- दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने अंतरराष्ट्रीय हथियार तस्करी गिरोह के नौ मुख्य सदस्यों को गिरफ्तार किया है
- गिरोह पाकिस्तान से तुर्की निर्मित हथियारों को नेपाल बॉर्डर के रास्ते भारत में स्मगल करता था
- गिरफ्तार आरोपियों के पास से 23 विदेशी पिस्तौल, सेमी-ऑटोमैटिक हथियार और 92 जिंदा कारतूस बरामद हुए
दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ईस्टर्न रेंज ने उत्तर भारत में सक्रिय एक बड़े अंतरराष्ट्रीय हथियार तस्करी गिरोह को जड़ से उखाड़ फेंकने में सफलता हासिल की है. 15 दिनों तक चले लंबे ऑपरेशन में पुलिस ने 9 मुख्य गुर्गों को गिरफ्तार किया है और उनके पास से 23 अत्याधुनिक हथियार विदेशी पिस्तौल और सेमी-ऑटोमैटिक और 92 जिंदा कारतूस बरामद किए. एडिशनल सीपी स्पेशल सेल प्रमोद कुशवाहा ने बताया कि स्पेशल सेल की टीम को खुफिया जानकारी मिली थी कि शाहबाज अंसारी (जो एक NIA केस में पैरोल जंप कर फरार है) और उसका चाचा रेहान अंसारी जेल के बाहर से एक बड़ा हथियार सिंडिकेट चला रहे हैं. ये लोग पाकिस्तान से हथियार मंगवाते थे, जो नेपाल बॉर्डर के रास्ते भारत (दिल्ली-एनसीआर और यूपी) में सप्लाई किए जाते थे.
इस ऑपरेशन में क्राइम ब्रांच ने कुल 9 लोगों को पकड़ा है, जो दिल्ली और उत्तर प्रदेश के अलग-अलग इलाकों से गिरफ्तार हुए. क्राइम ब्रांच ने इन लोगों से 18 सेमी-ऑटोमैटिक पिस्तौल जिसमें विदेशी पिस्तौल भी शामिल है. 02 देसी शॉटगन, 03 देसी कट्टे और हथियार ठीक करने के औजार बरामद किए हैं. अपराधी पुलिस से बचने के लिए एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग एप्स (जैसे सिग्नल या व्हाट्सएप के गुप्त तरीके) का इस्तेमाल करते थे.
14 से 24 अप्रैल तक स्पेशल सेल के ऑपरेशन की डिटेल्स-
14 अप्रैल: स्पेशल सेल ने दिल्ली के उस्मानपुर से फरदीन नाम के लड़के को पकड़ा, जिससे एक पिस्तौल मिली. पूछताछ में उसने जेल में बंद वसीम मलिक का नाम लिया. इसके बाद वसीम के भतीजे वसीक को शास्त्री पार्क से गिरफ्तार किया.
16 अप्रैल: रोहिणी जेल में बंद वसीम मलिक को रिमांड पर लिया. उसने बताया कि शाहबाज और रेहान के रिश्तेदार (राहिल और इमरान) विदेशी हथियार दिलवाते थे.
17-20 अप्रैल: फिर आगे कार्यवाई करते हुए स्पेशल सेल ने यूपी के खुर्जा से अमन उर्फ अभिषेक, लोनी से आदिल और जौनपुर से मो. अहमद को दबोचा. इस कार्यवाई में अहमद के पास से सबसे ज्यादा 12 पिस्तौल मिलीं.
23-24 अप्रैल: गिरोह के अहम सदस्य राहिल को अजमेरी गेट और इमरान को सिकंदराबाद, यूपी से पकड़ा गया. अंत में आजमगढ़ के विशाल को गिरफ्तार किया, जो पूर्वी यूपी के बदमाशों को हथियार बांटता था.
इस पूरे गैंग के मास्टरमाइंड शाहबाज और रेहान अंसारी हैं, शाहबाज फिलहाल फरार है.
एडिशनल कमिश्नर स्पेशल सेल प्रमोद सिंह कुशवाहा ने बताया कि वसीम मलिक दिल्ली के तुर्कमान गेट का रहने वाला एक पुराना अपराधी है, जिस पर हत्या और डकैती के कई मामले दर्ज हैं. वहीं राहिल और इमरान, दोनों मुख्य आरोपी शाहबाज के रिश्तेदार हैं. राहिल दिल्ली में डीलिंग संभालता था, जबकि इमरान नेपाल बॉर्डर के जरिए हथियारों की तस्करी में माहिर है. इसके अलावा मोहम्मद अहमद, मुंगेर (बिहार) से भी हथियार मंगवाता था और उन्हें दिल्ली‑यूपी में सप्लाई करता था. एडिशनल कमिश्नर के मुताबिक पुलिस अब उन अंतरराष्ट्रीय रास्तों की जांच कर रही है, जिनके जरिए ये हथियार भारत की सीमा में दाखिल हो रहे थे.
नेपाल के रास्ते स्मगल हो रहे थे हथियार
स्पेशल सेल की जांच में सामने आया है कि यह गैंग बेहद शातिर और संगठित तरीके से काम करता था. यह सिंडिकेट विदेशी हथियारों (मेड इन तुर्की और अन्य) को पाकिस्तान से सोर्स करता था. इसके लिए ड्रोन का इस्तेमाल किया जाता था और हथियारों को नेपाल बॉर्डर के रास्ते भारत में स्मगल किया जाता था. पुलिस की निगरानी से बचने के लिए गिरोह के सदस्य सामान्य फोन कॉल का इस्तेमाल नहीं करते थे, बल्कि एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग प्लेटफॉर्म जैसे सिग्नल या व्हाट्सएप के जरिए बातचीत करते थे, ताकि उनकी चैट और कम्युनिकेशन ट्रैक न हो सके. सिंडिकेट में काम पूरी तरह बंटा हुआ था. जांच के मुताबिक शाहबाज अंसारी इस गैंग का मुख्य हैंडलर था, जबकि रेहान अंसारी लॉजिस्टिक्स, पैसों का लेन‑देन और आपसी तालमेल संभालता था. निचले स्तर के गुर्गों को केवल हथियारों की डिलीवरी और उन्हें सुरक्षित छिपाने का काम सौंपा जाता था.
हथियारों को कैसे पहुंचाया जाता था एक से दूसरे राज्य तक
यह गिरोह न सिर्फ विदेशी हथियार लाता था, बल्कि बिहार के मुंगेर से हथियार मंगवाकर दिल्ली‑एनसीआर में सप्लाई करता था. बदले में विदेशी हथियार पूर्वी उत्तर प्रदेश के अपराधियों तक पहुंचाए जाते थे. स्पेशल सेल ने इस मामले में कुल 9 लोगों को गिरफ्तार किया है. वसीम मलिक, तुर्कमान गेट, दिल्ली का निवासी है। यह 8वीं तक पढ़ा है और 2008 से अपराध की दुनिया में सक्रिय है। इसके खिलाफ हत्या (302 IPC) और डकैती जैसे संगीन मामलों सहित आधा दर्जन से ज्यादा एफआईआर दर्ज हैं. जेल में रहने के दौरान इसका संपर्क शाहबाज अंसारी से हुआ. यह विदेशी हथियारों की खेप रिसीव करता था और दिल्ली के गैंग्स में हथियार बांटता था.
अरोपियों का प्रोफाइल
राहिल (37 वर्ष), अजमेरी गेट, दिल्ली का रहने वाला और शाहबाज का चचेरा भाई है. यह दिल्ली‑एनसीआर में गिरोह का मुख्य एक्टिव मेंबर था और वसीम को विदेशी हथियारों के साथ‑साथ सुरक्षित संचार के लिए मोबाइल‑सिम उपलब्ध कराता था. इमरान (37 वर्ष), सिकंदराबाद, उत्तर प्रदेश का निवासी और शाहबाज का जीजा है. इसका मुख्य काम इंडो‑नेपाल बॉर्डर के जरिए हथियारों की तस्करी को अंजाम देना था. मोहम्मद अहमद, जौनपुर, उत्तर प्रदेश का रहने वाला है और मोबाइल रिपेयरिंग का काम जानता था. इसके पास से सबसे ज्यादा 12 पिस्तौलें और हथियार ठीक करने की टूलकिट बरामद की गई है. यह मुंगेर के हथियार दिल्ली भेजता था और वहां से विदेशी पिस्तौल लेकर पूर्वी उत्तर प्रदेश में बेचता था. इसके खिलाफ 8 आपराधिक मामले दर्ज हैं.
वसीक, वसीम मलिक का भतीजा है. यह बी.कॉम ड्रॉपआउट है और यूट्यूब चैनल चलाने का शौकीन है. जब वसीम जेल गया, तब हथियारों की खेप को ठिकाने लगाने और सुरक्षित छिपाने की जिम्मेदारी इसी की थी. गिरफ्तारी के वक्त यह हथियारों से भरा कट्टा यमुना खादर में छिपाने जा रहा था. फरदीन (22 वर्ष), वसीम मलिक की इलेक्ट्रॉनिक्स दुकान पर सेल्समैन था. वसीम ने इसे आसान पैसा कमाने का लालच देकर हथियारों की सप्लाई के काम में लगा दिया. अमन उर्फ अभिषेक (38 वर्ष), खुर्जा का रहने वाला है। यह वसीम के साथ जेल में रहा और उससे हथियार लेकर आगे सप्लाई करता था. आदिल (23 वर्ष), बैंक धोखाधड़ी के एक मामले में जेल जा चुका है और इसने फरदीन से हथियार खरीदे थे.
विशाल (32 वर्ष), आजमगढ़ का रहने वाला है. जेल में इसकी दोस्ती अहमद से हुई थी और अब यह पूर्वी उत्तर प्रदेश के गैंगस्टरों को विदेशी हथियार मुहैया करा रहा था. स्पेशल सेल के मुताबिक इस गैंग के मुख्य सरगना शाहबाज अंसारी और रेहान अंसारी अभी फरार हैं और उनकी तलाश जारी है.














