
कोरोनावायरस (Coronavirus) संक्रमण से बचाव के लिए पूरे देश में लॉकडाउन लागू है. सब कुछ बंद है. इसी बीच दिल्ली यूनिवर्सिटी (Delhi University) के ऑनलाइन एग्जाम का मुद्दा गरमा गया है. कांग्रेस के छात्र संगठन NSUI ने दिल्ली यूनिवर्सिटी (DU) के ऑनलाइन एग्जाम कराए जाने के फैसले का विरोध किया है. नेशनल स्टूडेंट्स यूनियन ऑफ इंडिया (NSUI) का कहना है कि बहुत से ऐसे छात्र हैं जो आर्थिक स्थिति के चलते ऑनलाइन एग्जाम का हिस्सा बनने में सक्षम नहीं हैं. ऐसे छात्रों का भारी नुकसान होगा. NSUI ने जारी प्रेस रिलीज में कहा, ''जो छात्र पिछड़ी पृष्ठभूमि से हैं, प्रौद्योगिकी का खर्च नहीं उठा सकते हैं. ओबीसी, ईडबल्यूसी, एससी-एसटी श्रेणी के अधिकांश छात्र ऑनलाइन परीक्षाओं के लिए उपस्थित नहीं रह सकते हैं, इससे उन्हें नुकसान होगा.''
संगठन ने इसके अलावा ये भी कहा है कि ऑनलाइन क्लासेज को लेकर भी काफी छात्रों ने शिकायत की है. NSUI का दावा है, ''कई छात्र मोबाइल फोन या लैपटॉप न होने के चलते ऑनलाइन क्लास का हिस्सा ही नहीं बन पाए हैं. खासकर जम्मू-कश्मीर के छात्र इंटरनेट की शिकायत कर रहे हैं, क्योंकि वहां अभी भी 2जी सेवा है, जबकि उत्तर पूर्वी बेल्ट में इंटरनेट की सुविधा नहीं है. कई कॉलेज में रामजस कॉलेज की तरह ऑनलाइन क्लासेज भी नहीं कराई गई हैं.''

इन तमाम मसलों को उठाते हुए एनएसयूआई ने मांग की है कि ऑनलाइन परीक्षा को लेकर पुनर्विचार किया जाना चाहिए. एनएसयूआई ने ये प्रतिक्रिया यूजीसी के उस फैसले पर दी है, जिसमें कहा गया है यूनिवर्सिटी अपने हिसाब से नियमों को ध्यान में रखते हुए ऑनलाइन या ऑफलाइन परीक्षा करा सकती है. यूजीसी (UGC) के इस रुख के बाद दिल्ली यूनिवर्सिटी सेमेस्टर एग्जाम के लिए ऑनलाइन ओपन बुक एग्जामिनेशन (DU Online Exam) आयोजित कराने के बारे में विचार कर रही है.
दिल्ली यूनिवर्सिटी (Delhi University) के एग्जामिनेशन डीन विनय गुप्ता ने लेटर में ओपन बुक एग्जामिनेशन की गाडइडलाइन्स के बारे में डिटेल में जानकारी दी है और सभी शिक्षकों से क्वेश्चन पेपर सबमिट करने के लिए कहा है. लेटर में उन्होंने लिखा, "मौजूदा स्थिति में यूनिवर्सिटी सभी स्ट्रीम के फाइनल ईयर के स्टूडेंट्स के लिए ऑनलाइन ओपन बुक एग्जामिनेशन आयोजित कराने पर विचार कर रही है."
इसी का एनएसयूआई ने विरोध किया है. इससे पहले एनएसयूआई ने फाइनल ईयर के स्टूडेंट्स को पिछले साल के प्रदर्शन के आधार पर 10 फीसदी एक्स्ट्रा मार्क्स के साथ पास करने की भी मांग की थी.
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