खास बातें
- आरबीआई की सालाना मौद्रिक नीति की समीक्षा से पहले मुख्य आर्थिक सलाहकार रघुराम राजन ने कहा कि ब्याज दरों में कटौती की गुंजाइश है, क्योंकि गैर खाद्य मुद्रास्फीति घटी है और वृद्धि को प्रोत्साहित करने की जरूरत है।
नई दिल्ली: आरबीआई की सालाना मौद्रिक नीति की समीक्षा से पहले मुख्य आर्थिक सलाहकार रघुराम राजन ने कहा कि ब्याज दरों में कटौती की गुंजाइश है, क्योंकि गैर खाद्य मुद्रास्फीति घटी है और वृद्धि को प्रोत्साहित करने की जरूरत है।
आरबीआई 3 मई को 2013-14 के लिए मौद्रिक नीति की घोषणा करने वाला है।
राजन ने यहां एक समारोह में कहा, रबी की फसल अच्छी होने की संभावना है। इससे मुद्रास्फीति कम करने में मदद मिलेगी। इसलिए मुद्रास्फीति कम के मद्देनजर आरबीआई के लिए ब्याज दर में कटौती की गुंजाइश है। मुझे लगता है कि हमारे पास बेहतर वृद्धि की गुंजाइश है। थोकमूल्य सूचकांक आधारित मुद्रास्फीति मार्च के महीने में घटकर तीन साल के न्यूनतम स्तर 5.96 फीसदी पर आ गई जबकि आरबीआई ने इसके 6.8 फीसदी रहने का अनुमान लगाया था।
आरबीआई ने मार्च में मौद्रिक नीति की पिछली समीक्षा में अपनी अल्पकालिक रिण दर (रेपो) 0.25 फीसदी घटाकर 7.5 फीसदी कर दी थी।
भारतीय आर्थिक वृद्धि 2012-13 में घटकर पांच फीसदी के न्यूनतम स्तर पर आ गई। चालू वित्त वर्ष की तीसरी तिमाही के दौरान वृद्धि चार साल के न्यूनतम स्तर 4.5 फीसदी पर आ गई।
कर कानूनों में पिछली तारीख से संशोधन से नकारात्मक रख के संबंध में पूछे गए सवाल के जवाब में राजन ने कहा, आम तौर पर सरकार को पिछली तारीख से संशोधन से बचना चाहिए, जैसा कि पार्थसारथी शोम समिति की रपट में सुझाव दिया गया है।