खास बातें
- सरकार ने चार साल तक गेहूं निर्यात पर लगे प्रतिबंध को हटाने का निर्णय किया है। सरकार ने 2007 के शुरू में गेहूं के निर्यात पर पाबंदी लगा दी थी।
New Delhi: सरकार ने चार साल से अधिक समय से गेहूं निर्यात पर लगे प्रतिबंध को हटाने का निर्णय किया है। हालांकि वैश्विक बाजार में कीमतों में नरमी को देखते हुए भारत से गेहूं के निर्यात की संभावनाएं फिलहाल बहुत अच्छी नहीं हैं। सरकार ने घरेलू महंगाई को देखते हुए 2007 के शुरू में गेहूं के निर्यात पर पाबंदी लगा दी थी। कृषिमंत्री शरद पवार ने शनिवार को कहा, हां, अब निर्यात पर पाबंदी नहीं है। गेहूं का निर्यात खोल दिया गया है। पवार भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के स्थापना दिवस समारोह के बाद संवाददाताओं से बातचीत कर रहे थे। उन्होंने कहा कि सरकार ने अभी यह घोषणा नहीं की है कि कितने गेहूं का निर्यात किया जाएगा, क्योंकि अंतरराष्ट्रीय बाजार में इसकी कीमतें नीचे चल रही हैं। उल्लेखनीय है कि खाद्यान्न पर वित्तमंत्री प्रणब मुखर्जी की अध्यक्षता वाला मंत्रियों के अधिकार प्राप्त समूह ने गेहूं निर्यात खोलने पर सैद्धांतिक सहमति दे दी है। यह निर्णय भंडार की बेहतर स्थिति को देखते हुए किया गया है। पवार ने अंतरराष्ट्रीय बाजार के हालात को देखते हुए फिलहाल भारत से गेहूं के निर्यात की संभावना पर आशंका जाहिर की। उन्होंने कहा, मुझे नहीं लगता है कि कहीं से कोई हरकत होगी। सवाल है कि क्या हम अंतरराष्ट्रीय बाजार में जो नीचा भाव चल रहा है, उस पर माल बेच सकेंगे। कृषिमंत्री ने कहा कि भंडारण की समस्या बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि इस समय हमारे पास गोदाम में जरूरत से अधिक भंडार हैं। ऐसे में मेरी वास्तविक चिंता है कि जब आंध्र प्रदेश और पंजाब में धान की खरीद शुरू होगी, तो उसे रखने का क्या इंतजाम होगा। यद्यपि सरकार ने जुलाई-जून (2010-11) के उत्पादन के अंतिम आंकड़े जारी नहीं किए है, परंतु सूत्रों का कहना है कि वर्ष के दौरान गेहूं का उत्पादन 8.6 करोड़ टन हुआ है, जो कि एक रिकॉर्ड है। इससे पिछले वर्ष गेहूं उत्पादन 8.08 करोड़ टन था।