दूरसंचार, उपग्रह कंपनियों में विवाद के बीच ट्राई ने 5जी नीलामी पर 15 फरवरी तक विचार मांगे

5जी स्पेक्ट्रम की नीलामी इसी साल किए जाने की संभावना, दूरसंचार और उपग्रह आधारित सेवाएं देने वाली कंपनियों में इस मुद्दे को लेकर भारी मतभेद

दूरसंचार, उपग्रह कंपनियों में विवाद के बीच ट्राई ने 5जी नीलामी पर 15 फरवरी तक विचार मांगे

प्रतीकात्मक फोटो.

नई दिल्ली:

दूरसंचार तथा उपग्रह क्षेत्र की कंपनियों के बीच 5जी स्पेक्ट्रम के आवंटन नियमों को लेकर खुली चर्चा के दौरान मतभेद खुलकर सामने आए. इस खुली चर्चा का आयोजन भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (ट्राई) ने किया था. 5जी स्पेक्ट्रम की नीलामी इसी साल किए जाने की संभावना है. दूरसंचार और उपग्रह आधारित सेवाएं देने वाली कंपनियों में इस मुद्दे को लेकर भारी मतभेदों के बीच नियामक ने उनसे 5जी स्पेक्ट्रम की नीलामी के लिए अपने अतिरिक्त विचार 15 फरवरी तक देने को कहा है. विशेष रूप से ट्राई ने स्पेक्ट्रम के मूल्यांकन के तौर-तरीके को लेकर ब्योरा देने को कहा है.

ट्राई ने इससे पहले 5जी स्पेक्ट्रम के लिए 3,300 से 3,600 मेगाहर्ट्ज बैंड को 492 करोड़ रुपये प्रति मेगाहर्ट्ज के आधार मूल्य की सिफारिश की थी. ऐसे में 5जी स्पेक्ट्रम खरीदने की इच्छुक दूरसंचार कंपनियों को अखिल भारतीय स्तर पर यह स्पेक्ट्रम खरीदने के लिए कम से कम 9,840 करोड़ रुपये खर्च करने होंगे.

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रिलायंस जियो इन्फोकॉम के अध्यक्ष रवि गांधी और भारती एयरटेल के मुख्य नियामकीय अधिकारी राहुल वत्स और सीओएआई (सेल्यूलर ऑपरेटर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया) के उप-महानिदेशक विक्रम तिवथिया ने सुझाव दिया कि नियामक मध्यम बैंड और उच्च फ्रीक्वेंसी के बैंड में 5जी स्पेक्ट्रम के लिए अंतरराष्ट्रीय मानक का इस्तेमाल कर आधार मूल्य तय करे.



(इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है. यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)