीड़ितों से पैसा जमा होते ही रूमी कलिता को आगे ट्रांसफर करने के निर्देश दिए जाते थे.
ईडी के मुताबिक, अर्पित राठौर सिर्फ एस. पी. ओसवाल के डिजिटल अरेस्ट केस में ही नहीं, बल्कि कई अन्य साइबर ठगी मामलों में भी शामिल रहा है. उसके विदेशी अपराधियों से सीधे संपर्क थे. वह उन्हें म्यूल अकाउंट्स उपलब्ध कराता था और ठगी की रकम विदेश भेजने में मदद करता था. इसके बदले में उसे USDT क्रिप्टोकरेंसी और भारतीय रुपये में हिस्सा मिलता था.
इससे पहले 22 दिसंबर 2025 को भी इस मामले में तलाशी की गई थी और रूमी कलिता को 23 दिसंबर 2025 को गिरफ्तार किया गया था, जो फिलहाल ईडी की हिरासत में है. अर्पित राठौर को पहले कानपुर में ACJM कोर्ट के सामने पेश किया गया, जहां से उसे 2 दिन की ट्रांजिट रिमांड मिली. इसके बाद उसे जालंधर की स्पेशल कोर्ट में पेश किया गया, जहां कोर्ट ने 5 जनवरी 2026 तक ईडी कस्टडी मंजूर की है. ईडी का कहना है कि मामले की जांच अभी जारी है और आने वाले दिनों में और बड़े खुलासे हो सकते हैं.














