यह ख़बर 18 जुलाई, 2012 को प्रकाशित हुई थी

अमीरों के लिए सब्सिडी के सिलेंडर होंगे सीमित

खास बातें

  • पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस राज्यमंत्री आरपी एन सिंह ने कहा कि सरकार उन लोगों के लिए सिलेंडरों की संख्या सीमित करने का फैसले के करीब है जो ‘आर्थिक रूप से कमजोर’ वर्ग में नहीं आते। इससे सालाना सब्सिडी खर्च में 10 हजार रुपये की कमी होने का अनुमान है।
बेंगलूरू:

सरकार रसोई गैस सिलेंडर पर सब्सिडी घटाने के फैसले लगभग कर चुकी है और इसके लागू होने पर ठीक माली हालत वालों को कम सब्सिडी वाले रसाईं गैस के सिलेंडरों की संख्या सीमित करने की योजना है।

पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस राज्यमंत्री आरपी एन सिंह ने बुधवार को कहा कि सरकार उन लोगों के लिए सिलेंडरों की संख्या सीमित करने का फैसले के करीब है जो ‘आर्थिक रूप से कमजोर’ वर्ग में नहीं आते। इससे सालाना सब्सिडी खर्च में 10,000 रुपये की कमी होने का अनुमान है।

इसके साथ ही सरकार डीजल की कीमतों को आंशिक रूप से नियंत्रण मुक्त भी करने की तैयारी कर रही है।

मंत्री ने कहा कि सरकार एलपीजी पर सब्सिडी में 36,000 करोड़ रुपये देती है और बहुत से ऐसे लोग जो आर्थिक दृष्टि से कमजोर वर्ग में नहीं आते और उन्हें इसकी जरूरत नहीं है, इसका लाभ उठाते हैं।
उन्होंने कहा कि सरकार सब्सिडी में कटौती, गैस सिलेंडरों की सीमा तय करेगी। इसके तहत सब्सिडी वाले सिलेंडरों की संख्या तय की जाएगी। सिंह ने यहां एक कार्यक्रम के मौके पर पत्रकारों से बातचीत में कहा कि सरकार एलपीजी सब्सिडी में कटौती के फैसले के करीब है।
‘यदि हम कुछ सिलेंडरों की सीमा तय करते हैं, तो इससे ऐसे गरीब लोगों के अधिकारों का हनन नहीं होगा जिन्हें सब्सिडी मिलती है। मुझे लगता है कि अमीरों के लिए सिलेंडरों की सीमा तय कर हम सब्सिडी पर 8,000 से 10,000 करोड़ रुपये बचा सकेंगे।’

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हालांकि, उन्होंने कहा कि डीजल कीमतों में वृद्धि का मामला संवेदनशील है। यदि आप डीजल के दाम बढ़ाने का प्रयास करते हैं, तो इसका अर्थव्यवस्था पर विपरीत असर पड़ेगा। हम इसका ऐसा समाधान निकालने का प्रयास कर रहे हैं जिससे इसका अर्थव्यवस्था पर कम असर हो, साथ ही राजकोषीय घाटे में कमी भी लाई जा सके।