खास बातें
- अर्थव्यवस्था के लिए आज का दिन चिंता बढ़ाने वाला रहा। औद्योगिक उत्पादन 5.1 प्रतिशत घट गया और रुपया अब तक के नए न्यूनतम स्तर तक गिरा।
नई दिल्ली: देश की अर्थव्यवस्था के लिए आज का दिन चिंता बढ़ाने वाला रहा। औद्योगिक उत्पादन अक्टूबर में 5.1 प्रतिशत घट गया जबकि अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया अब तक के नए न्यूनतम स्तर तक गिर गया। शेयर बाजार में भी गिरावट रही और संवेदी सूचकांक 16,000 अंक से नीचे चला गया। वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी पहले ही कह चुके हैं कि सरकार के लिए राजकोषीय घाटे को सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) का 4.6 प्रतिशत के दायरे में रखना चुनौतीपूर्ण होगा। औद्योगिक उत्पादन वृद्धि में पिछले कुछ महीनों से सुस्ती दिखाई दे रही थी। सितंबर में इसमें मात्र 1.9 प्रतिशत वृद्धि दर्ज की गई जबकि अक्टूबर के आंकड़ों में औद्योगिक उत्पादन पिछले साल के मुकाबले 5.1 प्रतिशत घट गया। शेयर बाजार पर भी इसका असर हुआ और बीएसई संवेदी सूचकांक 340 अंक से अधिक घटकर 16,000 से नीचे चला गया। इस गिरावट से निवेशकों को शेयर मूल्य में आई गिरावट के रुप में तीन लाख करोड़ रुपये का नुकसान हुआ। अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया नई तलहटी पर पहुंच गया। पिछले दिनों डालर के मुकाबले रुपया 52 रुपये के आसपास पहुंचा था लेकिन आज यह 80 पैसे से अधिक टूटकर 52.85 रुपये प्रति डॉलर तक गिर गया। रुपये में गिरावट से जहां निर्यातकों को फायदा होगा वहीं आयात महंगा हो जाएगा और उत्पादन लागत बढ़ जाएगी। रुपया कमजोर पड़ने से पेट्रोलियम कंपनियों का बोझ और बढ़ेगा। कच्चे तेल का आयात महंगा होगा।