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This Article is From Nov 27, 2019

इस तरह यूपी के सीएम से देश के प्रधानमंत्री बने थे वीपी सिंह, जानिए ये 6 बातें

पूर्व प्रधानमंत्री वीपी सिंह (V.P. Singh) ने मंडल कमीशन की सिफारिशों को मानकर देश में वंचित समुदायों की सत्ता में हिस्सेदारी पर मोहर लगाई थी.

इस तरह यूपी के सीएम से देश के प्रधानमंत्री बने थे वीपी सिंह, जानिए ये 6 बातें
देश के पूर्व प्रधानमंत्री वीपी सिंह
नई दिल्ली:

देश के पूर्व प्रधानमंत्री वी.पी. सिंह (V.P. Singh) की आज पुण्यतिथि है. प्रधानमंत्री के रूप में उनकी छवि एक मजबूत और सामाजिक राजनैतिक दूरदर्शी व्यक्ति की थी. उन्होंने मंडल कमीशन की सिफारिशों को मानकर देश में वंचित समुदायों की सत्ता में हिस्सेदारी पर मोहर लगाई थी. वी.पी. सिंह (Vishwanath Pratap Singh) का जन्म इलाहाबाद (अब प्रयागराज) में हुआ. उनके राजनीतिक सफर की शुरुआत यूपी से ही हुई. वह 1969-1971 में उत्तर प्रदेश विधानसभा में पहुंचे. उन्होंने उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री का कार्यभार भी संभाला. वह 9 जून 1980 से 28 जून 1982 राज्य के मुख्यमंत्री रहे. इसके पश्चात्त वह 29 जनवरी 1983 को केन्द्रीय वाणिज्य मंत्री बने. वह देश के वित्त मंत्री भी बने थे. राजीव गांधी की सरकार के खिलाफ वी.पी. सिंह ने भ्रष्टाचार के मुद्दे पर बड़ा प्रचार अभियान चलाया था. उन्होंने 1989 के चुनाव में राजीव गांधी को शिकस्त दी थी और 1989 से 1990 तक प्रधानमंत्री का पदभार संभाला था.


पूर्व प्रधानमंत्री वी.पी. सिंह से जुड़ी 5 बातें 
 

1. वी.पी. सिंह का जन्म 25 जून 1931 को इलाहाबाद में हुआ था. उन्होंने इलाहाबाद एवं पूना विश्वविद्यालय से शिक्षा प्राप्त की थी. 

2. विश्वनाथ प्रताप सिंह 1947-1948 में उदय प्रताप कॉलेज, वाराणसी की विद्यार्थी यूनियन के अध्यक्ष रहे. वह इलाहाबाद विश्वविद्यालय की स्टूडेंट यूनियन में उपाध्यक्ष भी थे. 1957 में उन्होंने भूदान आन्दोलन में सक्रिय भूमिका निभाई थी. सिंह ने अपनी ज़मीनें दान में दे दीं.

3. वीपी सिंह 9 जून 1980 से 28 जून 1982 तक उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे.  इसके पश्चात्त वह 29 जनवरी 1983 को केन्द्रीय वाणिज्य मंत्री बने. विश्वनाथ प्रताप सिंह राज्यसभा के भी सदस्य रहे.

4. 31 दिसम्बर 1984 को वह भारत के वित्तमंत्री भी बने. इस दौरान ही उनका टकराव राजीव गांधी के साथ हुआ.

5. राजीव गांधी के साथ मतभेद होने के बाद वी.पी. सिंह कांग्रेस से अलग हो गए. उन्होंने बोफोर्स तोप सौदे के मामले में राजीव गांधी को घेरा. उन्होंने 1989 के लोकसभा चुनाव के बाद भाजपा और वामदलों के सहयोग से केंद्र में सरकार बनाई.

6. प्रधानमंत्री के रूप में सिंह ने मंडल आयोग की सिफारिशें लागू करने का फैसला किया. इसी दौरान आरक्षण विरोधी अभियान के बारे में उनके रुख के कारण वह समाज के एक वर्ग में अलोकप्रिय भी हुए. 

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