नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) का 50 शेयरों पर आधारित संवेदी सूचकांक निफ्टी इसी अवधि में 2.76 फीसदी या 161.5 अंकों की तेजी के साथ 5,850.60 पर बंद हुआ। पिछले सप्ताह सेंसेक्स के 30 में से 23 शेयरों में तेजी रही। मारुति सुजुकी (11.01 फीसदी), गेल (8.70 फीसदी), जिंदल स्टील (8.05 फीसदी), आईटीसी (7.19 फीसदी) और भारती एयरटेल (5.69 फीसदी) में सर्वाधिक तेजी रही।
सेंसेक्स के गिरावट वाले शेयरों में प्रमुख रहे भेल (4.99 फीसदी), हीरो मोटोकॉर्प (3.42 फीसदी), सेसा गोवा (2.99 फीसदी), सिप्ला (2.45 फीसदी) और इंफोसिस (1.08 फीसदी)। गत सप्ताह बीएसई के मिडकैप और स्मॉलकैप सूचकांकों का रुख मिला-जुला रहा। मिडकैप 0.85 फीसदी तेजी के साथ 5,677.24 पर और स्मॉलकैप 0.44 फीसदी गिरावट के साथ 5,485.30 पर बंद हुआ।
पिछले सप्ताह बीएसई के 13 सेक्टरों में से 11 में तेजी रही। बैंकिंग (4.99 फीसदी), तेज खपत वाली उपभोक्ता वस्तु (4.60 फीसदी), वाहन (2.38 फीसदी), धातु (2.37 फीसदी) और सार्वजनिक कंपनियां (2.34 फीसदी) में सर्वाधिक तेजी रही। दो सेक्टरों रियल्टी (2.37 फीसदी) और स्वास्थ्य सेवा (0.51 फीसदी) में गिरावट दर्ज की गई।
पिछले सप्ताह के प्रमुख घटनाक्रमों में बुधवार को अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व ने देश की अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए दिए जा रहे प्रोत्साहन को जारी रखने का फैसला किया। फेड बाजार में तरलता का संचार करने के लिए हर माह 85 अरब डॉलर मूल्य के बांड की खरीददारी कर रहा था।
पिछले कुछ महीने से अमेरिका की अर्थव्यवस्था में सुधार के संकेत मिलने के बाद फेड ने बांड की खरीदारी के स्तर को चरणबद्ध तरीके से कम करते हुए आखिर में बंद करने के मुद्दे पर विचार करना शुरू किया था, लेकिन बाजार के अनुमान के उलट फेड ने प्रोत्साहन को फिलहाल कम से कम अगले महीने तक या अगर जरूरी हो तो अगले साल तक जारी रखने का फैसला किया है।
फेड का यह फैसला भारत तथा अन्य उभरते देशों की अर्थव्यवस्था के लिए सकारात्मक तथा अत्यधिक महत्वपूर्ण है। फेड के फैसले का स्वागत गुरुवार को भारतीय शेयर बाजारों ने तेजी के साथ किया और सेंसेक्स 684 अंकों की तेजी के साथ बंद हुआ।
फेड के फैसले के बाद शुक्रवार को भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने अप्रत्याशित कदम उठाते हुए रेपो दर को 0.25 फीसदी बढ़ाकर 7.5 फीसदी कर दिया। रेपो दर वह दर है, जिस पर वाणिज्यिक बैंक आरबीआई से कर्ज लेते हैं। इसके साथ ही रिवर्स रेपो दर को भी 6.25 फीसदी से बढ़ा कर 6.5 फीसदी कर दिया गया। रिवर्स रेपो दर वह ब्याज दर है, जो आरबीआई वाणिज्यिक बैंकों को अल्पावधिक जमा पर देता है। रेपो दर और रिवर्स रेपो दर के आधार पर वाणिज्यिक बैंक उपभोक्ताओं के लिए दर तय करते हैं। इनके बढ़ने से आवास, वाहन तथा अन्य प्रकार के ऋण पर लगने वाली ब्याज दरें बढ़ जाएंगी और विकास दर पर बुरा असर पड़ेगा, जो पहले से ही कम है।
आरबीआई के कदम पर बाजार ने निराशा जताई। फेडरेशन ऑफ इंडियन चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (फिक्की) की अध्यक्ष नैना लाल किदवई ने कहा, रेपो दर में 25 आधार अंकों की वृद्धि हमारे लिए अप्रत्याशित है। उन्होंने कहा कि उद्योग जगत को उम्मीद थी कि दर में या तो कटौती होगी या इसे जस का तस छोड़ दिया जाएगा, लेकिन वृद्धि से निवेश पर नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। भारतीय उद्योग परिसंघ के महानिदेशक चंद्रजीत बनर्जी ने कहा, रेपो दर में वृद्धि को टाला जा सकता था, क्योंकि उद्योग पहले से ही महंगी पूंजी और इसकी कम उपलब्धता से जूझ रहा है।
आरबीआई द्वारा मौद्रिक नीति में सख्ती करने से देश के शेयर बाजारों में शुक्रवार को गिरावट दर्ज की गई। प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स 382.93 अंकों की गिरावट के साथ 20,263.71 पर और निफ्टी 103.45 अंकों की गिरावट के साथ 6,012.10 पर बंद हुआ। सोमवार को जारी आंकड़ों के मुताबिक थोक मूल्यों पर आधारित महंगाई दर अगस्त में बढ़कर 6.10 फीसदी दर्ज की गई। यह दर पिछले छह महीनों में सर्वाधिक है इसके साथ ही खाद्य महंगाई में 18 फीसदी वृद्धि दर्ज की गई। मंगलवार को सोने के आभूषण पर आयात शुल्क बढ़ाकर 15 फीसदी कर दिया गया, ताकि घरेलू उद्योग की रक्षा हो और सोने का आयात कम हो।