खास बातें
- मध्य पूर्व के राजनीतिक संकट और ईरान के साथ आयात के भुगतान के तरीकों पर उपजी समस्या के कारण देश के चाय निर्यात पर असर पड़ा है।
Kolkata: मध्य पूर्व के राजनीतिक संकट और ईरान के साथ आयात के भुगतान के तरीकों पर उपजी समस्या के कारण देश के चाय निर्यात पर असर पड़ा है। इस साल जनवरी से अगस्त तक की अवधि में चाय के निर्यात में पिछले साल की समान अवधि की तुलना में 1.4 करोड़ किलोग्राम की गिरावट रही। भारतीय चाय बोर्ड के आंकड़ों के मुताबिक जनवरी से अगस्त तक की अवधि में देश का चाय निर्यात 10.924 करोड़ किलोग्राम (अनुमानित) रहा। पिछले साल की समान अवधि में यह 12.415 करोड़ किलोग्राम (अनुमानित) था। विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान के साथ भुगतान संकट और मध्य-पूर्व तथा उत्तरी अफ्रीकी देशों (लीबिया, सीरिया और मिस्र) की राजनीतिक संकट के कारण निर्यात में कमी आई। दुनिया के सबसे बड़े चाय उत्पादक मैकलियोड रसेल के निदेशक कमल बहेटी ने कहा, "मुख्य समस्या ईरान के साथ भुगतान संकट रही। कुछ भुगतान रोक लिए जाने के कारण निर्यात अवरुद्ध हो गया। इसके साथ ही ईरान को अब चाय का सीधा निर्यात नहीं हो रहा है।" ईरान चाय का एक बड़ा ग्राहक है। वह हर साल 1.5 करोड़ किलोग्राम चाय का आयात करता है। भारतीय चाय संघ (आईटीए) के महासचिव मनोजीत दासगुप्ता ने कहा कि जनवरी से अगस्त तक ईरान को चाय निर्यात में पिछले साल की समान अवधि के मुकाबले 40 लाख किलोग्राम तक की कमी आई है। बहेटी ने कहा कि इस साल चाय निर्यात में एक करोड़ किलोग्राम तक की कमी आ सकती है। देश की एक प्रमुख चाय उत्पादक और निर्यातक कम्पनी गुडरिक ने भी कहा कि मध्य पूर्व के राजनीतिक संकट और ईरान के साथ भुगतान की समस्या के कारण चाय का निर्यात प्रभावित हुआ है। गुडरिक समूह के प्रबंध निदेशक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी अरुण एन. सिंह ने कहा, "मध्य पूर्व के देश चाय के प्रमुख आयातक हैं। लेकिन राजनीतिक संकट के कारण इन देशों में निर्यात कम हो सका।" उन्होंने कहा कि इसके साथ ही श्रीलंका की तुलना में भारतीय चाय थोड़ी महंगी होने के कारण भी रूस और पूर्व सोवियत गणराज्य से अलग हुए देशों में चाय का निर्यात कम हो पाया। इस अवधि में हालांकि दार्जीलिंग चाय का निर्यात अधिक रहा। दार्जीलिंग चाय संघ के सचिव कौशिक बसु ने कहा कि दार्जीलिंग चाय का निर्यात इस अवधि में आठ से 10 फीसदी अधिक रहा, लेकिन ऐसा मांग बढ़ने के कारण नहीं हुआ, बल्कि इस अवधि में यहां चाय का उत्पादन पिछले साल की बनिस्पत 15 फीसदी अधिक रहा। उल्लेखनीय है कि दार्जीलिंग चाय के प्रमुख आयातक यूरोपीय संघ ने दार्जीलिंग चाय को प्रोटेक्टेड जियोग्रॉफिकल इंडिकेशन श्रेणी में रखा है, जो इस श्रेणी के अंदर रखे गए उत्पादों की नकल पर रोक लगाता है। बसु ने कहा कि इससे उत्पाद की साख बढ़ती है। साथ ही इससे निर्यात भी बढ़ सकता है।