खास बातें
- भारत को नई संधि के तहत स्विस बैंकों में जमा काले धन के पुराने मामलों की बजाय प्रभावी तिथि के बाद के मामलों में ही सूचना प्राप्त हो सकती है।
New Delhi: भारत को स्विस बैंकों में जमा काले धन के बारे में स्विट्जरलैंड से सूचना हासिल करने के लिए कम से कम 2012 तक इंतजार करना पड़ सकता है, क्योंकि इस संबंध में द्विपक्षीय संधि के इस वर्ष के अंत तक ही प्रभावी होने की संभावना है। विशेषज्ञों के अनुसार भारत को नई संधि के तहत स्विस बैंकों में जमा काले धन के पुराने मामलों की बजाय प्रभावी तिथि के बाद के मामलों में ही सूचना प्राप्त हो सकती है। स्विट्जरलैंड के फेडरल डिपार्टमेंट ऑफ फाइनेंस के एक प्रवक्ता ने बताया, संधि के प्रावधानों की भारत और स्विट्जरलैंड में विभिन्न स्तरों पर पुष्टि की जानी है। इसमें यूरोपीय संसद की मंजूरी भी शामिल है। इसके बाद यह 2011 के अंत तक ही प्रभावी हो सकती है। उसने कहा कि अगर 2011 के अंत तक इसके सभी प्रावधानों को सम्बद्ध पक्षों द्वारा स्वीकृत कर लिया जाता है तो संदिग्ध कर चोरों के बारे में सूचना का आदान-प्रदान सहित संधि के विभिन्न प्रावधान भारत में पहली अप्रैल, 2012 के बाद प्रभावी होंगे। विशेषज्ञों के मुताबिक, इसका मतलब यह है कि भारत अगले वित्त वर्ष की शुरुआत में या आगे के लिए कर चोरी एवं अन्य वित्तीय अपराधों पर सूचनाएं हासिल करने में समर्थ होगा और वह पिछली अवधि की सूचनाओं को हासिल नहीं कर सकेगा। उन्होंने कहा कि अब भी यह संभावना नगण्य है कि स्विस बैंकों में धन जमा करने वाले भारतीयों के नाम सार्वजनिक किए जाएं, जैसा कि विपक्षी दल मांग कर रहे हैं, क्योंकि इस तरह के कदम से न केवल द्विपक्षीय संधि का उल्लंघन होगा, बल्कि जांच प्रक्रिया भी प्रभावित हो सकती है। उल्लेखनीय है कि स्विस बैंकों में कुछ भारतीयों द्वारा जमा किए गए काले धन के मुद्दे पर भारत में विपक्षी दलों एवं सुप्रीम कोर्ट की ओर से सरकार पर भारी दबाव है। स्विस बैंकों में भारतीयों द्वारा अरबों डॉलर जमा कराने की रपटों के बीच यह एक बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन गया है। वित्तमंत्री प्रणब मुखर्जी और स्विट्जरलैंड के समकक्ष संघीय मंत्री कामी रे कालेधन की जांच में सहयोग के लिए दोनों देशों के बीच पुरानी दोहरा कराधान से बचाव की संधि में संशोधन करने के लिए 30 अगस्त, 2010 को एक करार पर हस्ताक्षर किए थे। इसकी पुष्टि दोनों पक्षों द्वारा की जानी है। संघीय वित्त विभाग के अधिकारी ने बताया कि ऐसी संधियों को देखने वाले एक संसदीय आयोग ने पिछले सप्ताह ही भारत के साथ संशोधित समझौते की पुष्टि करने का फैसला किया है। संसद की मंजूरी की प्रक्रिया इस वर्ष सितंबर तक पूरी हो सकती है।