600 से ज्यादा पन्नों के फैसले को महज 5 मिनट में खारिज कर दिया...हाईकोर्ट में केजरीवाल की दलील

एक्साइज केस में अरविंद केजरीवाल की रेस्क्यूज़ल एप्लीकेशन पर सुनवाई हुई. केजरीवाल ने कोर्ट के सामने खुद जिरह करते हुए निष्पक्ष सुनवाई को लेकर संदेह जताया और कहा कि लोअर कोर्ट के 600 से ज्यादा पन्नों के फैसले को बिना पूरा मौका दिए पलटा गया. उन्होंने CBI‑ED की भूमिका और कोर्ट के फैसलों की भाषा पर भी सवाल उठाए.

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केजरीवाल ने गिनाए 10 कारण, क्यों उन्हें संदेह
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  • दिल्ली शराब नीति केस में हाई कोर्ट ने अरविंद केजरीवाल की रेस्क्यूज़ल एप्लीकेशन स्वीकार कर सुनवाई की अनुमति दी
  • केजरीवाल ने आरोप लगाया कि बिना दूसरे पक्ष को सुने 600 से ज्यादा पन्नों के फैसले को महज पांच मिनट में खारिज
  • सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हवाला देते हुए जज से इस मामले से अलग होने और CBI को पार्टी न बनाने की मांग की
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दिल्ली शराब नीति मामले में आज हाई कोर्ट में सुनवाई हुई. कोर्ट ने अरविंद केजरीवाल की रेस्क्यूज़ल एप्लीकेशन को स्वीकार कर लिया, जिसके बाद केजरीवाल ने इस एप्लीकेशन पर खुद जिरह की.  सुनवाई के दौरान कोर्ट में कई अहम टिप्पणियां और सवाल‑जवाब देखने को मिले. जिरह की शुरुआत में केजरीवाल ने कहा कि व्यक्तिगत तौर पर मैं आपकी इज्जत करता हूम. इस पर जज ने जवाब दिया कि हम भी आपकी इज्जत करते हैं. वहीं तुषार मेहता ने कहा कि इसमें पर्सनल कुछ नहीं है.

लोअर कोर्ट के फैसले का जिक्र और कोर्ट की टिप्पणी

सुनवाई के दौरान केजरीवाल ने कहा कि वह लोअर कोर्ट के ऑर्डर के फैसले की दो लाइन पढ़ना चाहते हैं. इस पर जज ने कहा कि आप एप्लीकेशन पर बात करें. केजरीवाल ने कहा, “आप मुझे मौका दीजिए. ” इसके बाद जज ने केजरीवाल के वकील को टोका और कहा कि वे केजरीवाल की सहायता नहीं करेंगे. जज ने कहा कि आप सीधे रेस्क्यूज़ल एप्लीकेशन पर ही बात करें. इसके बाद कोर्ट ने केजरीवाल को लोअर कोर्ट का फैसला पढ़ने का मौका दिया, जिस पर केजरीवाल ने कहा कि लोअर कोर्ट ने उन्हें बरी कर दिया था.

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पहली सुनवाई, नोटिस और हाईकोर्ट पर सवाल

केजरीवाल ने कहा कि 9 मार्च को कोर्ट में पहली सुनवाई हुई थी, जिसमें सीबीआई के अलावा कोई पार्टी मौजूद नहीं थी. उन्होंने कहा कि दूसरे पक्ष को सुने बिना ही हाईकोर्ट ने नोटिस जारी कर दिया. केजरीवाल ने आरोप लगाया कि लोअर कोर्ट के 600 से ज्यादा पन्नों के फैसले को इस कोर्ट ने महज 5 मिनट में खारिज कर दिया. इसके बाद उन्होंने बताया कि कोर्ट का फैसला आने के बाद उन्होंने हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस को पत्र लिखा, जिसमें जवाब मिला कि एक बार केस देने के बाद संबंधित जज ही खुद केस से अलग होने का फैसला कर सकते हैं.

सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हवाला, जज से अलग होने की मांग

केजरीवाल ने कोर्ट में सुप्रीम कोर्ट के ‘रणजीत ठाकुर बनाम भारत सरकार' फैसले को कोट किया. उन्होंने इसी फैसले का हवाला देते हुए खुद जज से इस केस से अलग होने की मांग की. केजरीवाल ने कहा कि उनकी रिक्वेस्ट है कि इस केस में CBI को पार्टी नहीं बनाया जाना चाहिए. उन्होंने सत्येंद्र जैन के केस का भी जिक्र किया और कहा कि कई दिनों की सुनवाई के बाद अचानक ED ने विरोध किया, जिसके बाद एजेंसी लोअर कोर्ट का फैसला लेकर कोर्ट पहुंची और ED को राहत मिल गई.

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10 पॉइंट्स में निष्पक्ष सुनवाई पर संदेह

अरविंद केजरीवाल ने अपनी जिरह पूरी करने के बाद कोर्ट के सामने 10 पॉइंट्स रखे, जिनमें उन्होंने बताया कि आखिर उन्हें क्यों लगता है कि इस मामले में निष्पक्ष सुनवाई नहीं होगी. केजरीवाल ने कहा कि इस कोर्ट के सामने अब तक 5 केस आ चुके हैं. अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया और तीन अन्य लोगों के मामले. उन्होंने कहा कि उनका केस गिरफ्तारी को चुनौती देने वाला था, लेकिन इस कोर्ट ने सिर्फ दो सुनवाइयों में फैसला सुना दिया, जबकि उस समय कोई चार्जशीट दाखिल नहीं हुई थी.

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फैसले की भाषा, CBI‑ED और बायस को लेकर आरोप

केजरीवाल ने कहा कि कोर्ट ने अपने फैसले में कहा था कि शराब घोटाले का पैसा गोवा चुनाव में आम आदमी पार्टी ने खर्च किया. उन्होंने कहा कि शराब मामले में CBI और ED द्वारा कोई जब्ती न दिखाए जाने के बावजूद कोर्ट ने इसे नजरअंदाज किया और उन्हें आरोपी साबित कर दिया गया. इस पर जज ने कहा, “यह आपकी सोच थी.” केजरीवाल ने कहा कि ट्रायल कोर्ट ने लंबी सुनवाई के बाद इन सभी आरोपों को खारिज कर दिया था और गोवा में कोई फैसला नहीं ले जाया गया. यहां जज ने केजरीवाल को टोका और कहा कि वे बार‑बार ट्रायल कोर्ट के फैसले का जिक्र कर रहे हैं, और यह कोर्ट लोअर कोर्ट से बड़ा कोर्ट है.

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ED को राहत, जल्दबाजी और भाषा पर सवाल

केजरीवाल ने कहा कि CBI के पास इस केस में कुछ नहीं है, उनके पास सिर्फ अप्रोवर है और उसे सपोर्ट करने के लिए कुछ नहीं है. उन्होंने कहा कि 10‑15 मिनट के फैसले में इस कोर्ट ने तीन महीने के लोअर कोर्ट के फैसले पर सवाल खड़ा कर दिया. केजरीवाल ने कहा कि यह CBI का केस था, ED का इसमें कोई लेना‑देना नहीं था, फिर भी ED ने सिर्फ एक ओरल प्रेयर की और उसे फैसले में शामिल कर लिया गया. उन्होंने कहा कि कोर्ट ED को रिलीफ देने में बहुत जेनेरस रही, जबकि ED ने खुद दो दिन बाद एप्लीकेशन दायर की थी.

विचारधारा, RSS इवेंट और संदेह

केजरीवाल ने कहा कि एक RSS से जुड़ा वकीलों का संगठन है, जिसके इवेंट में जज चार बार शामिल हुई थीं. उन्होंने कहा कि उनकी लड़ाई इस विचारधारा के खिलाफ है, और चूंकि वह अपोजिट विचारधारा से हैं, इसलिए उनके मन में कोर्ट को लेकर संदेह है. जज ने इस पर इवेंट से जुड़ा लिंक मांगा और पूछा कि क्या उस दौरान कोई राजनीतिक बयान दिया गया था, जिस पर केजरीवाल ने कहा कि इवेंट में जाने से ही कोर्ट को लेकर संदेह होता है.

अमित शाह के बयान और सोशल मीडिया संदर्भ

केजरीवाल ने कहा कि कुछ दिनों पहले गृह मंत्री अमित शाह ने कहा था कि हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट जाना होगा, जिससे उन्हें लगता है कि यह कोर्ट उन्हें न्याय नहीं देगा. उन्होंने सोशल मीडिया पर जज के बेटे और बेटी को लेकर उठ रहे सवालों का भी जिक्र किया और कहा कि उन्हें लगता है कि यह कोर्ट उन्हें न्याय नहीं देगा. इस बयान पर तुषार मेहता ने आपत्ति जताई.

सुनवाई के दौरान केजरीवाल के वकील को बार‑बार टोकने पर जज ने फटकार लगाई और कहा, “Don't stare at me.” केजरीवाल ने कहा कि अब तक इस कोर्ट के सामने आए पाँचों मामलों में CBI और ED की सभी अपीलें मान ली गईं और फैसले उनके पक्ष में आए. अंत में केजरीवाल ने अपने 10 पॉइंट्स पूरे किए। अब इस मामले में अन्य आरोपियों के वकील अपना पक्ष रख रहे हैं.

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