कर-नीति विरोध भाव से मुक्त रखनी होगी : अरुण जेटली

वित्त मंत्री अरुण जेटली की फाइल फोटो

नई दिल्ली:

वित्त मंत्री अरुण जेटली ने विदेशी निवेशकों को आकर्षित करने के लिए देश में कारोबार के अनुकूल वातावरण उपलब्ध कराने का वादा करते हुए सोमवार को स्पष्ट रूप से कहा कि कोई कर पिछली तारीख से लागू नहीं किया जाएगा और हमारी कर-नीति विरोध भाव पर आधारित नहीं होगी।
 
जेटली ने कहा, ‘‘हमारा प्रयास है कि कर-प्रक्रिया बहुत सरल होनी चाहिए, तभी कर वसूली बढ़ेगी। हमें अपनी कर-नीति विरोध भाव से मुक्त रखनी होगी। सरकार का इरादा लोगों पर पिछली तिथि से करारोपण करने का कतई नहीं है।’’

वित्त मंत्री ने डी.पी कोहली स्मारक का व्याख्यान देते हुए कहा कि देश में कंपनियों पर आयकर का ढांचा वैश्विक दृष्टि से प्रतिस्पर्धी होना चाहिए। यही कारण है कि सरकार ने इस साल के बजट में कॉरपोरेट कर की दर 30 प्रतिशत से घटाकर 25 प्रतिशत करने का फैसला किया है।
 
उन्होंने कहा, ‘‘फैसलों में और शीघ्रता लाने की आवश्यकता है। राजनीतिक आम राय की प्रक्रिया को व्यापक राजनीतिक दृष्टि के साथ और परिपक्व होनी चाहिए।’’

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उन्होंने यह भी कहा कि भारत में कृषि और बुनियादी ढांचा क्षेत्र के समक्ष गंभीर चुनौतियां हैं।