यह ख़बर 10 जनवरी, 2011 को प्रकाशित हुई थी

अफ्रीका में बढ़ रहा है भारतीय कंपनियों का दबदबा

खास बातें

  • एक आम उपभोक्ता के लिए यह बदलाव बहुत मायने नहीं रखता है, पर किसी एक महाद्वीप के लिए यह स्पष्ट संकेत है कि भारत आगे बढ़ रहा है।
नैरोबी:

अफ्रीका के लाखों मोबाइल फोन धारकों की फोन स्क्रीन पर पिछले दिनों कुवैती कंपनी जईन का आइकन हट गया और उसकी जगह भारती-एयरटेल का आइकन आ गया। एक आम उपभोक्ता के लिए यह बदलाव बहुत मायने नहीं रखता है, पर किसी एक महाद्वीप के लिए यह स्पष्ट संकेत है कि भारत आगे बढ़ रहा है। भारती-एयरटेल का 16 अफ्रीकी देशों में विस्तार अफ्रीका में भारत के उदय की कहानी है। यह ऐसे समय हुआ है जब इन देशों में विदेशी निवेश मुख्य रूप से चीन से ही केंद्रित रहता था। अफ्रीका में भारत का कूटनीतिक प्रोफाइल भी तेजी से बढ़ रहा है। प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह सहित उनके कई मंत्रिमंडल सहयोगी हाल के बरसों में व्यावसायिक प्रतिनिधिमंडल को लेकर इन देशों में जा चुके हैं। भारतीय कंपनियां अफ्रीका में चीनी कंपनियों के प्रोफाइल के साथ कदमताल कर रही हैं। अफ्रीकी मामलों को देखने वाले एक एडवोकेसी समूह ब्रिटेन के फाहामु ऑर्गेनाइजेशन के अनुंधान निदेशक सुनुशा नायडू ने कहा, मुझे लगता है कि भारत को इस तरह की भागीदारी में पिछड़ना नहीं चाहिए। नायडू ने कहा कि अफ्रीका में बढ़ती भारतीय रुचि पर ज्यादा ध्यान नहीं दिया जा रहा है, क्योंकि भारत को चीन की तरह चुनौती नहीं माना जाता है। उन्होंने कहा कि भारत एक लोकतांत्रिक देश है। यहां कम्युनिस्टों की सत्ता नहीं है। ये सभी बातें उसके पक्ष में हैं। उन्होंने कहा कि भारत और चीन का अफ्रीका में बढ़ती रुचि का एक ही कारण है, अफ्रीका नए विकास का प्रतिनिधित्व करता है।


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