India V/S New Zealand: टीम इंडिया न्यूजीलैंड के खिलाफ खेली जा रही पांच मैचों की टी20 सीरीज गुवाहाटी में ही अपने नाम कर चुकी है. यहां से अगले महीने टी20 विश्व कप (T20 World Cup 2026) से पहले टीम सूर्यकुमार यादव (Surykumar Yadav) के पास तमाम 'बाकी बचे पत्ते' दुरुस्त करने के लिए सिर्फ दो ही मैच बाकी बचे हैं. मतलब चौथा और पांचवां टी20. और इससे पहले सबसे ऊपर है फाइनल XI को अंतिम रूप देना. लगभग सभी बॉक्स टिक हो चुके हैं, लेकिन कुछ अहम बाकी हैं. और इन्हीं में से एक है संजू सैमसन (Sanju Samson), जिनकी शुरुआती तीनों मैचों में बुरी नाकामी ने पूर्व दिग्गजों और मीडिया को सवाल खड़े करने पर मजबूर कर दिया है. और विशापट्टम में खेलने जाने वाले चौथे टी20 मैच से पहले इसी सवाल को लेकर सबसे ज्यादा चर्चा बनी हुई है. और अगर इस सवाल का जवाव नहीं मिला, तो मैच दर मैच दिन दर दिन इस चर्चा का स्तर लगातार ऊपर ही जाएगा.
बैक-अप के तौर पर आए थे ईशान
जब भारत की टी20 विश्व कप टीम का ऐलान हुआ था, तब ईशान किशन को संजू सैमसन के बैक‑अप के तौर पर चुना गया था, लेकिन अब ईशान के तफानी प्रदर्शन ने फाइनल XI के समीकरण में संजू से आगे ला खड़ा किया है. इस सीरीज से पहले ईशान ने आखिरी बार देश के लिए 2023 में टी20 अंतरराष्ट्रीय मैच खेला था. उनका चयन इसलिए हुआ क्योंकि चयनकर्ताओं ने आखिरी वक्त पर टीम संयोजन में बदलाव करने का फैसला लिया था.
इशान ने इस पारी से बदल दिया समीकरण!
इसके बाद हालात काफी बदल गए. तिलक वर्मा की अचानक हुई चोट ने किशन को न्यूजीलैंड के खिलाफ नंबर‑3 पर बल्लेबाजी करने का मौका दिया और उन्होंने इसे दोनों हाथों से लपक लिया. दूसरे टी20 मैच में उन्होंने 32 गेंदों पर 76 रन की तूफानी पारी खेली, जबकि तीसरे मैच में 13 गेंदों पर 28 रन बनाए. वहीं, सैमसन पहले तीन टी20 मैचों में क्रमशः 10, 6 और 0 रन ही बना सके. इसके बाद यह बहस शुरू हो गई है कि जब तिलक वर्मा फिट होकर लौटेंगे तो क्या किशन को अंतिम एकादश में सैमसन की जगह मिलनी चाहिए?
तिलक की चोट, सैमसन को वरदान!
अगर तिलक की चोट ने किशन के लिए दरवाजा खोला, तो उनकी रिकवरी में हो रही देरी ने सैमसन को एक तरह से जीवनदान दे दिया है. अगर तिलक पूरी तरह फिट होते, तो सैमसन की चौथे और पांचवें टी20 में जगह नहीं ही बनती थी. और एक बार को प्रबंधन उन्हें खिलाता भी नहीं. लेकिन अब जबकि तिलक सर्जरी के बाद प्रक्रिया से उबरने में जुटे हैं, तो सैमसन को खिलाना प्रबंधन का फैसला कम, मजबूरी ज्यााद हो चला है, लेकिन ये आखिरी दो मैच संजू के लिए वरदान की तरह हैं. उनके पास दो पारियां है. अगर एक पारी से इशान सारे समीकरण बदल सकते हैं, तो संजू दो पारियों से आलोचकों के सवालों को जमींदोज कर अपने पहले विकेटीपर-ओपनर के दावे पर पुख्ता मुहर लगा सकते हैं.
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