नक्सल मुक्त भारत का ऐलान, पर टॉप लीडर गणपति, मिशिर बेसरा और रूपी अब भी अंडर ग्राउंड, इनका क्या होगा?

नक्सल मुक्त भारत के ऐलान के बीच एक-एक करोड़ के इनामी नक्सली टॉप लीडर गणपति और मिशिर बेसरा अब भी अंडरग्राउंड हैं. इनके अलावा नक्सल कमांडर हेमला बेच्चा, सोढ़ी केशा, महिला नक्सल लीडर रूपी की भी अब तक पकड़ से दूर हैं. जानिए, इनके बारे में क्या चर्चा है.

विज्ञापन
Read Time: 3 mins
नक्सल मुक्त भारत के ऐलान के बीच कई नक्सली अब भी गिरफ्तार से दूर. (एआई फोटो)

नक्सल मुक्त भारत का ऐलान हो गया है. लेकिन, इस सब के बीच कुछ बड़े नक्सलियों के नाम अब भी चर्चा हैं, इनमें एक करोड़ का इनामी टॉप लीडर गणपति, एक करोड़ का इनामी मिशिर बेसरा और महिला नक्सली रूपी, कोसा, बेच्चा, चंदर शामिल हैं. ये अब भी अंडर ग्राउंड हैं, इनकी न तो गिरफ्तारी हो सकी है और न ही इन्होंने हथियार डाले हैं. ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर ये खूंखार माओवादी कहां हैं, इनका क्या होगा? आइए, विस्तार से जानते हैं, इनके बारे में क्या चर्चा है.  

एक अनुमान के अनुसार, छत्तीसगढ़ में सशस्त्र नक्सलियों की संख्या 25 के भीतर ही सिमट गई है. इनमें तीन बड़े लीडर ही बचे हैं. 78 साल का मोपल्ला लक्ष्मण राव उर्फ गणपति माओवाद संगठन का पूर्व महासचिव, पोलित ब्यूरो सदस्य है. उस पर एक करोड़ रुपये से अधिक का इनाम है. गणपति को लेकर अलग-अलग चर्चाएं हैं. कहा जा रहा है कि वह सुरक्षा एजेंसियों के संपर्क में है. साथ ही यह भी चर्चा है कि वह देश छोड़कर भाग गया है. उसने नेपाल में अपना ठिकाना बना लिया है. माओवादी सेंट्रल कमेटी का सदस्य मिसिर बेसरा भी एक करोड़ का इनामी है. बताया जा रहा है कि वह 70 हथियारबंद नक्सलियों के साथ झारखंड और उसके आसपास के जंगल में एक्टिव है. 

बेच्चा और सोढ़ी बीजापुर-तेलंगाना के जंगल में छिपे  

हिडमा की टीम में शामिल रहा नक्सल कमांडर हेमला बेच्चा, सोढ़ी केशा, महिला नक्सल लीडर रूपी और चंदर भी अंडर ग्राउंड हैं. अब तक इनकी भी गिरफ्तरी नहीं हो सकी है. चर्चा है कि सोढ़ी केशा और हेमला बेच्चा बीजापुर-तेलंगाना के सीमावर्ती जंगल में छिपे हुए हैं. 

महिला नक्सली रूपी कांकेर में सक्रिय 

रूपी अपने एक दर्जन साथियों के साथ कांकेर व सीमावर्ती जिलों के जंगल में सक्रिय हैं. बताया जा रहा है कि सोढ़ी केशा, हेमला बेच्चा और रूपी से सुरक्षा एजेंसियां संपर्क करने का प्रयास कर रही हैं. कुछ दिन पहले रूपी और चंदर के तीन साथी सदस्यों ने सरेंडर किया था. इसके बाद उन्होंने पत्र लिखकर रूपी और चंदर से लौट आने की अपील भी की थी.   \

AI Photo

आईजी- गणपति की उम्र हो गई, उसमें ताकत नहीं बची 

नक्सलवाद के खात्मे की डेडलाइन 31 मार्च 2026 खत्म होने के बाद भी इन बड़े माओवादियों के पकड़ से बाहर होने को लेकर NDTV ने बस्तर रेंज आई सुंदरराज पी से बात की. उन्होंने कहा कि गणपति की उम्र हो गई, वह ज्यादातर अस्वस्थ ही रहता है. उसमे अब वह ताकत नहीं बची कि वह संगठन को दोबारा खड़ा कर सके. मिसिर बेसरा झारखंड में लंबे समय से सक्रिय रहा है. झारखंड की सुरक्षा एजेंसी उसे मुख्यधारा में लौटाने का प्रयास कर रही हैं. उन्होंने कहा क 26 महीने में 2500 से ज्यादा नक्सलियों ने किया पुनर्वास किया है, 2000 से अधिक की गिरफ्तारी हुई है. 600 से ज्यादा को मार दिया गया है.

Advertisement

सीएम साय- सशस्त्र नक्सली समस्या से निजात मिली 

नक्सलवाद को लेकर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय कहते हैं कि 31 मार्च का दिन छत्तीसगढ़ के लिए ऐतिहासिक है, छत्तीसगढ़ से नक्सलवाद समाप्त हो रहा है. अब सशस्त्र नक्सली समस्या से राज्य को निजात मिल गई है. इसके लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह को छत्तीसगढ़ की 3 करोड़ जनता की ओर से बहुत धन्यवाद.  
Featured Video Of The Day
Meenakshi Kandwal | Kachehri | ईरान के पास अमेरिका के 'राज'? | Iran US War | War News | NDTV India