- ED ने व्यूनाउ ग्रुप से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में 19.10 करोड़ रुपये की संपत्ति अस्थायी रूप से अटैच की है
- जांच में पता चला कि क्लाउड पार्टिकल स्कैम में सेल एंड लीज बैक मॉडल दिखाकर निवेशकों को धोखा दिया गया था
- कुल 3700 करोड़ रुपये जुटाए गए थे, जिनमें से 1800 करोड़ रुपये किराये के नाम पर वापस किए गए थे
प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने व्यूनाउ ग्रुप से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए 19.10 करोड़ रुपये की संपत्ति को अस्थायी रूप से अटैच कर लिया है. ED ने यह कार्रवाई मनी लॉन्ड्रिंग कानून (PMLA) के तहत की है. पंजाब और नोएडा पुलिस की FIR के आधार पर ED ने जांच शुरू की थी. जांच में सामने आया कि व्यूनाउ ग्रुप के सीईओ और फाउंडर सुखविंदर सिंह खरौर हजारों करोड़ रुपये के 'क्लाउड पार्टिकल स्कैम' में शामिल थे.
जांच में क्या सामने आया?
जांच में पता चला कि क्लाउड पार्टिकल के नाम पर सेल एंड लीज बैक (SLB) मॉडल दिखाया गया, लेकिन असल में यह कारोबार मौजूद ही नहीं था या फिर उसे बढ़ा-चढ़ाकर दिखाया गया. निवेशकों को किराये के नाम पर पैसे लौटाने का दावा किया गया, जबकि डेटा सेंटर से कोई खास कमाई नहीं हो रही थी. पूरा सिस्टम पैसे घुमाने (मनी रोटेशन) का खेल निकला.
ED के मुताबिक, निवेशकों से करीब 3700 करोड़ रुपये जुटाए गए. इसमें से लगभग 1800 करोड़ रुपये रेंट के नाम पर वापस किए गए, जबकि बाकी पैसा यानी प्रोसीड्स ऑफ क्राइम को दूसरे कामों में लगाया गया. यह रकम भारी कमीशन, महंगी गाड़ियां, सोना-हीरे, शेल कंपनियों के जरिए फंड ट्रांसफर और प्रॉपर्टी में निवेश में खर्च की गई.
19 करोड़ से ज्यादा की संपत्ति अटैच
ताज़ा कार्रवाई में 19.10 करोड़ रुपये की संपत्ति चिन्हित की गई है, जिसमें जमीन-जायदाद, फिक्स्ड डिपॉजिट और शेयर होल्डिंग शामिल हैं. ये संपत्तियां सुखविंदर सिंह खरौर, व्यूनाउ इन्फोटेक प्राइवेट लिमिटेड, नितिन श्रीवास्तव और उनकी पत्नी रुचि श्रीवास्तव, और कंपनी के अकाउंटेंट विजय झा के परिवार के नाम पाई गई हैं. शेयर होल्डिंग सुखविंदर सिंह खरौर और डिंपल खरौर के नाम पर है.
इस मामले में अब तक क्या-क्या हुआ?
इस केस में सुखविंदर सिंह खरौर और डिंपल खरौर को 28 फरवरी 2025 को, जबकि आरिफ निसार को 24 फरवरी 2025 को गिरफ्तार किया गया था. फिलहाल सभी न्यायिक हिरासत में हैं. ED ने इनके खिलाफ 24 अप्रैल 2025 को PMLA की विशेष अदालत में चार्जशीट भी दाखिल कर दी है. ED इससे पहले 6 फरवरी 2025 को 178.12 करोड़ रुपये की संपत्ति अटैच कर चुकी है. इसके अलावा 14 अगस्त 2025 को हुई छापेमारी में 73.72 करोड़ रुपये फ्रीज किए गए थे.














