- दिल्ली में पिछले 16 दिनों से AQI बहुत खराब श्रेणी में बना हुआ है और प्रदूषण लगातार बढ़ रहा है
- राजधानी के नरेला, नेहरू नगर, द्वारका सेक्टर आठ और बवाना इलाकों में हवा सबसे अधिक जहरीली मापी गई है
- वाहनों से निकलने वाले प्रदूषण का दिल्ली में औसतन 18 प्रतिशत और पराली जलाने का लगभग 1.5% योगदान रहता है
दिल्ली के लोग अब हर सुबह सिर्फ सूरज का इंतजार नहीं करते बल्कि साफ हवा की भी बाट जोह रहे होते हैं. मगर पिछले 16 दिनों से हर दिन के साथ यह इंतजार लंबा होता जा रहा है. हर दिन शहर की फिज़ा में घुलता ज़हर और गहराता धुंध का पर्दा, राजधानी को एक गैस चैंबर में तब्दील कर रहा है. 29 नवंबर की सुबह 6:05 बजे दिल्ली का औसत AQI 341 दर्ज हुआ, जो ‘बहुत खराब' श्रेणी में आता है. परेशानी का सबब ये है कि अगले सप्ताह भी राजधानीवासियों को जहरीली हवा से कोई राहत मिलने की उम्मीद नहीं है.
दिल्ली के किस इलाके की हवा आज सबसे जहरीली-:
| इलाका | AQI |
| नरेला | 387 |
| नेहरू नगर | 386 |
| द्वारका सेक्टर 8 | 370 |
| बवाना | 367 |
| जहांगीरपुरी | 365 |
| पूसा | 364 |
| पंजाबी बाग | 359 |
| डीटीयू | 359 |
| आनंद विहार | 358 |
| चांदनी चौक | 356 |
दिल्ली में क्यों बढ़ रहा प्रदूषण
आने वाले सप्ताह में वायु गुणवत्ता ‘बहुत खराब' श्रेणी में ही रहने के आसार हैं. पुणे स्थित भारतीय उष्णदेशीय मौसम विज्ञान संस्थान ने अनुमान जताया कि शुक्रवार को दिल्ली के प्रदूषण में वाहनों से होने वाले उत्सर्जन का योगदान 18 प्रतिशत रहा. पड़ोसी सोनीपत में यह 8.7 प्रतिशत, करनाल में 3.9 प्रतिशत और पानीपत में 6.9 प्रतिशत था. इसके अनुसार, पराली जलाने का योगदान 1.2 प्रतिशत रहा. शनिवार को राष्ट्रीय राजधानी के प्रदूषण में वाहनों से निकलने वाले उत्सर्जन का योगदान 18.4 प्रतिशत और पराली जलाने का योगदान 1.7 प्रतिशत रह सकता है.
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दिल्ली में बढ़ने लगी ठंड
इस बीच, दिल्ली और आसपास के शहरों में चल रही ठंडी हवाएं संकट को और बढ़ा रही हैं. कम तापमान, कोहरा और ज्यादा प्रदूषण लोगों की सेहत के लिए खराब कर रहे हैं. दिल्ली-एनसीआर और उत्तर भारत के कई शहरों में तापमान कम से कम 8 से 12 डिग्री सेल्सियस तक गिर गया है. सुबह से ही शहर में धुंध की एक मोटी परत छाई हुई थी और शाम को यह वापस आ गई, जिससे सड़कों पर विजिबिलिटी काफी कम हो गई.
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जहरीली हवा से सांसों पर संकट
डॉक्टरों ने चेतावनी दी है कि ऐसी प्रदूषित हवा में सांस लेने के गंभीर नतीजे हो सकते हैं, खासकर बच्चों, बुजुर्गों और सांस या दिल की बीमारियों वाले लोगों के लिए. वे लोगों को सलाह देते हैं कि वे जितना हो सके घर के अंदर रहें. ज्यादा मेहनत वाली बाहरी एक्टिविटीज से बचें और सिर्फ जरूरी होने पर ही घर से निकलें.














