खास बातें
- नॉर्वे की टेलीकॉम कंपनी टेलीनॉर ने भारत में किए निवेश को बचाने के लिए कमर कस ली है। कंपनी कानूनी लड़ाई के साथ−साथ कूटनीति का सहारा ले रही है।
नई दिल्ली: नॉर्वे की टेलीकॉम कंपनी टेलीनॉर ने भारत में किए निवेश को बचाने के लिए कमर कस ली है। कंपनी कानूनी लड़ाई के साथ−साथ कूटनीति का भी सहारा ले रही है। यूनिटेक वायरलेस में टेलीनॉर की 67 फीसदी की हिस्सेदारी है, जिसके 22 टेलीकॉम लाइसेंस सुप्रीम कोर्ट ने रद्द कर दिए थे।
आज नॉर्वे के मंत्री रिगमॉर असरुद दिल्ली में होंगे। इस दौरान वह सरकार के अधिकारियों से मुलाकात करेंगे। इसके अलावा नॉर्वे के पूर्व प्रधानमंत्री भी दिल्ली में अधिकारियों से इस मामले में चर्चा करेंगे। नॉर्वे सरकार से समर्थन मिलने के पीछे एक मुख्य वजह यह है कि टेलीनॉर में नॉर्वे सरकार की 54 फीसदी की हिस्सेदारी है। वहीं टेलीनॉर कोर्ट में सुप्रीम कोर्ट के फैसले के खिलाफ अपील करने वाला है। कंपनी की दलील है कि स्पेक्ट्रम मिलने के बाद उसने यूनिटेक वायरलेस में हिस्सेदारी खरीदी थी। इसलिए वह घोटले में भागीदार नहीं हैं। टेलीनॉर ने नए लाइसेंस के लिए भी बोली लगाने वाला है।
इसके अलावा टेलीनॉर की साझा कंपनी 'यूनीनॉर' ने आज कहा कि 2जी लाइसेंस के लिए दोबारा होने वाली नीलामी में उन्हीं प्रतिभागियों को शामिल किया जाना चाहिए जिन्हें वर्ष 2008 में लाइसेंस आवंटित किए गए थे। यूनीनॉर के प्रबंध निदेशक सिग्वे ब्रेक्के ने संवाददाताओं से कहा, "नीलामी में उन्हीं नए प्रतिभागियों को शामिल किया जाए, जो वर्ष 2008 में थे।"
उन्होंने कहा, "पिछली बार यह बिल्कुल साफ था कि सरकार की नीति प्रतिस्पर्धा बढ़ाने की थी। इसलिए उस वक्त बाजार में स्थापित कम्पनियों को आमंत्रित नहीं किया गया। इस वक्त भी उसी नीति की आवश्यकता है। स्थापित कम्पनियों को आमंत्रित नहीं किया जाना चाहिए।" ब्रेक्के ने कहा कि कम्पनी का संचालन ठीक से चल रहा है। लेकिन सेवाओं को बंद किए जाने की अफवाह से यूनीनॉर परेशान है।