खास बातें
- आतंकवाद प्रभावित इस राज्य में लगभग 500,000 पुरुष एवं महिलाएं बेरोजगार हैं, जिन्हें प्राय: आतंकी संगठन भर्ती के लिए निशाना बनाते हैं।
नई दिल्ली: जम्मू एवं कश्मीर में बेरोजगारी पर काबू पाने के लिए केंद्र सरकार ने निजी क्षेत्र से मदद चाहती है।आतंकवाद प्रभावित इस राज्य में लगभग 500,000 पुरुष एवं महिलाएं बेरोजगार हैं, जिन्हें प्राय: आतंकी संगठन भर्ती के लिए निशाना बनाते हैं। यहां के जामिया मिलिया विश्वविद्यालय द्वारा कश्मीर पर आयोजित एक सेमिनार में केंद्रीय गृह सचिव जीके पिल्लै ने कहा, "जम्मू एवं कश्मीर में बेरोजगारी एक बड़ा मुद्दा है। इसके समाधान के लिए केंद्र सरकार गंभीरतापूर्वक विचार कर रही है।" उन्होंने कहा कि निजी क्षेत्र 100,000 कश्मीरी युवाओं को रोजगार दे सकता है। युवा वहां वेतनभोगी प्रशिक्षु के तौर पर कार्य सीख सकते हैं और अपनी कार्यकुशलता बढ़ा सकते हैं। कश्मीर में पिछले वर्ष महीनों चले हिंसक प्रदर्शनों के बाद शांति बहाली के लिए लोगों का विश्वास जीतने के उपायों की घोषणा करते हुए पिल्लै ने कहा, "हमने देश के कारपोरेट जगत से कहा है कि वे कश्मीरियों पर ध्यान दें और उन्हें रोजगार दें।" उन्होंने कहा कि राज्य में रोजगार सृजित करने की योजना तैयार करने के लिए प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने एक विशेषज्ञ समूह का गठन किया है। यह समूह जल्द ही अपनी रिपोर्ट पेश करेगा। पिल्लै ने कहा कि इस समूह का गठन पिछले वर्ष 10 अगस्त को हुआ था। इसका नेतृत्व रिजर्व बैंक के पूर्व गवर्नर सी. रंगराजन कर रहे हैं। समूह गठित होने के तीन महीने के भीतर रिपोर्ट पेश करने को कहा गया था। इस समूह के गठन का उद्देश्य 1989 से ही अलगाववादी अभियान का सामना कर रहे युवाओं में पनप रही भ्रांतियों को तोड़ना है। पिल्लै ने कहा कि केंद्र सरकार यह उम्मीद नहीं करती कि असुविधाओं, जलवायु एवं उपयुक्त स्थान की समस्या को देखते हुए कोई बड़ी औद्योगिक इकाई कश्मीर में निवेश करेगा। उन्होंने कहा, "लेकिन कश्मीर मेंसूचना प्रौद्योगिकी, कृषि, बागवानी, पर्यटन एवं साहसिक खेलोंको बढ़ावा दिया जा सकता है। केंद्र सरकार की नजर इन क्षेत्रों के विकास पर है, क्योंकि ये राज्य में बड़े पैमाने पर रोजगार मुहैया करा सकते हैं।" आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार राज्य में लगभग 500,000 युवा बेरोजगार हैं।