- द्वारका कोर्ट ने हत्या मामले में दो आरोपियों की पुलिस कस्टडी को वैध मानते हुए उन्हें दो दिन की हिरासत में भेजा
- महिला आरोपी अन्नू यादव की गिरफ्तारी को पुलिस द्वारा कानूनी प्रक्रिया न अपनाने के कारण अवैध घोषित किया गया है
- अदालत ने अन्नू यादव की गिरफ्तारी का समय पुलिस रिकॉर्ड से अलग पाते हुए उन्हें तुरंत रिहा करने का आदेश दिया है
दिल्ली के द्वारका कोर्ट ने हत्या के एक मामले में अहम फैसला सुनाया है. 16 मार्च 2026 को ड्यूटी जेएमएफसी हर्षल नेगी ने इस मामले में सुनवाई करते हुए पुलिस रिमांड और गिरफ्तारी की वैधता को लेकर महत्वपूर्ण आदेश दिया. इस मामले में सुमन यादव, विक्रम यादव और अन्नू यादव को कोर्ट में पेश किया गया था. सुनवाई के दौरान अदालत ने दो आरोपियों को पुलिस कस्टडी में भेज दिया, जबकि महिला आरोपी अन्नू यादव की गिरफ्तारी को पूरी तरह अवैध करार देते हुए उन्हें तुरंत रिहा करने का आदेश दिया.
दो आरोपियों की पुलिस कस्टडी
कोर्ट ने सुमन यादव और विक्रम यादव के मामले में पुलिस की दलीलों को सही मानते हुए दोनों को 2 दिन की पुलिस कस्टडी में भेज दिया है. जांच अधिकारी के मुताबिक, मामले में अभी कई अहम सबूतों की बरामदगी बाकी है, जिनमें घटनास्थल का CCTV DVR और वारदात में इस्तेमाल हथियार शामिल हैं. इसके अलावा दो सह‑आरोपी शकुंतला और वैशाली अभी फरार हैं, जिनकी तलाश की जा रही है. अदालत ने दोनों आरोपियों को 18 मार्च 2026 को दोबारा पेश करने का निर्देश दिया है.
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अन्नू यादव की गिरफ्तारी पर कोर्ट का सख्त रुख
इस पूरे मामले में बड़ा मोड़ तब आया जब अन्नू यादव की गिरफ्तारी को लेकर कोर्ट ने पुलिस की कार्रवाई पर सख्त रुख अपनाया. बचाव पक्ष के वकील राहुल यादव ने कोर्ट में एक पेनड्राइव पेश की, जिसमें CCTV फुटेज के जरिए दिखाया गया कि पुलिस 15 मार्च की रात 11:58 बजे अन्नू यादव को अपने साथ ले गई थी.
CCTV फुटेज ने बदली तस्वीर
कोर्ट में वीडियो चलाया गया, जिसमें समय 15 मार्च रात 11:58 बजे दिख रहा था. इस फुटेज में कुल 5 लोग नजर आ रहे हैं. एक पुलिस की वर्दी में, अन्नू यादव, उनके पति और देवर, तथा एक महिला पुलिसकर्मी सिविल कपड़ों में. ये वीडियो देखने के बाद पहली नजर में कोर्ट को लगा कि अन्नू यादव को 15 मार्च की रात ही हिरासत में ले लिया गया था.
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पुलिस रिकॉर्ड से टकराव
कोर्ट ने पाया कि पुलिस रिकॉर्ड यानी अरेस्ट मीमो में अन्नू यादव की गिरफ्तारी का समय 16 मार्च सुबह 09:40 बजे दर्ज है. CCTV फुटेज और गिरफ्तारी मेमो के बीच इस विरोधाभास ने पूरे मामले की दिशा बदल दी.
कानून उल्लंघन पर कोर्ट की टिप्पणी
सुनवाई के दौरान यह भी सामने आया कि पुलिस ने रात के समय महिला आरोपी की गिरफ्तारी के लिए मजिस्ट्रेट से कोई पूर्व अनुमति नहीं ली थी. कोर्ट ने इसे कानून का सीधा उल्लंघन मानते हुए कहा कि BNSS की धारा 43 के तहत सूर्यास्त के बाद महिला की गिरफ्तारी के लिए विशेष प्रक्रिया का पालन अनिवार्य है.
गिरफ्तारी अवैध घोषित
इन्हीं आधारों पर अदालत ने अन्नू यादव की गिरफ्तारी को अवैध और शून्य (Illegal and Non‑est) घोषित करते हुए उन्हें तुरंत रिहा करने का आदेश दिया.
तकनीकी आधार पर राहत
कोर्ट ने स्पष्ट किया कि अन्नू यादव को मिली राहत केवल तकनीकी आधार पर है और इसका मतलब यह नहीं है कि उन्हें मामले में क्लीन चिट मिल गई है. अदालत ने कहा कि जांच अधिकारी कानून के मुताबिक सही प्रक्रिया अपनाकर आगे की कार्रवाई कर सकते हैं.
क्या है पूरा मामला
दरअसल 15 मार्च को छावला इलाके में संपत्ति विवाद को लेकर विक्रम, उसकी पत्नी सुमन और बेटी अन्नू का विक्रम की बहन ललिता यादव से झगड़ा हो गया था। इस झगड़े और मारपीट में सुमन और ललिता दोनों घायल हो गई थीं। बाद में ललिता की मौत हो गई थी. द्वारका कोर्ट का यह फैसला एक बार फिर यह दर्शाता है कि कानूनी प्रक्रिया का पालन कितना जरूरी है. एक तरफ पुलिस को जांच के लिए रिमांड मिला, तो दूसरी तरफ प्रक्रिया में चूक के कारण एक गिरफ्तारी को अवैध करार दे दिया गया.














